Wednesday, May 13, 2026
Homeकला खबरें'दयाशंकर की डायरी' का छत्तीसगढ़ी में होगा मंचन

‘दयाशंकर की डायरी’ का छत्तीसगढ़ी में होगा मंचन

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। प्रसिद्ध रंगकर्मी, नाट्य निर्देशक और अभिनेत्री नादिरा बब्बर के ख्यात नाटक ‘दयाशंकर की डायरी’ का अब छत्तीसगढ़ी में रूपांतरण किया गया है। 2 से 7 नवम्बर को अभिनट फ़िल्म एवं नाट्य फाउंडेशन रायपुर में रोज दो प्रस्तुतियाँ देगा।

महत्त्वपूर्ण और चर्चित नाटक : नाट्य निर्देशक योग मिश्रा के निर्देशन में इस प्रस्तुति के कलाकार रवि शर्मा होंगे। गौरतलब है कि ‘दयाशंकर की डायरी’ एक महत्त्वपूर्ण नाटक है और इसकी कई प्रस्तुतियाँ हो चुकी हैं। यह नाटक आज के दौर में इंसान के तनावों और उसके संत्रासों पर शिद्दत से बयान करता है। इसके केन्द्रीय पात्र दयाशंकर के मन में चलते रहने वाले अन्तर्द्वन्द को यह बखूबी उकेरता है। कहा जा सकता है कि इसमें आज के दौर की सच्चाइयों के साथ मनोविज्ञान को बहुत अच्छी तरह से पकड़ा गया है।

तनाव और द्वंद से मुठभेड़ करता है दयाशंकर : दरअसल बिना पागल हुए कोई सभ्य नहीं होता क्योँकि सभ्यता नैतिकता पैदा करती है और नैतिकता से पैदा होता है तनाव और द्वन्द जो मनुष्य के चित्त को बाँटकर खण्ड-खण्ड करती जाती है। खण्ड-खण्ड हुए चित्त में बेचैनी पैदा होती है। ऐसे में बेचारे दयाशंकर के पास एक ही रास्ता बचता है कि वह पागल हो जाए या पागलपन में आत्मघात कर अपना किस्सा ही खत्म कर ले। दूसरा उपाय यह कि वह बेईमान हो जाए और धोखा देने लगे। बाहर से कुछ दिखाई देने लगे भीतर से कुछ और हो जाए.

नैतिकता के तनाव और द्वन्द्व से उपजता है पाखंड और पागलपन : नैतिकता के तनाव और द्वन्द्व से पाखंड और पागलपन का जन्म होता है। जहाँ भी सबसे ज़्यादा सभ्य और शिक्षित मनुष्य होंगे वहाँ सबसे अधिक पागलखाने या फिर पाखण्डखाने होंगे। जहाँ पागलों की संख्या सर्वाधिक होगी वह मुल्क सर्वाधिक सभ्य कहलाएगा क्योंकि बिना पागल हुए कोई सभ्य नहीं हो सकता। तो क्या दयाशंकर असभ्यता, अनैतिकता और अशिक्षा की वकालत करता है? बिल्कुल नहीं। दयाशंकर उन लक्षणों की तरफ इशारा करता है जिनकी वजह से इंसान घोर निराशा और अंधकार की गर्त में उतरता चला जा रहा है। इधर पागलों व आत्महत्या करने वालों की संख्या सभ्यता के साथ-साथ बढ़ती जा रही है इस पर क्या एक गंभीर विमर्श की आवश्यकता नहीं है? दयाशंकर आखिर है क्या? सभ्य है, पागल है, बेईमान है, धोखेबाज है, या…?

छह दिनों में बारह शो : 2 से 7 नवम्बर तक रायपुर के हाउसिंग बोर्ड, सेक्टर 8 स्थित ‘जनमंच’ में दोपहर 1 बजे व शाम 7 बजे प्रतिदिन दो शो आयोजित हैं। 90 मिनट अवधि का यह नाटक दयाशंकर की डायरी के कई ज़रूरी पन्ने पलटता है। दर्शक इसके ज़रिए जान पाएँगे कि आखिर दयाशंकर ने अपनी डायरी में आखिर लिखा क्या है?

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास