Wednesday, June 17, 2026
Homeचर्चित फ़िल्म'दि कश्मीर फाइल्स' पर लपिड की टिप्पणी को लेकर कोहराम जारी

‘दि कश्मीर फाइल्स’ पर लपिड की टिप्पणी को लेकर कोहराम जारी

IFFI 2022  IFFI 53 इफ्फी के समापन समारोह में इज़राइली फ़िल्ममेकर नदाव लपिड की फिल्म ‘दि कश्मीर फाइल्स’ पर टिप्पणी को लेकर कोहराम जारी है। लापिड की टिप्पणी के पक्ष और विरोध में सोशल मीडिया से लेकर अंदरखाने प्रतिक्रियाओं और बहस का सिलसिला जारी है। सरकार ने इस आयोजन के लिये जिस तरह से इज़राइल के साथ फ़िल्म निर्माण, प्रदर्शन और फौदा सीरिज़ के कलाकारों को आमंत्रण जैसी साझेदारी की थी, वह लपिड की टिप्पणी से धूमिल हुई है। हालांकि इस मामले में इज़रायल के राजदूत ने खेद जताया है लेकिन दुनिया भर के फ़िल्म उत्सवों में भारत की छवि को धक्का पहुँचा है। फिल्म की सत्यता को लेकर तमाम बातें हो रही हैं। इसे सरकारी तौर पर आयोजकों की बड़ी नाकामी माना जा रहा है। ऐसी फिल्म को शामिल करने को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। सूचना प्रसारण मंत्रालय के साथ दिल्ली फ़िल्म निदेशालय और गोवा शासन में भी इस बात को लेकर खलबली मची हुई है। पढ़िये इस विवाद पर शकील अख़्तर की रिपोर्ट।- इंदौर स्टूडियो लापिड इंटरनेशनल फ़िल्मों के जूरी हेड: फ़िल्ममेकर नदाव लपिड को इफ्फी की इंटरनेशनल फ़िल्मों की जूरी का प्रमुख बनाया गया था। उनकी मंच पर सार्वजनिक टिप्पणी के बाद जूरी को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। फ़िल्म के पक्ष में खड़े लोग तो लापिड की योग्यता और उन्हें यह दायित्व सौंपे जाने पर ही प्रश्न उठा रहे हैं। इस बीच अनुपम खेर के बाद फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की प्रतिक्रिया भी आई है। उन्होंने कहा कि कश्मीर फाइल्स का एक शॉट भी अगर कोई ग़लत प्रूव कर दे तो मैं फिल्में बनाना छोड़ दूंगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किये एक वीडियो के साथ विवेक ने लिखा -‘आतंकवाद के समर्थक और नरसंहार से इनकार करने वाले मुझे कभी चुप नहीं करा सकते,जय हिंद’।
समापन समारोह लपिड ने की थी टिप्पणी:
गौरतलब है कि पणजी,गोवा के श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में इफ्फी के 53वें संस्करण का समापन समारोह हुआ था। इस समारोह में अपने संबोधन के दौरान नदाव लपिड ने ‘दि कश्मीर फाइल्स’ को एक प्रोपेगन्डा और वल्गर फिल्म (प्रचार और बेहद घटिया फ़िल्म) करार दिया था। उन्होंने कहा था, ”हम सभी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ से परेशान और हैरान थे। यह हमें एक प्रचार और अश्लील फिल्म की तरह लगा जो इतने प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के एक कलात्मक और प्रतिस्पर्धी वर्ग के योग्य नहीं थी। नादव लापिड ने कहा, “मैं इस भावना को आपके साथ खुले तौर पर साझा करने में सहज महसूस करता हूं क्योंकि सच तो ये है कि फिल्म फेस्टिवल की भावना कला और जीवन के लिए ज़रूरी महत्वपूर्ण चर्चा को स्वीकार कर सकती है जो ।” इतना ही नहीं उन्होंने यह भी  कहा फिल्म समारोह में फिल्म की स्क्रीनिंग देखकर वह “परेशान और स्तब्ध” हैं।इजरायल के राजदूत ने टिप्पणी पर अफ़सोस जताया:  की राय सामने आते ही भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलन नदाव लपिड जमकर बरसे। भारत से उनके इस बर्ताव और कथन के लिये माफी माँगी। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा, आपको शर्म आनी चाहिये। भारतीय संस्कृति में मेहमान को भगवान की तरह माना जाता है। आपने इफ्फी (IFFI) में जजों के पैनल के हेड के भारतीय आमंत्रण का अपमान किया है। उनके भरोसे, सम्मान और गर्मजोशी से किए गए स्वागत का भी मजाक बना दिया। नाओर गिलन ने अपने टिव्टर पर लिखा, ‘हमारे भारतीय मित्रों ‘फौदा’ सीरीज के कलाकारों को यहां बुलाया और उन्हें भारत में काफी प्यार मिला। आपको अपने बर्ताव के लिए आत्ममंथन करने की जरूरत है। मैंने मंच से भी कहा था कि हमारे दोनों देशों में कई समानताएं हैं क्योंकि हम एक तरह के दुश्मन से लड़ रहे हैं और जो हमारा बुरा पड़ोसी ही है।’अनुपम खेर ने कड़ी आपत्ति जताई: अनुपम खेर ने फिल्म को प्रोपेगन्डा और वल्गर बताये जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “अगर नरसंहार सही थी तो कश्मीरी पंडितों का पलायन भी सही है। यह पूर्व नियोजित लगता है क्योंकि इसके तुरंत बाद टूलकिट गिरोह सक्रिय हो गया। उनके लिए इस तरह का बयान देना शर्मनाक है, भले ही वह यहूदियों के एक समुदाय से आते हैं, जो प्रलय से पीड़ित थे। इसीलिये उन्होंने इस तरह का बयान देकर उन लोगों को भी दुख पहुंचाया है, जिन्होंने इस त्रासदी को झेला है। मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि भगवान उन्हें सदबुद्धि दें ताकि वह मंच पर अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए हजारों लोगों की त्रासदी का इस्तेमाल न करें।
इंडियन पैनोरमा का हिस्सा थी फ़िल्म: बता दें कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ आईएफएफआई में इंडियन पैनोरमा सेक्शन का हिस्सा थी और 22 नवंबर को प्रदर्शित हुई थी।  यह फ़िल्म मार्च 2022 के महीने में रिलीज़ हुई थी। अग्निहोत्री द्वारा लिखित और निर्देशित और ज़ी स्टूडियो द्वारा निर्मित, फिल्म में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा समुदाय के लोगों की हत्याओं के बाद कश्मीर से कश्मीरी हिंदुओं के पलायन को दर्शाया गया है। इसमें अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन चक्रवर्ती और पल्लवी जोशी शामिल हैं। (चित्र सौजन्य: पीआईबी)

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