Wednesday, April 15, 2026
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‘कूल्ड ऑफ’ श्रेणी से साधना पर संकट, कलाकारों ने कहा, रद्द हों ‘मिनट्स’

आलोक शुक्ला, इंदौर स्टूडियो। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘गुरु-शिष्य परंपरा योजना’ के तहत जारी हालिया निर्णयों को लेकर कलाकारों ने चिंता जताई है। मंत्रालय द्वारा 23 मार्च 2026 को वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए जारी ‘मिनट्स’ में कई विसंगतियां सामने आई हैं। इसके विरोध में देश की 1100 से अधिक सक्रिय कला मंडलियों के कई प्रतिनिधि और रंगकर्मी दिल्ली में एकत्रित हुए। कलाकारों ने कहा है कि मंत्रालय ने 70 प्रतिशत सक्रिय संस्थाओं का अनुदान निरस्त या ‘कूल्ड ऑफ’ (Cooled-off) श्रेणी में डाल दिया है। इससे हजारों कलाकारों के सामने आजीविका और कला साधना एक नया संकट खड़ा हो गया है। सभी ने संस्कृति मंत्रालय से इस मुद्दे पर तुरंत हस्तक्षेप और पुनर्विचार की मांग की है। A photograph of artists united in Delhi in protest against recent decisions regarding the 'Guru-Shishya Parampara Scheme.' A report by Indore Studio.प्रक्रियात्मक खामियां और पारदर्शिता का अभाव: रंगकर्मियों ने मंत्रालय के समक्ष कई गंभीर बिंदु उठाए हैं, जो चयन प्रक्रिया के लिये चुनौती प्रस्तुत करते हैं। विरोध करने वाले कलाकारों के अनुसार, पहले के वर्षों के विपरीत इस बार चयन प्रक्रिया में नाटक, नृत्य और संगीत विधाओं के विषय-विशेषज्ञों को शामिल नहीं किया गया। पहले गुरुओं का विशेषज्ञों के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य था, जिससे पात्रता का वास्तविक सत्यापन होता था, लेकिन इस बार केवल ऑनलाइन आवेदनों के आधार पर एकतरफा निर्णय लिए गए।A photograph of artists united in Delhi in protest against recent decisions regarding the 'Guru-Shishya Parampara Scheme.' A report by Indore Studio.विरोधाभासी निर्णय और तकनीकी लापरवाही: कलाकारों ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जिन संस्थाओं को मंत्रालय के ही प्रतिनिधियों ने भौतिक सत्यापन (Physical Verification) में पात्र पाया था, उन्हें चयन समिति ने रिजेक्ट कर दिया। कलाकारों का कहना है कि 23 मार्च को जारी सूची में भारी तकनीकी त्रुटियां हैं; कई नाट्य संस्थाओं के कार्यक्षेत्र के आगे लोक नृत्य या संगीत दर्ज है। इसके अलावा, दूर-दराज के कलाकारों को कागजी कमियां सुधारने का कोई अवसर नहीं दिया गया, जो ठीक नहीं है। कलाकारों ने इस बात पर भी रोष जताया कि चयन समिति ने समान योग्यता वाली संस्थाओं के बीच भेदभाव करते हुए कई सक्रिय समूहों को योजना से बाहर कर दिया है।A photograph of artists united in Delhi in protest against recent decisions regarding the 'Guru-Shishya Parampara Scheme.' A report by Indore Studio.1164 कला मंडलियां हुईं प्रभावित: कलाकारों की दी गई जानकारी के अनुसार, ताज़ा कटौती से लगभग 1164 कला मंडलियां प्रभावित हुई हैं, जिनसे सीधे तौर पर 20 हजार से अधिक कलाकार जुड़े हैं। ये संस्थाएं न केवल कला का प्रदर्शन करती हैं, बल्कि स्लम एरिया, जेलों, दिव्यांग बच्चों और वंचित वर्गों के बीच चेतना विस्तार का कार्य भी करती हैं। कलाकारों का तर्क है कि अनुदान रुकने से प्रतिवर्ष प्रभावित होने वाले करीब 60 लाख दर्शकों और बच्चों के व्यक्तित्व विकास का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा। फैसला इसलिये भी विसंगत है क्योंकि कलाकार पहले ही अपनी सेवाएं दे चुके हैं। Google Gemini's symbolic expression reflecting artists' concerns regarding recent decisions concerning the 'Guru-Shishya Parampara Scheme'.संस्कृति मंत्रालय से हस्तक्षेप की गुहार: रंगकर्मियों और कला साधकों ने संस्कृति मंत्रालय से इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि 23 मार्च 2026 को जारी विवादित ‘मिनट्स’ पर तत्काल रोक लगाई जाए, विषय-विशेषज्ञों के नेतृत्व में चयन समिति का पुनर्गठन हो और सभी आवेदनों का पारदर्शी तरीके से फिर से मूल्यांकन किया जाए। आगे पढ़िये – विचित्र चित्र नर्तन का पुनर्जन्म: डॉ. करुणा विजयेन्द्र का ऐतिहासिक शोध
https://indorestudio.com/vichitra-chitra-nartana-hoysala-dance-revival/

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