शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर और प्रख्यात लोक गायिका पद्मश्री ममता चंद्राकार का दिल्ली में लोक गीतों का मनभावन कार्यक्रम, यादगार बन गया। उनकी विशेषता के अनुरूप उनके गीतों में मुख्य तौर पर छत्तीसगढ़ी लोक पंरपरा के विवाह से जुड़े गीतों की गूँज सुनाई दी। कुछ देर के लिये दर्शकों को अंचल के किसी विवाह मंडप में होने का अहसास हुआ। संगीत नाटक अकादमी ने उनका यह कार्यक्रम ‘फेस्टिवल ऑफ परफॉरमिंग आर्ट्स’ के तहत आयोजित किया। उनका कार्यक्रम दिल्ली में इंडिया गेट के सम्मुख, सेंट्रल विस्टा के मुक्ताकाशी मंच आयोजित हुआ। दर्शकों ने सांझ ढले उनकी बेहतरीन गायिकी को बड़े मनोयोग से सुना और उनकी प्रशंसा किये बिना नहीं रह सके। लोक संगीत के इस प्रस्तुति का संगीत भी कार्यक्रम की विशेषता रही।
चुनिंदा लोकगीतों की दमदार प्रस्तुति: गौरतलब है कि ममता चंद्राकर छत्तीसगढ़ की ‘कोकिला’ कहीं जाती हैं। इस विदूषी कलाकार को लोक संगीत में योगदान के लिए वर्ष 2019 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। कार्यक्रम में ममता चंद्राकर ने अपने चुनिंदा और बहुप्रशंसित लोक गीत प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में उन्होंने सबसे पहले विवाह (बियाव) गीत प्रस्तुत किये गये। इसमें मंडप के लगने, हल्दी की रस्म से लेकर बारात के आगमन और बारात के विदाई गीत शामिल रहे। इसी तरह इस सुरीली गायिका ने छत्तीसगढ़ की घुमन्तु देवार जाति का गाया जाने वाला देवार करमा गीत, छत्तीसगढ़ी सुवा गीत, जनजातिय क्षेत्रों में गाया जाने वाला ‘मल्लाहि’ गीत भी प्रस्तुत किया। ममता चंद्राकर ने अपने ख़ास अंदाज़ में प्रस्तुत किये जाने वाले शैली ददरिया गीत के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
संगीत संयोजन प्रेम चंद्राकर का रहा : कार्यक्रम में ममता जी के पति प्रेम चंद्राकर ने हारमोनियम पर संगत के साथ, संगीत संयोजन भी किया। प्रेम चंद्राकर छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों के जाने-पहचाने निर्माता हैं। पत्नी ममता जी के साथ उन्होंने एक म्युज़िकल ग्रुप ‘चिन्हारी’ बनाया है। इस संगीत समूह के माध्यम से लोक संगीत के देश में अनेक कार्यक्रम पेश किये जा चुके हैं। इस तरह दोनों गुणी कलाकार, छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
सहयोगी कलाकारों ने भी जमाया रंग: कार्यक्रम में सहयोगी कलाकारों ने भी जमकर परफॉर्म किया। कोरस में श्वेता और सरोजनी साहू ने साथ दिया। जबकि वाद्य कलाकारों में क्रमश: बेंजों पर बिहारी लाल तारक, तबले पर मनोज लहरिया, ढोलक पर गोविंद विश्वकर्मा और झांज, मंजरी पर आकाश चंद्राकर ने संगत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ.योगेंद्र चौबे ने किया। बता दें कि डॉ. चौबे लोक संगीत संकाय के अधिष्ठाता भी हैं, साथ ही वे इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग के प्रमुख हैं।
पद्मश्री बसंती बिष्ट ने किया अभिनंदन: कार्यक्रम के अंत में संगीत नाटक अकादमी की तरफ़ से कलाकारों का शॉल ओढ़ाकर पारंपरिक सत्कार, उत्तराखंड की ख्यात लोक गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट ने किया। उन्होंने भी ममता चंद्राकर को गले से लगाकर उनकी गायिकी की प्रशंसा की।
स्व.दाऊ महा सिंह चंद्राकर की बेटी: ममता चंद्राकर छत्तीसगढ़ के लोक संगीत के सिद्धहस्त गायक स्व. दाऊ महा सिंह चंद्राकर की बेटी हैं। स्वर्गीय दाऊ महा सिंह ने छत्तीसगढ़ी लोक संगीत को बढ़ावा देने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। ममता चंद्राकर ने शुरुआती शिक्षा अपने पिता से ही ली। बाद में आपने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, छत्तीसगढ़ के तत्कालीन संगीत संकाय के डीन, प्रो. एसी चौबे के मार्गदर्शन में शास्त्रीय ख्याल संगीत में प्रशिक्षण लिया और फिर डी. लिट् की उपाधि हासिल की। वर्तमान में वे इसी विश्वविद्यालय की कुलपति हैं।
AIR की पूर्व सहायक निदेशक: ममता चंद्राकर ऑल इंडिया रेडियो में सेवारत रहीं और 2018 में बतौर सहायक निदेशक के रूप में सेवानिवृत्त हुईं। ममता चंद्राकर ऑल इंडिया रेडियो की ‘टॉप’ ग्रेड कलाकार भी हैं। आपने बहुत सी छत्तीसगढ़ी फिल्मों में पार्श्व गायन किया है। उनके बहुत से संगीत कैसेट और सीडी हैं। 500 से अधिक गीत यूट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया और आकाशवाणी और दूरदर्शन के रिकॉर्ड में भी उपलब्ध हैं। बतौर कुलपति वे इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में भी कला-संस्कृति और संगीत से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित करती रहती हैं। आगे पढ़िये –
दिल्ली में छत्तीसगढ़ के लोक गीतों की गूँज, ममता की मनभावन प्रस्तुति
RELATED ARTICLES

