Saturday, October 17, 2026
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50 साल बाद फ़िल्म ‘शोले’ में ठाकुर और गब्बर का ओरिजनल सीन

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‘फिल्म ‘शोले’ के आख़िरी सीन को सेंसर बोर्ड ने हटा दिया था, लेकिन 50 साल बाद अब फ़िल्म में ठाकुर और गब्बर सिंह का वही (orignal) सीन आप फिर से देख सकेंगे’। रमेश सिप्पी ने शोले के रिस्टोर्ड वर्ज़न के बारे में कही है। उन्होंने धर्मेंद्र को याद करते हुए कहा, फिल्म ‘शोले’ की शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र घोड़े से गिर पड़े थे। वो तेज़ रफ़्तार एक्शन सीन था। तब धर्मेंद्र घुड़सवारी कर रहे थे। उनके गिरते ही मेरा दिल धक से बैठ गया था!’ एक्शन सीन के बारे में मास्टर फिल्म मेकर रमेश सिप्पी ने आगे कहा…’घोड़े से गिरने के चंद पलों बाद ही, धरम जी  उठ गये, उन्होंने अपने कपड़ों पर लगी धूल झाड़ी और फिर से एक्शन के लिये तैयार हो गये!.. वे बड़े समर्पित एक्टर थे’।वे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI 2025) के संवाद सत्र में दर्शकों से मुखातिब थे। उनके साथ पत्नी किरण सिप्पी मेज़बान की भूमिका में थीं। इस बातचीत में उन्होंने कई दिलचस्प बातें कहीं और कई बातों से परदा हटाया।सिप्पी ने धर्मेंद्र की ख़ूबियों के बारे में कहा, वो हमेशा ही नई-नई बातों को आज़माने के लिये तैयार रहते थे। भावुक माहौल में उन्होंने स्व.धर्मेंद्र के साथ ही फिल्म में यादगार भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेता असरानी, अमजद ख़ान और संजीव कुमार को याद किया। इन कलाकारों के प्रति श्रद्दाजंलि व्यक्त की। सोचने लगे, कैसे देखते-देखते साथ छूट गया!उन्होंने बताया – ‘यह फ़िल्म 1975 में रिलीज हुई थी। वो इमरजेंसी का ज़माना था। उस दौर में सेंसर बोर्ड ने फिल्म के क्लाईमेक्स पर एतराज़ जताया था। इस सीन में स्पाइक शूज़ (कीलों वाले जूते) पहना हुआ ठाकुर, अपने पैरों से गब्बर सिंह को मारता है। इस सीन पर सेंसर बोर्ड को एतराज़ था। बोर्ड का मानना था कि एक पुलिस अफ़सर को बदला लेते हुए नहीं दिखाया जा सकता। इस वजह से फिल्म के आख़िरी सीन की फिर से शूटिंग हुई। ‘एंड’ बदल दिया गया। उन्होंने दर्शकों से कहा, ’50 साल बाद इसके रिस्टोर्ड वर्ज़न में अब आप वैसी ही फ़िल्म देखेंगे, जैसी वह बनाई गई थी।’ सिप्पी ने कहा- उस ज़माने में डाकू वाली फिल्में राजस्थान या चंबल की घाटी में शूट होती थीं। मगर तब उन्होंने मैसूर और बेंगलुरू के पास के पथरीले और उबड़-ख़ाबड़ इलाकों की खोज की। पथरीले बैकग्राउंड ने ‘शोले’ को एक ऐसा लुक दिया जो भारतीय सिनेमा में पहले कभी देखा नहीं गया। इस लोकेशन के अलावा गब्बर सिंह के किरदार को भी ख़ासा बदला गया। वह यूपी स्टाइल में बोल रहा था, लेकिन साउथ इंडिया के रामगढ़ में आतंक मचा रहा था। उन्होंने कहा, वो गब्बर सिंह का किरदार पहले डैनी डेन्जोंगपा को देना चाहते थे लेकिन उस समय डैनी विदेश में एक फिल्म शूटिंग में व्यस्त थे, वो हमें डेट्स नहीं दे पा रहे थे। तब सलीम-जावेद ने अमज़द ख़ान के बारे में बताया। अमज़द ने उन्हें अपने टैलेंट से प्रभावित किया और फिर बाक़ी सब फिल्मी दुनिया में एक इतिहास बन गया। सलीम-जावेद ने फिल्म के इस प्लॉट के बारे में मनमोहन देसाई को बताया था। उन्होंने उनके कॉन्सेप्ट से इनकार कर दिया था। मगर जीपी सिप्पी और रमेश सिप्पी (पिता-पुत्र) ने इस थीम की कल्पना को तुरंत भांप लिया। फिल्म को लिखने की बात कर ली गई और फिर एक महीने में ही ‘स्क्रीन प्ले’ तैयार हो गया। सिप्पी के कहने पर ही विलेन के किरदार को अलग तरह से लिखा गया, ऐसा विलेन जो अचानक ख़तरनाक हो उठता है, वह विलेन हिन्दी सिनेमा के इतिहास में एक अलग किरदार बन गया। इसके बाद भारतीय फिल्मों को एक नया और बेहतरीन विलेन भी मिला। रमेश सिप्पी ने कहा, फिल्म ‘शोले’ ज़बरदस्त टीम वर्क का नतीजा थी। फ़िल्म में कई ऐसी चीज़ें थीं जो पहली बार ही हुईं थी। जैसे ये पहली भारतीय फ़िल्म थी जिसमें ब्रिटेन से एक प्रोफ़ेशनल फ़ाइट-सीक्वेंस टीम आई थी। किरण सिप्पी ने बताया कि ‘शोले’ से ही फिल्म इंडस्ट्री में एक्शन सीन्स के लिए सेफ़्टी प्रोटोकॉल शुरू किये गये। फिल्म के सिनेमैटोग्राफ़र द्वारका दिवेचा ने विज़ुअल स्टोरी टेलिंग के नये मानक स्थापित किये। रमेश सिप्पी ने प्रॉडक्शन मैनेजर अज़ीज़ भाई को भी याद किया जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर अहम भूमिका निभाई थी।जया भादुड़ी के शाम वाले लैंप सीक्वेंस की शानदार लाइटिंग के बारे में फिल्म मेकर ने कहा – ‘इस सिक्वेंस को कैप्चर करने में कई दिन लग गए, हर दिन सही “मैजिक आवर” का इंतज़ार किया गया’। उन्होंने आनंद बख्शी के लिखे गीत और आर.डी. बर्मन के संगीत की दिल से तारीफ़ की। उन्होंने ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ गीत के शब्दों को याद करते हुए कहा, ‘फिल्म का संगीत कई जनरेशन से अब तक गूँज रहा है’। 50 साल के बाद फिल्म शोले का नया 4k (रिस्टोर्ड) वर्जन सिनेमा हाल में रिलीज़ हो रहा है। इफ्फी में फिल्म में जय-वीरू की उपयोग की गई मोटरबाइक को प्रदर्शित किया गया है-जो सिनेमा प्रेमियों के लिये आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसके रिस्टोर्ड वर्ज़न का टोरेंटो में प्रीमियर हुआ था। वहां पर फिल्म देखने के बाद दर्शकों ने रमेश सिप्पी को स्टैंडिग ओवेशन दिया था। इंदौर स्टूडियो, इनपुट पीआईबी गोवा और फिल्मकार रमेश सिप्पी X हैन्डल। आगे पढ़िये – धर्मेंद्र की वो नज़्म जो बयान करती है उनकी ज़िदंगी।  https://indorestudio.com/dharmendra-ki-nazm/

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