मुंबई (इंदौर स्टुडियो )। ‘मैं चाहता हूं कि सरकार के सहयोग से भारत का रंगमंच दुनिया पर छा जाये। विश्व रंगमंच पर इसे बड़ा नाम और स्थान मिले।‘ थिएटर ओलम्पिक के समापन समराहो में यह बात इंटरनेशनल थिएटर ओलम्पिक कमेटी के चेयरमेन थियोडोरोस तेरज़ोपोलस ने दी। मुंबई के कामगार स्टेडियम में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। तेरज़ोपोलस ने अपने भाषण में बताया कि 2019 में नौवां थिएटर ओलम्पिक रूस और जापान के सहयोग से आयोजित होगा। उन्होंने दिल्ली,मुंबई समेत देश के 17 शहरों में इस सबसे बड़े थिएटर महोत्सव के सफल आयोजन पर खुशी जताई । संस्कृति मंत्रालय के साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रति आभार जताया।

समारोह में संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ ही नाना पाटेकर, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी , एनएसडी से रतन थियम और डायरेक्टर वामन केंद्रे मौजूद थे। अपने संबोंधन में डॉ महेश शर्मा ने कहा- “देश को सांस्कृतिक ताने-बाने में बुनकर एक भारत और श्रेष्ठ भारत बनाना है, थियेटर ओलंपिक के माध्यम से हम अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने में सफल काफी हद तक सफल रहे हैं।‘

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, मैं डॉ.महेश शर्मा के साथ ही एनएसडी का आभारी हूं जिन्होंने थिएटर ओलम्पिक का अंतिम चरण मुंबई में आयोजित किया। मुंबई और महाराष्ट्र सिनेमा का जन्म स्थान ज़रूर है लेकिन यह थिएटर गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र भी रहा है। थिएटर राज्य की बड़ी पहचान रही है। थिएटर की बड़ी खूबी यह है कि बिना तकनीकी तामझाम के भी सिर्फ अभिनय से लोगों को बांधने की इसमें क्षमता है। यह एक ऐसी कला है जिसका अस्तित्व कभी खत्म नहीं होगा। थिएटर एक ऐसी जगह जहां हम समाज की भावनाओं और उनकी सोच को दर्शा पाते हैं। उन्होंने का राजनीतिक जीवन में भी थिएटर जैसी ही भूमिका का निर्वहन करना होता है। अगर आप अच्छा काम करते हैं तो लोग आपको स्वीकार करते हैं, अगर आप अच्छी तरह से अपनी भूमिका नहीं निभा पाते तो लोग आपको अस्वीकार कर देते हैं। नाना पाटेकर ने कहा, मुझे खुशी है कि प्रो, वामन केंद्रे के नेतृत्व में रंगमंच एक नई बुलंदी पर पहुंचा है। मैं उनके काम भी तारफी करता हूं, उन्होंने हर मुमकिन तरीके से अपने काम को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।

कार्यक्रम में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा सुसाइटी के कार्यकारी चेयरमेन डॉ.अर्जुन देव चरण ने संस्कृति मंत्री महेश शर्मा के प्रति आभार जताया, उन्होंने कहा, उनके सहयोग से ही आज राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एक नई ऊंचाई को छू सका है। उन्होंने एनएसडी की फेकल्टी,स्टूडेंट्स के आयोजन को मिले सहयोग की सराहना की। साथ 17 शहरों के उन सभी सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया, जिन्होंने अपने-अपने शहरों में इस बड़े आयोजन को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में अपना सहयोग दिया। समापन समारोह में जाने पहचाने थिएटर और सिने कलाकार, नवाजुद्धीन सिद्दीकी,मनोज जोशी, हिमानी शिवपुरी,सचिन खेड़कर,कठपुतली के मशहूर कलाकार, रामदास पाद्धाय,भरतनाट्यम की डांसर संध्या पुरेचा,लावणी डांसर वैशाली जाधव ने भी शिरकत की। अपनी कला का प्रदर्शन किया।
51 दिनों तक 500 नाटकों का यह ओलम्पिक महोत्सव चला। दिल्ली-मुंबई के साथ ही बेंगलुरु, चेन्नई, तिरुवंतपुरम,भुवनेश्वर, कोलकाता, पटना, अगरतला, गुवाहाटी, वाराणसी, भोपाल, मणिपुर, जयपुर और अहमदाबाद और मुंबई जैसे 17 शहरों में थिएटर ओलंपिक के श्रंखलाबद्ध कार्यक्रम हुए। हज़ारों राष्ट्रीय-अतंरराष्ट्रीय कलाकारों और समूहों ने इस विशद आयोजन में हिस्सा लिया। इस दौरान 700 एम्बियेंस प्रस्तुतियां भी दी गईं। कई व्याख्यान,सेमिनार,कार्यशालाएं आयोजित हुईं। दिल्ली के 50 से ज़्यादा कॉलेजों और देश में सैकड़ों रंगकर्मियों ने इस आयोजन में शिरकत की। एनएसडी के मुताबिक, इसमें करीब 25 हज़ार कलाकारों ने किसी ना किसी रूप में भाग लिया। चीन, जापान, रूस, तुर्की, दक्षिण कोरिया जैसे कई देशों के नाट्य समूहों ने अपने प्रदर्शनों से दर्शकों का मनोरंजन किया। नये प्रयोग के साथ अपनी कला के ज़रिये ज़रूरी संदेश दिये।
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