दिल्ली में मंच पर के.एल. सहगल और मीना कुमारी!

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शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। ‘दिल्ली के मंच पर फिल्मी दुनिया की दो मशहूर हस्तियां नज़र आने वाली हैं। ये हस्तियां अब इस दुनिया में तो नहीं लेकिन इनके यादगार किरदार- दो बेहतरीन ड्रामों के ज़रिये मंच पर जीवंत होंगे। सिंगर के.एल.सहगल की ज़िदंगी पर आधारित पहला ड्रामा आप 14 नवंबर 2025 को श्रीराम सेंटर में शाम साढ़े छह बजे से देख सकते हैं। नाम है- ‘तेरा रहगुज़र याद आया’। सहगल की ज़िदंगी पर ये ड्रामा दिल्ली उर्दू अकादमी के श्रीराम सेंटर में चल रहे उर्दू ड्रामा फेस्टिवल में होगा। ये फेस्टिवल 10 नवंबर से शुरू हुआ है जो 15 नवंबर 2025 तक जारी रहेगा। चलते-चलते विथ मीना कुमारी: फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी की ज़िदंगी पर आधारित ड्रामा- ‘चलते-चलते विथ मीना कुमारी’ लिटिल थिएटर ग्रुप (एलटीजी) ऑडिटोरियम, मंडी हाउस में 16 नवंबर को पेश होगा। एलटीजी में इसके 2 शोज़ होंगे। पहला दोपहर 4 बजे से और दूसरा 7 बजे से। दोनों ड्रामों के राइटर मशहूर एक्टर और डायरेक्टर डॉ.एम. सईद आलम हैं। आपको हाल ही में दुबई की संस्था ‘बज़्म-ए-उर्दू’ ने ‘अलमबरदार-ए-उर्दू’ के अवॉर्ड से नवाज़ा है।सहगल की ज़िदंगी पर 92 वां शो: सहगल और मीनाकुमारी के दोनों ही ड्रामों पर हमने डॉ.एम.सईद आलम से बातचीत की। उन्होंने कहा -‘ केएल सहगल (कुंदन लाल सहगल) की ज़िदंगी पर हमारा यह प्ले ‘तेरा रहगुज़र याद आया’ काफ़ी पुराना है। हम इसका मंचन 2005 से कर रहे हैं। इसके अब तक 91 वें शोज़ हो चुके हैं। दिल्ली उर्दू अकादमी के फेस्टिवल में इसका 92 वां शो होगा। उन्होंने कहा, ‘सहगल साहब की ज़िदंगी पर गालिबन हमारा ये पहला ‘प्ले’ है। इससे पहले उनको लेकर संगीत के बहुत से कार्यक्रम हुए लेकिन कोई ड्रामा नहीं हुआ’।सहगल साहब जैसी शक्ल और गायिकी: डॉ.सईद आलम ने बताया, सहगल साहब वाले प्ले की एक ख़ासियत ये है कि इसमें जो साहब मुख्य भूमिका निभाते हैं, वो दिखते भी सहगल साहब की तरह ही हैं। मंच पर वे सहगल साहब के मशहूर गीत लाइव गाते हैं। हमने उन गीतों की रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल नहीं किया है। सहगल साहब की भूमिका बेहद टैलेंटेड एक्टर यशराज मलिक निभाते हैं। उर्दू अकादमी के फेस्टिवल में यह प्रस्तुति नि:शुल्क देखी जा सकेगी’। चार ‘S’ से जुड़ी सहगल की दास्तान: डॉ.आलम ने बताया- ‘तेरा रहगुज़र याद आया ड्रामे में’, सहगल साहब के स्ट्रगल और उनके सिंगर बनने की दिल को छूने वाली दास्तां है। उनकी ज़िदंगी को हम चार हिस्सों में बांट सकते हैं। सभी का ताल्लुक ‘S’ से है। पहला ‘S’ – उनका वो शुरूआती दौर, जब वे सीता का किरदार किया करते थे। दूसरा ‘S’ उनका वो दौर है, जब वो टाइप राइटर के सेल्समैन हुआ करते थे। तीसरा ‘S’ सहगल साहब का ये वो दौर जब वे एक सिंगर के रूप में पहचाने गये। चौथा ‘S’ – ये वो दौर जिसमें वे कुंदनलाल सहगल एक सुपर स्टार बन गये’।