Wednesday, May 20, 2026
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एक जुनूनी सफ़र का नाम है प्रवीण खारीवाल !

राह में औरों की जो फूल बरसाते हैं
पीछे खाली हाथ
खड़े वो रह जाते हैं
प्रवीण खारीवाल जैसी जुनूनी और बड़े दिल वाले आयोजक और पत्रकार के लिये यह पंक्तियां एकदम सही लगती हैं, यही तो उनकी खूबी है ! वे पत्रकारिता और कला से जुड़े रचनात्मक आयोजनों को बड़ी शिदद्दत से कल्पना करते हैं। उसे रूप,रंग और आकार देते हैं। अतिथियों की राह में फूल बिछाते हैं और बिना किसी अपेक्षा के फिर एक नये आयोजन में जुट जाते हैं। पढ़िये भारतीय स्टेट प्रेस क्लब,मध्यप्रदेश द्वारा इंदौर में जारी 13 वें भारतीय पत्रकारिता महोत्सव के अवसर पर आयोजन के कर्णधार प्रवीण कुमार खारीवाल पर शकील अख़्तर की यह विशेष टिप्पणी ।प्रवीण खारीवाल बहुत बार जानते हैं कि आयोजन को मंज़िल तक पहुंचाना आसान नहीं हैं, फिर भी वे अपनी टीम और अपने समर्थकों के साथ बड़ी जीवटता से अपना काम करते रहते हैं। जब तक आयोजन सफल नहीं होता, वे चैन से नहीं बैठते। यह एक आयोजन की नहीं, वे साल भर पत्रकारिता और अन्य कला विधाओं से जुड़े कार्यक्रमों को निरंतर प्रबंधित करते रहते हैं। ऐसे ही समय उनके चाहने वालों के दिल से यह दुआ भी निकलती है-
ऐसे सरपरस्तों को तू नवाज़ या रब
पीकर आँसू जो अपने मुस्कुराते हैं
इंदौर में भारतीय पत्रकारिता महोत्सव का आयोजन : एक बार फिर वे इंदौर में भारतीय पत्रकारिता महोत्सव के आयोजन में जुटे हैं। 14 अप्रैल से स्थानीय रविंद्र नाट्य गृह में तीन दिन के इस उत्सव की शुरूआत हो गई है। इसमें मीडिया से जुड़े  सामयिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के साथ ही संगीत और चित्रकला के आयोजन भी हो रहे हैं। बीते 13 सालों से वे यह वार्षिक आयोजन अपने कई हितैषियों,मित्रों और विभिन्न संगठनों आदि की मदद से करते हैं। इस समागम में 100 से ज़्यादा पत्रकार सम्मिलित होते हैं। इनमें से हर साल चयनित पत्रकारों का अभिनंदन होता है। आपसी मेल-मिलाप का अवसर मिलता है। प्रभाष जोशी जी से जुड़े आयोजन से हुई शुरूआत : स्टेट प्रेस के बैनर पर, बड़े आयोजनों की शुरूआत प्रभाष जोशी षष्टिपूर्ति समारोह 1993-94 से हुई थी। तब प्रवीण दैनिक समाचार पत्र ‘चौथा संसार’ बतौर रिपोर्टर काम करते थे। उस समय दिल्ली से आये अतिथियों को भी नहीं लग रहा था कि सामान्य-सा दिखने वाला एक युवा रिपोर्टर इतना बड़ा आयोजन कर पायेगा। परंतु यह कार्यक्रम सफलता से हुआ। तब आयोजक श्रमजीवी पत्रकार संघ बना था। उसके बाद ऐसे आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया। इसी तरह नई दुनिया के पूर्व संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार अभय छजलानी के 75 वें जन्म उत्सव ( सन् 2001) से एक और परंपरा का प्रादुर्भाव हुआ। स्टेट प्रेस क्लब के आयोजन का नाम भाषाई पत्रकारिता महोत्सव कर दिया गया। इसके बाद से इस महोत्सव का आकाश और बड़ा हो गया। स्टेट प्रेस क्लब की एक और उपलब्धि इंदौर में पत्रकारों के नाम पर स्थापित किये गये नाम और स्थान हैं। क्लब के प्रयासों से इंदौर में स्व.राजेंद्र माथुर और गणेश शंकर विद्यार्थी की मूर्तियों की स्थापना की गई है। स्व.गणेश शंकर विद्यार्थी की मूर्ति पत्रकार कॉलोनी वाली सड़क और स्व.