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साहित्यिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन की युवा चित्रकार डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया के अभिनव चित्रों की प्रदर्शनी नई दिल्ली में जारी है। प्रर्दशनी रवींद्र भवन की ललित कला अकादमी की कला दीर्घा में लगाई गई है। इक्कीस फरवरी से जारी इस कला प्रदर्शनी को सत्ताइस फरवरी तक देखा जा सकता है। प्रदर्शनी में डॉ. फिरोजिया के लगभग सौ चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। अध्यात्मिक भावों से संचारित उनकी लयबद्ध पेटिंग्स कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उनकी इस अभिनव प्रदर्शनी के बारे में हमें तस्वीरों के साथ जानकारी दे रहे हैं डॉ. जफर महमूद।
डॉ. योगेश्वरी के चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता चित्रों में लयबद्ध रंगों और रेखाओं का समायोजन है। भावों की अभिव्यक्ति में उन्होंने गहरे रंगों की बजाय श्वेत रंग को प्राथमिकता दी है। उनके चित्रों में व्याप्त आध्यात्मिकता कला दीर्घा के वातावरण को ध्यानमय बना देती है। अपने चित्रों के बारे में डॉ. योगेश्वरी ने कहा- “ये प्रदर्शनी मेरे चित्रों की संगीतमय यात्रा है। मैंने प्रकृति में व्याप्त संगीत और रेखाओं की समरसता को कैनवस पर उतारने का प्रयास किया है।”
चित्रकला विशेषज्ञ प्रो. अल्पना उपाध्याय ने उनके चित्रों के बारे में कहा “ योगेश्वरी के अमूर्त चित्रों में रंग केवल रंजक नहीं हैं, बल्कि कंपन हैं, भावनाएं हैं, चेतना का प्रवाह हैं। उनके कैनवस ध्यानमय क्षेत्र की भांति खुलते हैं, जहां ऊर्जा बहती है, ठहरती है और फिर से नई हो जाती है।”
आइये जानते हैं डॉ. योगेश्वरी की चित्र कला पर कुछ प्रमुख हस्तियों ने क्या कहा है – प्रो. आलोक भावसार कहते हैं “डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया की प्रदर्शनी रूप, सामग्री और सतह के बीच सघन संवाद रचती है। टेक्सचर आधारित अमूर्त शिल्पबोध दृश्य अनुभव के साथ स्पर्श और संवेदना का आभास कराता है। यह कला शिल्प और चित्र की सीमाओं को मिटाकर एक तीसरी भाषा गढ़ती है, जो सीधे हृदय से संवाद करती है।”- प्रो. भावसार, शासकीय हमीदिया महाविद्यालय, भोपाल के चित्रकला विभाग के विभागाध्यक्ष हैं।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व कुलपति डॉ. बालकृष्ण शर्मा ने कहा – “डॉ. योगेश्वरी के चित्रों में निराकार और साकार के अभिन्न रूप झलकते हैं, जहाँ रेखाओं से बने वृत्त और त्रिकोण ब्रह्माण्डीय विस्तार का आभास कराते हैं। डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया का यह राग-रंगमय प्रयास सहृदय दर्शकों को अवश्य प्रेरित करेगा।” उदयपुर में राजस्थान विद्यापीठ में संस्कृत विभाग के आचार्य रहे डॉ.श्री निवासन अय्यर ने लिखा है – “डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया की कृतियाँ लयाबद्ध सृजन का अद्भुत आख्यान हैं, जहाँ हर रेखा, रंग और रूपाकार उनकी श्वांस और हृदय गति से प्राणवान हो उठते हैं। वे अपनी मौलिकता और प्रतिबद्धता के साथ कला को नया संसार प्रदान करती हैं।”
डॉ. योगेश्वरी ने इस प्रदर्शनी को अपने पिताश्री भूरेलाल फिरोजिया को समर्पित किया है। इसका शुभारंभ प्रतिष्ठित कलाकार और आधुनिक राष्ट्रीय कला दीर्घा के पूर्व निदेशक प्रो.राजीव लोचन के मुख्य आतिथ्य, मां श्रीमती जावित्री फिरोजिया की अध्यक्षता में हुआ। वे मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग की उज्जैन स्थित कालिदास संस्कृत अकादमी की उप निदेशक हैं। उद्घाटन समारोह में मूर्धन्य चित्रकारों का समागम हुआ और वातावरण कला-रस से भर उठा।


प्रदर्शनी को विद्वान, कलाकार, रंगकर्मी, चित्रकार, मूर्तिकार और कला प्रेमी देख रहे हैं। जयपुर के इंदर सिंह कुदरत, वरिष्ठ कलाकार आर.के. सैनी, डॉ. प्रकाश सिंह नीमराजे, गोपाल किरण, डॉ. सुनीता श्रीवास्तव, डॉ. रजनीश गौतम, डॉ. वंदना वर्मा, डॉ. रवि शर्मा, मूर्तिकार सुरेश, चंचल चौहान, कन्हैया लाल पटेल, कनु पटेल, जेपी सिंह और डॉ. अशोक कुमार दीक्षित जैसे कलाकारों ने प्रदर्शनी को देखकर उनकी कला की सराहना की है। यह आयोजन केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं, बल्कि संगीत, रंग और आध्यात्मिकता की त्रिवेणी है, जो दर्शकों को आत्मिक रूप से आनंदित कर रहा है। इंदौर स्टूडियो की रिपोर्ट।