विशेष प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। सुप्रसिद्ध साहित्यकार चित्रा मुदगल, नाटककार प्रताप सहगल और रंगकर्मी, लेखक आलोक शुक्ला को दिल्ली में आयोजित एक समारोह में विशिष्ट सम्मान प्रदान किये गये हैं। समारोह में देश-विदेश के कुल 52 साहित्यकारों और पत्रकारों को भी विभिन्न पुरस्कारों से नवाज़ा गया। पुरस्कार पंडित भगवती प्रसाद अवस्थी की जयंती पर वर्ष २०२२ के लिये दिये गये। डॉ. संजीव कपूर, डॉ.मनोरमा कुमार, कामिनी मिश्रा द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किये गये। 
चित्रा मुद्गल को वेदव्यास सम्मान: साहित्यकारों का यह सम्मान समारोह इंडिया नेटबुक्स, बीपीए फ़ाउंडेशन और अनुस्वार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें सुप्रसिद्ध साहित्यकार चित्रा मुद्गल को वेदव्यास शिखर सम्मान, ख्यात नाटककार प्रताप सहगल को वागीश्वरी सम्मान, लेखक, रंगकर्मी आलोक शुक्ला को इंडिया नेटबुक्स नाट्य रत्न सम्मान 2022 प्रदान किया गया। समारोह में सुप्रसिद्ध साहित्यकार महेश दर्पण, गिरीश पंकज भी मौजूद थे। पुरस्कारों की चयन समिति श्रीमती ममता कालिया, सर्वश्री हरिसुमन विष्ट, प्रेम जनमेजय, राजेश कुमार, लालित्य ललित, प्रभात शुक्ला, डॉ. मनोरमा शामिल थीं।
समारोह में दिये गये अन्य पुरस्कार: साहित्य विभूषण सम्मान फारुक अफ़रीदी, गिरीश पंकज, राहुल देव, राजेन्द्र मोहन शर्मा मुकेश भारद्वाज और प्रबोध कुमार गोविल को दिया गया। जबकि साहित्य भूषण सम्मान विवेक रंजन श्रीवास्तव, अरूण अर्णव खरे,धर्मपाल महेंद्र जैन (कनाडा), उर्मिला शिरींष, श्याम सखा श्याम, हरिप्रकाश राठी, अनिता कपूर (यूएसए) संध्या सिंह (सिंगापुर), वीना सिन्हा (नेपाल), मंजू लोढ़ा, को दिया गया। साहित्य रत्न पुरस्कार अंजू खरबंदा, स्वाति चौधरी, सीमा चडढा, अपर्णा, चार्वी अग्रवाल, प्रदीप कुमार (मनोरमा ईयर बुक}, सुषमा मुनीन्द्र, यशोधरा भटनागर, अनीता रश्मि, मनोज अबोध, जयराम जय, धरमपाल साहिल,रोहित कुमार हैप्पी (न्यूजीलैंड), गंगााराम राज़ी, बलराम अग्रवाल, कमलेश भारतीय, देवेंद्र जोशी, राम अवतार बैरवा, शैलेंद्र शर्मा, सुभाष नीरव एवं पारूल तोमर को दिया गया। समाज सेवा में संलग्न सेवियों को समाज रत्न पुरस्कार क्रमश: संजय मिश्रा,रिंकी त्रिवेदी, सुधीर आचार्य, वरुण महेश्वरी, प्रेम विज को दिया गया। पुरस्कारों के संयोजक सुप्रसिद्ध साहित्यकार और इंडिया नेटबुक्स के प्रकाशक डॉक्टर संजीव कुमार ने सभी का स्वागत और आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन ललित लालित्य और रणविजय राव ने किया।
रंगकर्म में 35 सालों का सफ़र: आलोक शुक्ला पिछ्ले 35 वर्षों से रंगकर्म की दुनिया में सक्रिय रहे हैं। रीवा शहर से 1986 में उन्होंने अपने रंगकर्म और साहित्य यात्रा की शुरूआत की थी।आपने पूरे देश के साथ यूरोप का भी दौरा किया। आलोक करीब 40 नाटकों के लगभग 600 शोज कर चुके हैं। इसमें 7 नाटकों का निर्देशन और लेखन भी उन्होंने किया है। आपने नाटकों के साथ टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में अभिनय भी किया। हालांकि जून 2020 से जीबीएस पैरालिसिस से पीड़ित होने की वजह से वे अभी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो सके हैं। ख़ास बात यह भी है कि उनके 7 नाटको का संग्रह ‘ख्वाबों के सात रंग’ राही प्रकाशन, दिल्ली और रंगकर्म के साथ सिनेमा से जुड़े संस्मरणों की किताब ‘एक रंगकर्मी की यात्रा’ नोएडा के इंडिया नेटबुक्स से प्रकाशित हुई है। उन्हें 2018 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा लोक रंगकर्म पर सीनियर फेलोशिप अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। आगे पढ़िये –

