Wednesday, May 20, 2026
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‘गद्दार’ उपन्यास ऐतिहासिक हक़ीक़त का रोचक अफ़साना, उपन्यास में महारानी लक्ष्मीबाई की शहादत से जुड़ी सचाई

सुभाषचंद्र अरोरा,इंदौर स्टुडियो। इतिहास गवाह है महारानी लक्ष्मीबाई ग्वालियर में शहीद हुई थीं और ग्वालियर  ने उसका साथ नहीं दिया। उपन्यास इसी सच्चाई पर केंद्रित है। उपन्यास  के काल क्रम की दृष्टि से तात्कालीन भारत को मोटे तौर पर दो भागों में बांटा जा सकता है। एक ब्रिटिश इंडिया और दूसरा इंडियन इंडिया। इंडियन इंडिया अर्थात रियासती भारत जो अंग्रेजों का गुलाम तो नहीं था , वहाँ अंग्रेज़ों का दोस्ताना दखल रजवाड़ों की आजादी को रेखांकित करता था। उपन्यास इतना रोचक है कि एक बार पढ़ना शुरू करने पर इसे पूरा पढ़े बिना छोड़ना मुश्किल हो जाता है।
स्वाधीनता काल का कल्पना लोक: ‘गद्दार’ राकेश अचल का  मात्र उपन्यास नहीं बल्कि ग्वालियर  की ऐतिहासिक हकीकत का रोचक अफसाना है। अफसाना निगार राकेश अचल जो लम्बे अर्से से ग्वालियर के बाशिन्दे हैं । उन्होंने इस उपन्यास  में देश के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के काल के ग्वालियर का बखूबी कल्पना लोक रचा है। उनकी काल्पनिक रचनाधर्मिता में ग्वालियर के इतिहास पुरखे ,बैजाताल वाली रानी महारानी ,कंचे खेलने में माहिर निशानेबाज दत्तक पुत्र,असरदार मराठा सरदार,दीवान,कम्पनी सरकार के फौजी अफसर ,ग्वालियर महल की शतरंजी बिसात, काल नेत्री ग्वालियर विजेता प्रातः स्मरणीया महारानी लक्ष्मीबाई की जीत – हार और ग्वालियर के पवित्र धाम गंगादास की बड़ी शाला की कुर्बानी का बखान है ,साथ ही सिंधिया शासकों के अपराध बोध का खामोश संदेश देता है। गद्दारी का कड़वा घूँट निगलने वाला महल आज भी बादस्तूर ग्वालियर महल है।
उपन्यास पढ़े बिना मन नहीं मानता: ‘गद्दार’ राकेश अचल का सीधी, सरल और गहरी पकड़ वाली ऐसी किस्सागोई है जिसे बाँचना शुरू करें तो पूरा पढ़े बिना मन नहीं मानता। यह उपन्यास  सहज ही हमें केएम. मुन्शी,मदेवकी नंदन खत्री,सोमनाथ ‘अकेला’,और 70 के दशक के उपन्यासकारों की रोचक शैली का स्मरण कराता है ,जब उपन्यास को पूरा पढ़ना पाठक की मजबूरी बन जाता था। उपन्यास के अग्र भाग में सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता “खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी” तथा उपन्यास के अंतिम पृष्ठों में महत्वपूर्ण श्याम-श्वेत चित्र  सुसज्जित हैं। लेखक प्रतिष्ठित पत्रकार और कवि हैं, जिनकी कई  पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और ‘गद्दार’ उनका प्रथम उपन्यास  है। आपको अवसर मिले तो पढ़ने से ना चूकें। इस उपन्यास की ख़ुद ऐतिहासिक उपन्यासों के सिद्धहस्त लेखक डॉ.शरद पगारे ने प्रशंसा की है।

(पुस्तक:’गद्दार’/ लेखक-राकेश अचल / सन्मति पब्लिशर्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूटर/ मूल्य-160 रूपये)

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