Wednesday, May 13, 2026
Homeकला रंगएकल नाटकों में अभिनय बड़े हुनर और दमख़म का काम: कमल प्रूथी

एकल नाटकों में अभिनय बड़े हुनर और दमख़म का काम: कमल प्रूथी

शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। ‘एकल नाटकों (Solo Plays) में अभिनय बड़े हुनर और दमख़म का काम है। कम ही ऐसे कलाकार हैं जो एक से डेढ़ घंटे तक, रंग-रूप बदल कर, दर्शकों का मनोरंजन कर सकें’। बहुमुखी प्रतिभा के धनी कमल प्रूथी ने एकल नाटकों को लेकर हुई चर्चा में यह बात कही। कमल ख़ुद एक बेहतरीन अभिनेता हैं। आप 12 एकल नाटकों के 300 से ज़्यादा शोज़ में परफॉर्म कर चुके हैं। कमल, एक ही नाटक में कई किरदार निभाने का हुनर रखते हैं। इनके देश के 20 शहरों के साथ ही हंगरी, जर्मनी, बांग्लादेश में भी सोलो शोज़ हो चुके हैं। आइये जानते हैं, सिने, टीवी और रंगमंच के लिये विविध स्तरों पर काम करने वाले इस अनुभवी कलाकार ने क्या कुछ कहा? (राकेश बेदी एकल नाटक ‘मसाज’ के एक दृश्य में।)कौन है एकल नाटकों के मँझे खिलाड़ी: कमल कहते हैं -‘सुषमा देशपांडे (सावित्री बाई फुले), मल्लिका साराभाई, जैमिनी पाठक (महादेवभाई), कुमुद मिश्रा (शक्कर के पांच दाने), राकेश बेदी (मसाज), माया राव (डीप फ्राइड जैम), हिमानी शिवपुरी (अकेली) और डॉ. सईद आलम जैसे कुछ ही गिनती के एक्टर हैं, जो एकल नाटक के मँझे खिलाड़ी माने गये हैं। ये ऐसे अभिनेता रहे, जो मंच का भरपूर इस्तेमाल कर, एक दृश्य से, दूसरे दृश्य में बखूबी अपने हुनर का कमाल दिखाते हैं। दर्शकों को बाँधे रखते हैं। इसमें भी संगीतमय एकल-नाटक अलग तरह की कलात्मक कृति है। (सुषमा देशपांडे एकल नाटक ‘सावित्री बाई फुले’ के एक दृश्य में।)अकेले परफॉर्म करना चैलेंज की बात: कमल प्रूथी ने कहा – ‘मैं ये नहीं कहता कि जिन दिग्गज कलाकारों का मैंने नाम लिया है, उनके सिवा कोई और ऐसा नहीं कर सकता। मेरा कहने अर्थ बस इतना है कि अकेले परफॉर्म करना बड़ी चुनौती वाली बात है। असल में सोलो प्लेज़ के लिये एक्टर को बड़ा फोकस होकर काम करना पड़ता है। उसे कहानी और किरदार के मुताबिक, अपनी काबलियत का श्रेष्ठ दिखाना होता है। ऐसा जो भी कर सकता है, वो दर्शकों की स्मृति में हमेशा के लिये जगह बना लेता है’। (हिमानी शिवपुरी एकल नाटक ‘अकेली’ के एक दृश्य में।)