डॉ. एस. एल. भैरप्पा को साहित्य अकादेमी की भावभीनी विदाई

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नई दिल्ली, 25 सितंबर 2025। भारतीय साहित्य के आकाश से एक दीप्तिमान नक्षत्र विलीन हो गया। साहित्य अकादेमी ने आज प्रख्यात उपन्यासकार, दार्शनिक, पटकथा लेखक और महत्तर सदस्य डॉ. एस. एल. भैरप्पा के निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। सभा में उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया, जिसमें अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवासराव सहित अनेक पदाधिकारी और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
विचारों के अन्वेषक, परंपरा के व्याख्याता: डॉ. भैरप्पा केवल लेखक नहीं थे—वे विचारों के अन्वेषक, परंपरा के व्याख्याता और भारतीय आत्मा के चितेरे थे। उनके उपन्यास वंश वृक्ष, तत्त्वालोके निनादे मगने, पर्व और सार्थ जैसे ग्रंथों ने प्राचीन भारतीय दर्शन, ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक स्मृति को आधुनिक पाठकों के हृदय में पुनः जीवंत किया। उन्होंने उपन्यास को केवल कथा नहीं, एक चिंतन का माध्यम बना दिया।
दर्शनशास्त्र की ओर आकृष्ट किया: उनकी लेखनी ने विशेष रूप से युवा वर्ग को दर्शनशास्त्र की ओर आकृष्ट किया—जहाँ शब्दों के माध्यम से आत्मा की खोज होती है। उन्होंने अकेले ही भारतीय उपन्यास लेखन में एक क्रांतिकारी मोड़ लाया, जिसमें परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम था। आगे पढ़िये- ऑस्कर की दौड़ में होमबाउंड, फिल्म की क्यों हो रही प्रशंसा- https://indorestudio.com/oscar-me-homebound-film/

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