Wednesday, August 19, 2026
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गेयटी थियेटर,शिमला में ‘अनुकृति रंगमंडल’ के नाट्योत्सव का शुभारंभ

ममता पांडेय, इंदौर स्टूडियो। शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में गुरूवार 21 सितंबर से अनुकृति रंगमंडल, कानपुर द्वारा आयोजित चार दिवसीय नाट्योत्सव शुभारंभ हुआ। पहले दिन नाटक ‘हवालात’ और ‘बड़े भाई साहब’ का मंचन हुआ। दोनों ही संवेदनशील नाटकों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया। नाटक जहाँ ‘हवालात’ भ्रष्ट व्यवस्था और हालात पर प्रहार करता है, वहीं नाटक ‘बड़े भाई साहब’ प्रचलित शिक्षा पर प्रश्न खड़े करता है। कुल छह नाटकों का होगा मंचन: नाटकोंं के मंचन से पहले ब्रिगेडियर आरके शर्मा सचिव, एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब, शिमला के वरिष्ठ रंगकर्मी केदार ठाकुर तथा नाट्योत्सव के निर्देशक डॉ. ओमेन्द्र कुमार ने द्वीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। अनुकृति द्वारा इस नाट्योत्सव का आयोजन हिमाचल प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग, एमेच्योर ड्रामेटिक क्लब,शिमला तथा संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार के सहयोग से किया गया है। नाट्य उत्सव में कुल छह नाटकों का मंचन होगा। इसमें अनुकृति के साथ ही आमंत्रित रंगसमूह भी अपने नाटक प्रस्तुत करेंगे। इनमें स्थानीय और बाहर से निमंत्रित रंगसमूह शामिल हैं। बेरोजगारों की कथा ‘हवालात’: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना लिखित और विनय श्रीवास्तव निर्देशित नाटक ‘हवालात’ भ्रष्ट व्यवस्था के साथ ही शोषक व शोषित की विसंगति को बखूबी बयान करता है। कहानी उन तीन मध्यम वर्गीय समाज के पढ़े-लिखे बेरोजगार लड़कों की है जो ग़रीबी की वजह से सर्द रात में सिर छुपाने की जगह तलाश रहे हैं। उसी समय एक सिपाही आता है और उन्हें चोर कहकर हवालात में बंद करने की धमकी देता है। तीनों यह सोचकर खुशी-खुशी हवालात जाने को तैयार हो जाते हैं कि वहाँ रात की सिहरन का एहसास कुछ कम हो जायेगा। इस तरह वे तीनों अपराधी होना स्वीकार कर लेते हैं।व्यवस्था के आज सब शिकार: सिपाही उनकी आँख में पट्टी बांधकर हवालात ले जाने के बहाने वहीं घुमाता रहता है। तीनों सिपाही से कहते हैं कि वह भी उसी व्यवस्था का शिकार है जिसके वो सब हैं। सिपाही उन्हें वही छोड़कर चला जाता है। पट्टी खोलने पर तीनों अपने आपको वहीं पाते हैं, जहाँ से चले थे। उनके सामने फिर वही मंजर होता है। सर्द रात,कड़ाके की ठंड, भूख और बेबसी। नाटक में देव व्रत कुशवाहा, रोहित राज यादव, विपिन गौड़ ने लड़कों और अनूप श्रीवास्तव ने सिपाही की भूमिका अदा की है। नाटक में संगीत रिभु श्रीवास्तव और प्रकाश विनय श्रीवास्तव का रहा। यह प्रस्तुति प्रयागराज के रंग समूह माध्यम की थी।शिक्षा के प्रचलित तरीकों पर कटाक्ष: दूसरा नाटक ‘बडे़ भाई साहब’ मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित रहा। नाटक में लेखक ने शिक्षा के प्रचलित तरीकों पर कटाक्ष किया है। विद्यार्थियों को जो कुछ भी पढ़ाया जा रहा है, उनमें से अधिकांश का वास्तविक जीवन से कोई लेना-देना नहीं। इसे पढ़कर उन्हें जीवन में कोई लाभ नहीं होता किंतु परीक्षा पास करने के लिए विद्यार्थियों को यह सब याद करना पड़ता है। लेखक कहता है कि हिस्ट्री में अंग्रेजों का इतिहास पढ़ाया जाता है जबकि यह पढ़ाई ना तो उन्हें अत्मनिर्भर बनाने में सक्षम है न ही यह पढ़ाना ही प्रासंगिक है। दिल को छू जाने वाला अहसास: नाटक में संवेदनशीलता, मानवीय रिश्तों का दिल को छू जाने वाला अहसास है तो मौजूदा दौर में टूटते सामाजिक ताने-बाने का चित्रण भी। ना तो परिवारों में पहले जैसी कशिश रह गयी न भाई एक दूसरे के लिए फ्रिकमंद। नाटक के जरिये भाइयों की एक दूसरे के लिए निस्वार्थ भावना को बहुत खूबसूरती से दर्शाया गया। बड़े भाई साहब की तपेश्वर दत्ता और छोटे भाई की भूमिका विक्रांत वर्मा बखूबी निभायी।  रंगमंच थिएटर ग्रुप राजौरी जम्मू कश्मीर की इस नाट्य प्रस्तुति का इस नाट्य प्रस्तुति का प्रकाश संचालन, संगीत और निर्देशन विशाल पहाड़ी ने किया। आगे पढ़िये –

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