राजेंद्र माथुर की मूर्ति पलासिया थाने के लगाई गई है। इसके साथ ही प्रभाष जोशी के नाम पर मोती तबेला में एक मार्ग का नाम भी रखा गया है। वे वहीं रहते भी थे।पत्रकारों की अवैतिनक नौकरी : हर वक्त पत्रकारों के हितों का खयाल करने वाले इस साथी को देखकर लगता है कि वे पत्रकारों के लिये अवैतनिक नौकरी पर हैं। अगर वे किसी से मिल रहे हैं, कोई निवेदन कर रहे हैं, अपनी टीम के साथ कहीं खड़े हैं तो इसका मतलब है वे अपने साथियों के लिये अपना कोई फर्ज़ निभा रहे हैं। कभी-कभी कुछ साथी उनके कामों को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां करते हैं। इस विषय में प्रवीण अपने अंदाज़ में यह कहकर जवाब देते हैं-
बड़े बेमुरव्वत,बड़े बेवफ़ा हो यारो
मगर मेरे दिल से जुदा नहीं हो यारो
करीब तीस साल का परिचय सफर: प्रवीण खारीवाल से मेरा चौथा संसार में सेवाओं के समय से नाता रहा है। इसके बाद मैंने उन्हें इंदौर प्रेस क्लब की चमकदार गतिविधियों से जाना। इस दौर में जब मैं उनसे दोबारा जुड़ा, तब मैंने पाया कि वे पत्रकारों के हित में बारे में ही सोचते रहते हैं। इंदौर प्रेस क्लब के दौर में भी उनसे प्रेस क्लब में बेहतर कामों को लेकर ही चर्चा हुई। एक मोड़ ऐसा आया जब इंदौर प्रेस क्लब से वे अलग होकर स्टेट प्रेस क्लब की एक नई यात्रा पर निकल पड़े। साथियों ने बहुत सी बातें कहीं। परंतु मैंने उनमें कभी किसी के प्रति शिकायत या दुर्भावना की बात नहीं सुनी। चाहे कोई विवाद रहा हो या कोर्ट कचहरी से जुड़ा मामला, वे ख़ामोशी से अपने स्तर पर अकेले ही अपनी लड़ाई लड़ते रहे और सार्वजनिक जीवन में पत्रकारों के हित में बढ़-चढ़कर काम करते रहे। मैंने उन्हें कभी भी ग़ैर ज़रुरी बात करते नहीं देखा। उनसे जब भी बात हुई, पत्रकारों के हित या उनसे जुड़े कार्यक्रमों की हुई। वे अब भी पत्रकारों के लिये ऑनलाइन वेबसाइट, पत्रकारिता के हितार्थ लाइब्रेरी, भावी पत्रकारों के प्रशिक्षण, पत्रकारों के लिये चिकित्सा, विपरीत स्थितियों में उनकी मदद आदि के कार्यक्रमों को विस्तार देने में लगे हैं। राज्य भर में संगठन के माध्यम से इसका विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं। संगीत और साहित्य से लगाव :  प्रवीण संगीत और साहित्य से गहरा लगाव रखते हैं। उन्हें शेरो-शायरी की दुनिया भाती है। अर्थपूर्ण और संवेदनशील लफ़्ज़ों को वो समझते हैं। वैसे तो वे राजनीति विज्ञान में एमए हैं, परंतु उन्होंने संगीत की तालीम भी ली है। एक शिष्य की तरह वे संगीत के गुरुजनों का मान रखते हैं। इस एक ख़ूबी ने उन्हें शहर के कला और संगीत जगत का भी चहेता बनाया है। इसी ख़ूबी की वजह से वे इंदौर में अभिनव कला समाज के अध्यक्ष भी हैं। मध्य भारत की इस सबसे पुरानी संगीत संस्था को नया विस्तार दे रहे हैं। पदभार संभालने के बाद से ही वे अपनी नई टीम के साथ अभिनव के मंच पर बहुत से महत्वपूर्ण संगीत कार्यक्रम कर चुके हैं। यहां पर संगीत की शिक्षा को नया विस्तार भी मिल रहा है। इतना ही नहीं उन्होंने एक नई दर्शक दीर्घा का विकास किया है। जहां पर रंगमंच की गतिविधियां जारी है। उनके नेतृत्व में स्टेट प्रेस क्लब संगीत के साथ नाटक के आयोजनों को मंच दे रहा है।

 

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