Wednesday, September 9, 2026
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उर्दू अकादमी ने मीर तकी मीर की याद में सजाई महफ़िल

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। महान शायर मीर तकी मीर की याद में नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में एक शानदार अदबी और तहज़ीबी (साहित्यिक और सांस्कृतिक) महफ़िल सजी। मौका था श्री विपिन गर्ग द्वारा तैयार किए गए “दीवान-ए-मीर” के हिंदी संस्करण के विमोचन का। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली उर्दू अकादमी ने किया।Secretary of the Academy, Mr. Lekhraj, delivering the welcome remarks. दो हिस्सों में आयोजित हुआ कार्यक्रम:
कार्यक्रम दो हिस्सों में बंटा था। पहले हिस्से में मीर की ज़िंदगी, उनकी शायरी और उनके रुतबे पर गहरी बातचीत हुई, जबकि दूसरे हिस्से में मीर की ग़ज़लों से सजी एक दिलकश ‘महफ़िल-ए-ग़ज़ल’ ने समां बांध दिया। दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति और भाषा मंत्री श्री कपिल मिश्र के लगातार सहयोग से उर्दू अकादमी इस तरह के शानदार कार्यक्रम आयोजित कर रही है।Mr. Lekhraj welcoming Ms. Vidya Shah.मेहमानों का हुआ शानदार इस्तकबाल:
उर्दू अकादमी के सचिव और दिल्ली सरकार के अतिरिक्त सचिव, श्री लेख राज ने ख़ास मेहमानों का गुलदस्ते देकर इस्तकबाल (स्वागत) किया। इन मेहमानों में भारत सरकार के पूर्व सचिव अमित यादव, दिल्ली सरकार के पूर्व मुख्य सचिव पी.के. त्रिपाठी, राजकमल प्रकाशन के एमडी अशोक माहेश्वरी और मशहूर ग़ज़ल गायिका विद्या शाह शामिल थीं। श्री लेख राज ने अपने संबोधन में कहा कि विपिन गर्ग ने हिंदी में ‘दीवान-ए-मीर’ लाकर हिंदी पढ़ने वालों की बड़ी खिदमत की है। मीर की शायरी का जादू तीन सदियों (300 साल) बाद भी पाठकों पर बरकरार है।Ghazal singer Ms. Vidya Shah performing the ghazals of Mir Taqi Mir.20 साल की मेहनत और उर्दू सीखने का जुनून:
पहले सेशन में मशहूर पत्रकार और किस्सागो दरीन शाहिदी ने किताब के संपादक विपिन गर्ग के साथ दिलचस्प बातचीत की। विपिन गर्ग ने बताया कि उन्हें बचपन से ही शायरी का बेहद शौक था। जब उन्होंने मीर को पढ़ना चाहा, तो पता चला कि उनकी पूरी रचनाएं हिंदी में मौजूद ही नहीं हैं। इसके लिए उन्होंने बाकायदा उर्दू अकादमी से उर्दू सीखी और फिर मीर को उनकी असली ज़बान में पढ़ा। 2007 में शुरू हुआ यह सफर करीब 20 साल की कड़ी मेहनत और रिसर्च के बाद इस किताब के रूप में सामने आया है। बातचीत के दौरान दरीन शाहिदी ने मीर की ज़िंदगी के कई दिलचस्प किस्से भी सुनाए, जिसने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। Audience viewविद्या शाह की जादुई आवाज़ ने जीता दिल:
दूसरे सेशन में देश की जानी-मानी ग़ज़ल गायिका विद्या शाह ने अपनी जादुई आवाज़ में मीर तकी मीर की चुनिंदा ग़ज़लें पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवा कवि डॉ. अब्दुल्ला मराश ने मीर की शायरी में संगीत और लय पर अपनी ज्ञानवर्धक बात रखी। प्रोग्राम का शानदार संचालन अतहर सईद ने किया और दर्शकों को आखिर तक बांधे रखा। आखिर में श्री लेख राज ने सभी का शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर डॉ. एम.आर. कासमी, हबीब सैफी, डॉ. शबाना नज़ीर, साहिर दाऊद नागरी समेत साहित्य से जुड़े कई लोग और मीर के चाहने वाले बड़ी तादाद में मौजूद थे। आगे पढ़िये- बहुत गहरे हैं अफ़ज़ल के चित्र https://indorestudio.com/afzal-painting-exhibition-delhi/

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