Wednesday, May 13, 2026
Homeकला खबरेंगेयटी थियेटर फेस्टिवल: ‘आधे-अधूरे’ जीवन में हालात का ‘सैलाब’

गेयटी थियेटर फेस्टिवल: ‘आधे-अधूरे’ जीवन में हालात का ‘सैलाब’

ममता पांडेय, इंदौर स्टूडियो। शिमला में जारी गेयटी थियेटर फेस्टिवल में दूसरे दिन नाटक ‘आधे अधूरे’ और ‘सैलाब’ का मंचन हुआ। ‘आधे-अधूरे’ के मंचन से एक बार फिर यह साबित हुआ कि साठ और सत्तर के बदले दौर के बावजूद आज भी यह नाटक दर्शकों को अपने प्रयोग से प्रभावित करने में सक्षम है। जबकि दो सहेलियों के जीवन में उठे ‘सैलाब’ ने दर्शकों को सोचने पर विवश किया कि स्त्री जीवन और उनके हालात में आज भी कितने सुधारों की ज़रूरत है। जारी है अद्वितीय नाटक का सफ़र: आधे-अधूरे मोहन राकेश का कालजयी नाट्य है। इस नाटक का 1969 में प्रकाशन हुआ था। नाटक में मध्यमवर्गीय पारिवारिक के जीवन की विंडबनाओं और विसंगतियों का चित्रण है। टूटते-बिखरते रिश्तों और उसके अधूरेपन की अभिव्यक्ति है। नाटक का पहली बार मंचन ओम शिवपुरी के निर्देशन में, दिल्ली में हुआ था। तब से ही इस सीमा चिन्ह नाटक के प्रयोग होते चले आ रहे हैं। शिमला में भी इस नाटक ने अपना प्रभाव बरकरार रखा। नाटक में दर्शकों ने वही तनाव अपने अंदर महसूस किया जो सावित्री के मध्यमवर्गीय जीवन में बढ़ता जाता है। कलाकारों की सशक्त अभिव्यक्ति: नाटक में नाटक में सुनील राज, आरती विश्वकर्मा, भारती साहू, समृद्धि असाठी, विभांशु खरे ने विभिन्न भूमिकाएं अदा की और इसे अपने अभिनय से एक सशक्त प्रस्तुति बना दिया। सावित्री की भूमिका में आरती विश्वकर्मा, काले सूट वाला आदमी के साथ ही पुरूष किरदारों की भूमिकाओं में सुनील राज ने अपना प्रभाव छोड़ा। निर्देशक की आत्म स्वीकृति: अभिनय के साथ सुनील राज ने नाटक के निर्देशक भी किया है। उन्होंने नाटक की प्रस्तुति को लेकर अपनी सीमाओं का ज़िक्र, अपने कथन में किया है। उन्होंने लिखा है, हमारे लिये यह नाटक खेलना आसान नहीं था, क्योंकि इस नाटक को अति अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है। इसीलिये मंचन से पहले मैंने बीसों बार सोचा। फिर भी मैं इसे मंच पर प्रस्तुत करने के मोह से नहीं बच सका। मैंने नाटक में कमसेकम टूल या डिवाइस के इस्मेताल की कोशिश की। सैट को साधारण रखा और संगीत और प्रकाश से किरदारों को सहारा देने का काम किया। दो सहेलियों के जीवन में सैलाब: ‘सैलाब’ अंजली काजल की कहानी पर आधारित नाटक है। गेयरी थियेटर फेस्टिवल में इसे दिल्ली की थियेटर कंपनी ‘नाटकशाला’ ने प्रस्तुत किया। इसका नाट्य रूपांतरण और निर्देशन नवीन दिवाकर ने किया है। यह नाटक दो सहेलियों के संघर्ष की कहानी को प्रस्तुत करता है। दोनों के स्वभाव में विषमता है। फिर भी दोनों एक-दूसरे के साथ खड़ी नज़र आती हैं। नाटक में जहां हम पम्मी और नैना की मित्रता को देखते हैं, वही उनके संघर्ष में हम, हर स्त्री जीवन के संघर्ष का अनुभव कर सकते हैं। बदलावों और सुधारों की ज़रूरत: यह विचारोत्तेजक नाटक कई सवाल खड़े करता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि समाज में स्त्रियों के प्रति, अभी कितने और बदलावों की जरूरत है। नाटक में दोनों सहेलियों के किरदारों को मंच पर मनीषा मल्होत्रा और ममता कर्नाटक ने जीवंत किया। दोनों की भूमिकाओं के साथ दर्शक बहते नज़र आये। नाटक में संगीत और प्रकाश मनीषा मल्होत्रा का रहा और नेपथ्य सहयोग गौरव जैन के साथ रेखा जोशी का था। गेयटी थियेटर फेस्टिवल में आज: गेयटी थियेटर फेस्टिवल अनुकृति रंगमंडल कानपुर ने भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश, एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब शिमला तथा संस्कृति मंत्रालय तथा भारत सरकार नई दिल्ली के साझा सहयोग से आयोजित किया है। दूसरे दिन नाट्य प्रस्तुतियों को लेकर अनुकृति रंगमंडल की तरफ़ से समारोह के निर्देशक डॉ.ओमेन्द्र कुमार ने आभार जताया। इस अवसर पर एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब शिमला के सचिव ब्रिगेडियर आरके शर्मा, वरिष्ठ रंगकर्मी केदार ठाकुर समेत बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। फेस्टिवल में आज नाटक का ‘टेररिस्ट की प्रेमिका’ का मंचन होगा। आगे पढ़िये –

जनता सिनेमा: अब कहीं भी देखिये नई फ़िल्म का फर्स्ट डे-फर्स्ट शो!

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास