शकील अख़्तर, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर ‘जश्न-ए-क़लम’ हिन्दी साहित्य उत्सव शुरू हो गया है। इस उत्सव में हिन्दी के प्रसिद्ध लेखकों की कहानियों पर एकल प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी है। एक मार्च से शुरू हुआ यह उत्सव ग्यारह मार्च तक चलेगा। उत्सव राष्ट्रीय राजधानी के दस जगहों पर हो रहा है। इससें ‘जश्न-ए-क़लम’ से सम्बद्ध अभिनेता 12 से अधिक एकल प्रस्तुतियां देंगे। इनमें अशोका यूनिवर्सिटी,आम्बेडकर युनिवर्सिटी और दिल्ली स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन के स्टुडेंट्स के लिए विशेष शोज़ भी होंगे। इन शोज़ के टिकिट बुक माई शोज़ से खरीदे जा सकते हैं। https://in.bookmyshow.com/plays/jashn-e-qalam/ET00096683
तस्वीर: शाश्विता शर्मा राजेंद्र सिंह बेदी की कहानी, चेचक के दाग़ पर प्रस्तुति देते हुए।
चुनिंदा कहानियों का मंचन : ‘जश्न-ए-क़लम’ के संस्थापक केसी शंकर के अनुसार- ‘उत्सव में ख्यातिनाम साहित्यकारों की चुनिंदा कहानियों का मंचन हो रहा है। इनमें प्रेमचंद,राजिंदर सिंह बेदी,इस्मत चुग़तई,पतरस बुखारी,कमलेश्वर,राजेंद्र यादव और असद मुहम्मद ख़ान जैसे लेखकों की कहानियों पर सोलो परफॉरमेंस हो रहे हैं।‘
कहानियों की प्रस्तियों का नायाब तरीका: शंकर कहते हैं, ‘हिंदी में हमारे पास साहित्य का अनमोल खज़ाना बिखरा पड़ा है। इसे लोगों तक पहुंचाने की ज़रूरत है। मंच पर इनकी सोलो प्रस्तुतियां इसका नायाब तरीका है। जहां मंच पर कोई बड़ा तामझाम नहीं है, कहानी ही केंद्र में है और कल्पना अपने शिखर पर।‘ समूह की को-फाउंडर और एक्टर शाश्विता शर्मा भी मंच पर परफॉर्म करती हैं। वे कहती हैं-‘परफॉरमेंस के बाद जब दर्शक प्रस्तुत की गई कहानी पर अपने विचार रखते हैं, अपनी अनुभूतियों के बारे में बताते हैं तब हमें अपने काम की सार्थकता का अहसास होता है। तब लगता है कि हम अपने समृद्ध लिटरेचर को आगे बढ़ाने के साथ ही एक कलाकार के रूप में सामाजिक नज़रिये से भी अपनी सजग भूमिका निभा रहे हैं।‘
रंगमंच और सिने कलाकारों का समूह : आपको बता दें, ‘जश्न-ए-क़लम’ मुंबई का रंगमंच समूह है। इसमें रंगमंच और सिनेमा के कलाकार शामिल हैं। समूह कैफे,पब्स,घर,दफ्तर,स्कूल,कॉलेज और संस्थाओं में अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं, जिन्हें दर्शक बेहद पसंद कर रहे हैं। रंगमंच के इस तौर-तरीके की दिल से तारीफ कर रहे हैं। रंगमंच को फिर से नया आयाम और जीवंतता देने की बड़ी पहल मान रहे हैं।

