शकील अख़्तर, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘84 साल से ‘आर्टिस्ट कंबाइन’ का रंगकर्म को समर्पित अनवरत सफ़र जारी है। कोरोना संकट के विपरीत समय में भी ‘आर्टिस्ट्स कंबाइन’ ने एक नई ‘रंग दृष्टि’ के साथ आगे बढ़ने का काम किया है। सभी लॉकडाउन थे, वक्त चुनौती से भरा था। परंतु जिस तरह रंगकर्म की कुछ संस्थाएं और कलाकार सोशल मीडिया के मंचों का कर आगे बढ़ रहे थे। हमने भी उस दृष्टि से बेहतर काम करने का प्रयास किया’। आर्टिस्ट्स कंबाइन,ग्वालियर के सचिव डॉ. संजय लघाटे ने यह बात कही। ‘आर्टिस्ट्स कंबाइन’ की 84 वीं वर्षगांठ के अवसर पर वे चर्चा कर रहे थे।
कोरोना काल की चुनौती से लिया लोहा: डॉ. लघाटे ने कहा, ‘कोरोना काल का समय देश और दुनिया के साथ सभी के लिये एक झटका था। कलाकार भी अपने घरों में क़ैद अपनी रचनाधर्मिता के बारे में सोच रहे थे। ऐसे ही समय हमारे और देश मे बहुत से कलाकारों और संस्थाओं ने सोशल मीडिया का सदुपयोग कर विभिन्न कलाओं को आगे बढ़ाने का काम शुरू किया। हमने भी खुद को नई चुनौतियों के साथ खुद को ढालने का काम किया। यह सच है कि नये डिजिटल प्लेटफार्म पर आकर काम करना आसान नहीं था। परंतु धीरे-धीरे हम भी इस दिशा में आगे बढ़े और हमने ‘आर्टिस्ट्स कंबाइन’ के धज तले यू ट्यूब और फेसबुक पर ऑनलाइन ड्रामा शोज़ हिन्दी और मराठी दोनों में किये। दर्शकों को निरंतर रंगकर्म से जोड़ने का प्रयास किया। हमने समय की धारा के साथ खुद को बदला और रंगकर्म का सिलसिला नहीं तोड़ा, यह हमारे लिये बड़ी बात है। इसमें काफी साथियों की मदद भी मिली’।
इंस्टीट्यूट के काम सुचारू रूप से जारी : डॉ. लघाटे ने कहा, कोरोना की पहली और दूसरी वेव के समय हमारे -‘आर्टिस्ट कंबाइन इंस्टीट्यूट ऑफ परफोर्मिंग आर्ट्स ’ के काम में भी बाधा आई, परंतु अब इस काम का सिलसिला भी एक बार फिर आगे बढ़ रहा है। आप जानते ही हैं, इस इंस्टीट्यूट के माध्यम से हम रंगकर्म में दिलचस्पी रखने वाले बाल और नौजवान कलाकारों को प्रशिक्षित करने का काम कर रहे हैं। यहां पर सामान्य क्लासेस के अलावा हम लगातार रंगकर्म और विभिन्न कलाओं के विशेषज्ञों के व्याख्यान और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चला रहे हैं। पिछले दिनों ‘सैट डिज़ाइन’ का हमने एक महत्वपूर्ण सत्र रखा था। इसमें रंगमंच के प्रतिष्ठित आर्ट डायरेक्टर और अभिनेता, श्री दीपक सोनी ने व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया था’। साथ ही रंगभूषा (Makeup) पर भी निकेश शर्मा जी द्वारा प्रायोगिक दृष्टिकोण के साथ व्याख्यान हुआ था।
योगेश जी दे रहे नाट्य लेखन का प्रशिक्षण : 26 अक्टूबर से ख्यात मराठी अभिनेता और लेखक योगेश सोमण इंस्टीट्यूट में नाट्य लेखन का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसमें शहर के कुछ रंगकर्मी साथियों के साथ ही कुल 52 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। डॉ.उमा कंपूवाले,डॉ.हिमांशु द्विवेदी के आतिथ्य में हाल ही में श्री सोमण की यह कार्यशाला शुरू हुई है। इंस्टीट्यूट ने यह आयोजन राज्य मराठी विकास संस्था,मुंबई के सहयोग से किया है। योगेश जी करीब 32 सालों से रंगकर्म के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे कई मराठी-हिन्दी नाटकों, धारावाहिकों, फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। उत्तर भारत के दर्शक उन्हें, क्राइम पेट्रोल जैसे टीवी धारावाहिक,उड़ी (दि सर्जिकल स्ट्राइक), सत्यमेव जयते , वीर सावरकर जैसी फिल्मों की वजह से जानते हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं। इनमें वन एक्ट और टू एक्ट प्लेज़ की किताबों के अलावा,स्त्री सूक्त और परसराम, अंददोह, नकालात दिसाले सारे, नाट्यरंग, रंगमंच आदि प्रमुख हैं।
नये नाटकों का लिखा जाना ज़रूरी: डॉ. लघाटे ने कहा -‘ रंगमंच के आगे बढ़ने और इसकी जीवंतता के लिये नये नाटकों का लिखा जाना बहुत ज़रूरी है। आज भी हम जिन नाटकों को याद करते हैं, उनके मंचन करते हैं, वह पहले के कलमकारों का काम है। अब मंच पर नये विचारों,समस्याओं और नई दृष्टि का आगमन होना भी ज़रूरी है। इसके लिये हम सभी को मिलकर नई ज़मीन तैयार करना होगी। नये लेखकों का स्वागत करना होगा’।
नाटक ‘उसके बाद’ का सफल मंचन : अध्यापन से जुड़े डॉ.संजय लघाटे ख़ुद एक कलाकार और वरिष्ठ रंग निर्देशक हैं। आर्टिस्ट्स कंबाइन के स्थापना दिवस पर उन्होंने हृषिकेश वैद्य लिखित नाटक ‘उसके बाद’ का निर्देशन और मंचन किया है। यह ग्वालियर का पहला ऑनलाइन नाटक भी था इस प्रस्तुति की सभी ने सराहना की है। मंचन और अभिनय दोनों की दृष्टि से यह उत्कृष्ट नाटक रहा। इसमें रेणु झंवर, रिषिता मंगल, आनंददाणेकर, जय प्रकाश गोरे, मैत्रेयी बोराटे, केशवराव मजूमदार, प्रमोद पत्की, कार्तिक बक्षी,मुकुल थत्ते,तरिणी पुरंदरे जैसे कलाकारों केसाथ साहिल, वरूण, रोहित, हेरी, सुयश त्रिपाठी, दीप्ति मोघे, विजय जुन्नरक और यतीन्द्र चतुर्वेदी ने बेहतर तालमेल के साथ काम किया।
स्व. भागवत ने की थी आर्टिस्ट कंबाइन की स्थापना: बता दें, ‘आर्टिस्ट्स कंबाइन की स्थापना स्व. वाय सदाशिव भागवत ने 1937 में की थी। मध्य भारत की यह सबसे पुरानी नाट्य संस्था है। दाल बाज़ार,ग्वालियर स्थित इस नाट्य संस्था का अपना सभागार है। वर्तमान में संस्था के अध्यक्ष माधव रत्नपरखे हैं। पहले संस्था से मराठी रंगमंच के लिये समर्पित थी। 1954 से संस्था हिन्दी रंगमंच के लिये भी काम कर रही है। बीते 84 सालों में संस्था 360 से अधिक नाटकों का मंचन कर चुकी है। इनमें मराठी, हिन्दी के साथ कुछ संस्कृत नाटक भी शामिल हैं।
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