
देश पर ये ज़िंदगी निसार कर चले / लहू से अपनी मां का सिंगार कर चले/ अपनी ये जवानी बहार कर चले/लहू से अपनी मां का सिंगार कर चले
पुलवामा हमले के बाद शहीदों के प्रति अपने गीत के माध्यम से यह श्रद्धाजंलि लेखक,पत्रकार शकील अख़्तर दे रहे थे। मौका था उनके कविता संग्रह – ‘दिल ही तो है’, पर ग्वालियर में आयोजित संगोष्ठी का। रंग ग्वालियर के बैनर पर संगोष्ठी का समन्वयन नगर के संस्कृतिकर्मी अजय जैन ने किया था। इसमें शहर के कलाकार साथी शामिल थे।देशभक्ति की रचनाओं के क्रम में शकील ने अपने संग्रह से मां भारत को समर्पित एक और रचना का पाठ किया।
किसे याद रखूं, किसे भूल जाऊं /मां भारत के चरणों मे कितने शीष नवाऊँ/भजुं मीरा को या कबीर के गुन गाऊं/राम का बनु अनुज की बुद्ध की गाथा गाऊं/किसे याद रखूं किसे भूल जाऊं
और उनकी एक और रचना रसिकों को पंसद आई..
कहने दो ज़माना कहता है/ मेरा भारत मेरे दिल में रहता है/ दौड़ता है रगों में , चलता है साथ-साथ / मेरी आरज़ु-ए-मंज़िल में रहता है/ कहने दो ज़माना कहता है / मेरा भारत मेरे दिल में रहता है
शकील ने वसंत के मौसम में अपने ही अंदाज़ में प्यार के नगमे को भी आवाज़ दी। शकील ने सुनाया,
आवाज़ नहीं आती लेकिन बातें चलती रहती हैं /दिन में भी ख्वाबों की रातें चलती रहती हैं /एक अजब सिलसिला है इन दिनों /न मिलकर भी उनसे मुलाकातें चलती रहती हैं
कार्यक्रम की शुरूआत में अजय जैन ने शकील अख़्तर के कविता संग्रह के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया, ‘प्रख्यात शायर डॉ.राहत इंदौरी की प्रेरणा से ही शकील अख़्तर का कविता संग्रह स्टोरी मिरर, मुंबई से प्रकाशित हुआ है। संग्रह में देशभक्ति,प्रासंगिक प्रेम,अध्यात्म से लेकर नाट्यगीतों की 100 से अधिक रचनाएं हैं।

कार्यक्रम समन्यवक अजय जैन के साईं संकल्प अपार्टमेंट स्थित निवास पर आयोजित किया गया था। आरंभ में कलाकार साथियों के तरफ से शकील अख़्तर का पुष्पाहार से स्वागत वरिष्ठ रंगकर्मी संजय अरोरा और गीतांजलि ग्रेवाल ने किया। अजय जैन ने सम्मान स्वरूप माला भेंट कर अभिवादन किया। आभार वरिष्ठ रंग निर्देशक अयाज़ खान ने जताया। (इनपुट : रंग ग्वालियर, मोबाइल वीडियो : अरिहन्त जैन )