टाइप राइटर बजाकर बनाई थी धुन: डॉ. आलम ने कहा – ‘यह एक ‘म्यूजिकल प्ले’ है। सहगल साहब के बारे में एक क़िस्सा मशहूर है। उन्होंने टाइप राइटर पर एक ग़ज़ल की धुन बनाई थी। हमारे ‘प्ले’ में भी यह एक्सपेरिमेंट किया है। सहगल साहब का जो किरदार निभा रहे हैं, वो टाइप राइटर की कीज़ को बजाकर गाते हैं। सहगल साहब की गाई, मिर्ज़ा ग़ालिब की वो ग़ज़ल है- नुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बने / क्या बने बात जहाँ बात बनाए न बने। चलते-चलते विथ मीना कुमारी डॉ. सईद आलम ने अपने दूसरे नाटक ‘चलते-चलते विथ मीना कुमारी’ के बारे में कहा- ‘इस प्ले को हमने 2 साल पहले दुबई में ओपन किया था। मीना कुमारी की ज़िदंगी पर यह एक ‘सोलो प्ले’ है। इस मोनोलॉग में मीना कुमारी के फ़िल्मी गाने भी हैं। उन पर कथक परफॉरमेंस हैं। हमने मीना कुमारी के फिल्मों गानों को कॉपी नहीं किया है, बल्कि उन्हें कथक के माध्यम से ड्रामे में प्रस्तुत किया है’। मीना जी एक बेहतरीन शायरा भी थीं: डॉ. सईद ने कहा- ‘मीना कुमारी एक बेहतरीन शायरा भी थीं। नाटक में हम मीना कुमारी को बहैसियत शायरा के रूप में भी बेहद कामयाबी से पेश कर सके हैं। मीना कुमारी ने बहुत सी नज़्में और ग़ज़लें कहीं थीं। हमने उन ग़ज़लों की नाटक में ओरिजनल कंपोज़िशन्स इस्तेमाल की हैं। हालांकि खयाम साहब ने भी धुनें बनाईं हैं। मगर हमारे ड्रामे में ग़ज़लों को मेहरान साहब लाइव गाते हैं। उनकी अपनी कंपोज़िशन्स हैं। आस्था गुप्ता ग़ज़लों पर कथक नृत्य प्रस्तुत करती हैं।मुख्य भूमिका में तरन्नुम अहमद साहिबा: डॉ. आलम ने कहा – नाटक में तरन्नुम अहमद मीना कुमारी का रोल अदा करती हैं। कहानी ‘पाकीज़ा’ फिल्म के प्रीमियर के बाद से शुरू होती है। उस वक्त मीना अपने घर पर पहुँची हैं। घर पर वे अपनी ज़ाति और प्रोफेशनल ज़िदंगी- दोनों का एहाता करती हैं। दोनों के बारे में सोचती हैं। इसमें उनके साथ गुज़रे कुछ अच्छे पहलू हैं और कुछ ख़राब पहलू भी। इस ड्रामे के अब तक 5 शोज़ हो चुके हैं। दिल्ली में इसका छठा शो होगा’।सहगल के शो में नौशाद साहब आये थे: डॉ.सईद आलम ने सहगल के पहले शो की याद करते हुए कहा-‘ केएल सहगल वाला शो हमने मुंबई में ओपन किया था। उस शो को देखने के लिये मशहूर संगीतकार नौशाद भी आये थे। उन्होंने सहगल की गाई ग़ज़ल ‘ग़म दिये मुस्तकिल’ कंपोज़ की है। हमने उन्हें प्ले के दौरान स्टेज पर बुला लिया था। उनकी वजह से वह शो यादगार बन गया था। आगे पढ़िये – क्या हैं थियेटर एक्टिंग के जादुई मंत्र, यहां सिर्फ टैलेंट काफ़ी नहीं। https://indorestudio.com/theatre-acting-ke-mantra/

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