किसी में 26, किसी में 18 किरदार: कमल ने बताया-‘ मैं भीष्म साहनी की कहानी ‘चकला’ में 26 किरदार और सआदत हसन मंटो की कहानी ‘टोबा टेक सिंह’ में 18 किरदार, अकेले निभाता हूँ। इनके अलावा बच्चों के लिए परफॉर्म करने वाले नाटक अलग हैं। इनके नाम हैं, शेख-हबीबी, मुल्ला-नसरुद्दीन, काबुलीवाला, कन्फूज़ड-भगवान, आईना, बहरूपिया, ब्लू-कंगारू, बाघ का बच्चा, ब्रूनो-बहादुर, मियां की टोपी मियां के सर, भूत-घुड़सवार और मनमौजी-और-नवाब शामिल हैं। सबकी कहानियाँ अलग, सभी के किरदार और चुनौती का दायरा अलग। कुछ लोग तो मुझे मजमेकार और काबुलीवाला के नाम से ही जानते हैं। (कमल प्रूथी एकल नाटक ‘काबुलीवाला’ के एक दृश्य में) बहुत कम लिखे जाते हैं एकल नाटक: कमल प्रूथी ने एकल नाटकों के लेखन के सवाल पर कहा, ‘एकल नाटक बहुत कम लिखे जाते हैं। इसलिये जो मंच पर सोलो एक्ट करना चाहते हैं, उन्हें हमेशा एक अच्छी स्क्रिप्ट की तलाश रहती है। ऐसी स्क्रिप्ट जिसमें किरदार भी सशक्त हो। अब जिन्हें स्क्रिप्ट नहीं मिल पाती, वे ऐसी कहानियों को चुनते हैं, जिन्हें मंच पर वे परफॉर्म किया जा सके। स्क्रिप्ट और एकल परफॉरमर्स की कमी की वजह से ही, सौ में एक ‘सोलो’ नाटक हो पाता है। ऐसे आयोजन भी कम होते हैं। जहाँ तक परफेक्ट स्क्रिप्ट की बात है तो ऐसा कभी होता नहीं। राइटर को जो सही लगता   है, वो अपने हिसाब से लिखता है। एक्टर, डायरेक्टर उसे कैसे प्रस्तुत करेंगे। यह उनको ही सोचना पड़ता है’।      (कमल प्रूथी,हैम्बर्ग,जर्मनी में अपने एकल प्रर्दशन और उसपर जुड़े संवाद की एक अध्ययन क्लास में) क्या कम खर्च में एकल नाटक संभव है: इस सवाल के जवाब में कमल कहते हैं- ‘एकल नाटक में, फुल लेंथ नाटक की अपेक्षा कम खर्च होता है। यात्रा, प्रवास के खर्च में भी कमी आती है। परंतु वेशभूषा, मंच सज्जा, प्रॉपर्टी, लाइट्स, संगीत आदि की भी ज़रूरत होती है। पहली बार में यह खर्च ज़्यादा हो सकता है। बाद में कम। मान लीजिये एक फुल लेंथ नाटक के मंच तक पहुँचने का खर्च 5 लाख रूपये तक आता है, तब तुलनात्मक रूप से एकल नाटक में यह खर्च आधा से कुछ ज़्यादा होगा।
जर्मनी और अंग्रेज़ी में किये नाटक: कमल हिन्दी के अलावा अंग्रेज़ी, जर्मन जैसी भाषाओं में भी पारंगत हैं। उन्होंने बताया- ‘मैं जर्मन लैंग्वेज अच्छी तरह से जानता हूँ और दिल्ली के मैक्स म्युलर भवन में जर्मन पढ़ाता हूँ। मैंने जो सोलो नाटक विदेश में किये हैं। उन्हें मैंने वहीं की भाषा में परफॉर्म किया है। जैसे कि जर्मन में जर्मनी, हंगरी में अंग्रेज़ी और बांग्लादेश में बांगला भाषा में’। …कमल प्रूथी की एक और ख़ूबी है। वे एक अच्छे राइटर और अनुवादक भी हैं। नाटकों के साथ उन्होंने अनुवाद को लेकर बहुत सा काम किया है। जल्द ही उनसे नाटकों के अनुवाद के साथ ही रंगमंच से जुड़ी कुछ और दिलचस्प बातें करेंगे।फिलहाल आगे पढ़िये।
https://indorestudio.com/guru-se-achche-rishte-banayen-guru-jiwan-ke-adhar-ustad-zakir-hussain/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास