कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टूडियो। मंडी हाउस स्थित एलटीजी सभागार में ‘प्रासंगिक’ संस्था की रीवा और दिल्ली इकाई द्वारा दो बेहद संवेदनशील नाटकों का भावपूर्ण मंचन किया गया। आलोक शुक्ला के लेखन और निर्देशन में मंचित हुए नाटक ‘उसके साथ’ और ‘ख़्वाब’ का यह 10वां मंचन था। इससे पहले इन नाटकों का प्रदर्शन मुंबई, दिल्ली, रीवा, नोएडा, इंदौर और केरल सहित देश के कई शहरों में किया जा चुका है।
शाम की पहली प्रस्तुति करीब एक घंटे का नाटक ‘उसके साथ’ थी। यह वर्ष 1997 में मुंबई में घटी एक सत्य घटना पर आधारित था, जो एक रेप पीड़िता के पूरे जीवन की मार्मिक यात्रा को दर्शाता है।
इसमें केंद्रीय भूमिका में कविता के अभिनय ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया। वहीं, विभिन्न किरदारों में एडवोकेट टेकचंद राजपूत, आलोक शुक्ला, विजय लक्ष्मी, प्रताप सिंह, विनय शर्मा, अंजली माथुर और बाल कलाकार माही ने जीवंत अभिनय किया। नाटक का संगीत अभ्युदय मिश्रा और आशीष मित्तल ने तैयार किया।
दूसरी प्रस्तुति बुजुर्गों की दुर्दशा और अकेलेपन पर आधारित एकल नाटक ‘ख़्वाब’ की थी। नाटक में दिखाया गया कि कैसे एक बुजुर्ग खुद को भरे-पूरे परिवार के साथ सुखी दिखाता है, लेकिन अंत में पता चलता है कि वह वृद्धाश्रम में रह रहा है। मुख्य भूमिका को लेखक-निर्देशक आलोक शुक्ला ने बखूबी मंच पर उतारा।इसमें एडवोकेट टेकचन्द राजपूत, विजय लक्ष्मी (आवाज) और कविता (आवाज) ने सहयोग किया। संगीत संदीप मुखर्जी और नवनीत पांडेय का था। 
दोनों प्रस्तुतियों में प्रकाश, मंच सज्जा व ध्वनि संचालन का जिम्मा टेकचन्द, विनय शर्मा, विनय, निखिल कुमार, विजय लक्ष्मी और नीतू शुक्ला ने संभाला। नेपथ्य प्रमुख की भूमिका प्रताप सिंह ने निभाई, जिसमें मृदुल कुमार और सौरभ शक्ति सहयोगी रहे। दोनों ही नाटकों की मार्मिक प्रस्तुति की दर्शकों ने खूब सराहना की। आगे पढ़िये – माई रे…दुल्हन का चरित्र एक और मंच पर दुल्हन तीन! https://indorestudio.com/mai-re-main-kase-kahun-nsd-theatre-review/

