विशेष प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। “साहित्य को समाज का दर्पण माना जाता है, ऐसे में साहित्यकारों और संस्थाओं को समाज को जोड़ने का कार्य करना चाहिए, न कि विभाजन की मानसिकता को बढ़ावा देना चाहिए। यह अत्यंत खेद का विषय है कि इंदौर की कुछ संस्थाएं ऐसा कर रही हैं।” यह मुखर विचार मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने व्यक्त किए। इंदौर लेखिका संघ द्वारा आयोजित अपने गरिमामय अभिनंदन समारोह में उन्होंने इस बात पर आश्चर्य और चिंता जताई कि जब एक संस्था किसी व्यक्ति को सदस्यता देने से महज़ इसलिए इंकार कर दे कि वह दूसरी संस्था का भी सदस्य है, तो ऐसी विचित्र शर्तों से साहित्य की मूल भावना आहत होती है।
गरिमामय समारोह में मंत्री सिलावट ने किया अभिनंदन: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने डॉ. दवे को सम्मान स्वरूप शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र भेंट किए। समारोह की अध्यक्षता मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति इंदौर के प्रधानमंत्री डॉ. अरविंद जवलेकर ने की। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली सिंह नरगुंदे सारस्वत अतिथि और स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल विशेष अतिथि के रूप में मंचासीन थे। प्रारंभ में इंदौर लेखिका संघ की संस्थापक डॉ. स्वाति तिवारी ने सभी अतिथियों का शाब्दिक स्वागत किया।
साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ता रहेगा मध्यप्रदेश: जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट ने अपने संबोधन में कहा डॉ. विकास दवे ने विदेश में पुरस्कार प्राप्त कर केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। ऐसे व्यक्तित्व से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्य शासन की ओर से बधाई देते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश साहित्य के क्षेत्र में अपना गौरव ऐसे ही आगे भी बढ़ाता रहेगा। इंदौर लेखिका संघ की संस्थापक डॉ. स्वाति तिवारी ने एक महत्वपूर्ण विचार रखते हुए कहा कि हर सफल व्यक्ति के पीछे एक व्यक्ति जरूर होता है। सनातन संस्कृति में हम शिव से पहले शक्ति की और विष्णुजी से पहले लक्ष्मी जी की आराधना करते हैं। इसी भावना के अनुरूप मंत्री श्री सिलावट और डॉ. स्वाति तिवारी ने कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. विकास दवे की धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता दवे का भी आत्मीय सम्मान किया।
मातृभाषा का गौरव और ‘देवपुत्र’ के अनुभव: सम्मान के उत्तर में अपने उद्बोधन में डॉ. विकास दवे ने बाल पत्रिका ‘देवपुत्र’ के संपादन से जुड़े अपने गहरे अनुभवों और विभिन्न विदेश यात्राओं का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी वियतनाम यात्रा के अनुभव साझा करते हुए भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपनी मातृभाषा के प्रति गौरव और आत्मसम्मान बनाए रखना हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में डॉ. सोनाली सिंह नरगुंदे ने बाल और महिला साहित्य पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि महिला साहित्य में पुरुषों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाएं बच्चों के मनोविज्ञान को गहराई से समझती हैं, इसलिए वे उत्कृष्ट बाल साहित्य रचती हैं। एक माँ और लेखिका होने के कारण वे उस अबोध बालक की भावनाओं को आत्मसात कर लेती हैं जो स्वयं कुछ नहीं कह पाता।
गांव-गांव तक पहुंचा साहित्य: स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने अपने संबोधन में डॉ. दवे की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य अकादमी को तहसील स्तर तक ले जाकर साहित्य की पहुंच गांव-गांव तक कर दी है। अध्यक्षता करते हुए डॉ. अरविन्द जवलेकर ने कहा कि डॉ. दवे ने दुनिया में भारतीय संस्कृति की अस्मिता को नई पहचान दी है। उन्होंने बताया कि मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति भी डॉ. दवे का सम्मान करने पर विचार कर रही थी, लेकिन इंदौर लेखिका संघ ने यह आयोजन कर पूरे साहित्य जगत का सम्मान बढ़ाया है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्वागत और उपस्थित विशिष्ट जन: कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। स्वागत गीत वरिष्ठ सदस्य प्रभा तिवारी ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत श्रीमती प्रभा तिवारी, स्वाति तिवारी, शीला चन्दन, सुषमा शुक्ल, डॉ. निशी मंज्वानी, डॉ. पियूषा शुक्ला, कीर्ति कापसे और डॉ. प्रीति चौहान ने रोली, चंदन, अक्षत और दुपट्टे ओढ़ाकर किया। अभिनंदन पत्र का वाचन वरिष्ठ लेखिका सुषमा व्यास ने तथा अभिनंदन गीत सुरेखा भारती ने प्रस्तुत किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह अरुणा सराफ, प्राची पांडे, सरिता काला और सुनीता श्रीवास्तव ने प्रदान किए। संचालन नवोदित लेखिका प्रो. रानू टूवानी ने किया, जिन्हें लेखिका संघ की ओर से सम्मानित भी किया गया। सदस्यों में उत्साह भरने के लिए नवोदित लेखिका सपना उपाध्याय ने माउथ ऑर्गन पर ‘हम होंगे कामयाब’ गीत की शानदार प्रस्तुति दी। आगे पढ़िये – अक्स तमाशा से NSD के समर थियेटर फेस्टिवल का आगाज़ https://indorestudio.com/nsd-summer-theatre-festival-2026-aks-tamasha-bhanu-bharti/
साहित्य संस्थाओं में विभाजन की मानसिकता ठीक नहीं: डॉ. दवे
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