ग्वालियर 20 अप्रैल ( कला प्रतिनिधी )। कलाकार वृहत्तर समाज का अंग होता है। वह समाज के लिए ही अपनी कला सृजन करता है। गुरुवार को कलावीथिका पड़ाव में यह बात ग्वालियर के सुधिजनों ने दिवंगत लेखक और कलाकार राम कुमार वर्मा की श्रद्धांजलि सभा में सिद्ध कर दी। इस श्रद्धांजलि सभा में शहर के कलाकार,पेंटर,मूर्तिकार,लेखक और रंगकर्मी शामिल हुए।
तानसेन कला वीथिका में चित्रकार रामकुमार वर्मा की स्मृति में इस सभा के पहले सभी उपस्थितजनों ने मौन धारण किया और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अंर्तमन से श्रद्धांजलि दी। उल्लेखनीय है कि लेखकीय जीवन से शुरुआत करने वाले रामकुमार वर्मा कालांतर में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हुए। उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग भारत सहित दुनिया के कई संग्रहालयों में प्रदर्शित हैं।


कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजक नगर के वरिष्ठ पेंटर प्रकाश सक्सेना ने दिवंगत कलाकार के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए संक्षिप्त जानकारियां दीं। इस क्रम में कला समीक्षक और पत्रकारिता के अध्यापक जयंत तोमर ने विस्तार से रामकुमार वर्मा के कला पक्ष और योगदान पर अपने विचार रखे साथ ही उन्होंने उस कला छात्र हरिओम की भी सराहना की जिसने इस अवसर के लिए स्वर्गीय कलाकार का स्केच तैयार किया था।
श्रद्धांजलि सभा में राजा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय के कला अध्यापक श्री बलवंत भदौरिया ने स्वर्गीय रामकुमार वर्मा के कला पक्ष को उजागर करते हुए कला छात्रों को उन से प्रेरणा लेने की बात कही, साथ ही उन्होंने कला क्षेत्र में गंभीर शोध को भी वर्तमान कला जगत की बड़ी आवश्यकता बताया। नगर की एकमात्र प्राचीन कला वीथिका में आयोजित इस कार्यक्रम में सुधीजनों ने आयोजन की प्रशंसा की और कहा कलाकार पूरे समाज के आदरणीय होते हैं। उनकी कला को प्रशंसा, प्रोत्साहन एवं स्मरण करना समाज से लगातार होते रहना चाहिए। इसी अभिव्यक्ति से हमारे नागरिक मूल्य एवंकला साधकों के प्रति हमारी संवेदनशीलता को सामने आने का अवसर मिलता है।
तानसेन म्यूजियम के लिए उठाएंगे आवाज
कला वीथिका में आयोजित इस सभा में प्रस्तावित तानसेन म्यूजियम को ग्वालियर से अन्यत्र भेजे जाने के सरकारी फैसले पर कलाकारों, कला छात्र छात्राओं एवं शिक्षकों सहित पूरे प्रबुद्ध समाज ने गहरी चिंता प्रकट की एवं कहा कि ऐसा करना संगीत सम्राट तानसेन और उनके प्रिय ग्वालियर का अपमान होगा। सभी का मानना था कि तानसेन की इस नगरी को संगीत से अलग नहीं किया जा सकता और संगीत के संग्रहालय के लिए ग्वालियर से उचित प्रदेश में कोई दूसरा स्थान नहीं हो सकता। अत तानसेन का म्यूजियम बाहर न ले जाते हुए ग्वालियर में ही बनना चाहिए।

