नई दिल्ली। कस्तूरबा गाँधी एवं महात्मा गाँधी के 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में ‘गाँधी और बेरोजगारी’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरूआत गाँधी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये जो पीर पराई जाने रे ….’ और रबीन्द्रनाथ टैगोर के ‘एकला चलो…’ से हुई।
प्रसिद्ध गाँधीवादी कार्यकर्ता रामचंद्र राही ने सभागार में उपस्थित बड़ी संख्या में युवाओं को देख कर कहा कि भारत का भविष्य उज्जवल है और युवाओं के भविष्य को कोई उनसे छीन नहीं सकता है। युवाओं में गाँधी विचार के प्रति जो आकर्षण है, वह चिंतन, मनन और प्रयोग की तरफ ले जाने की कोशिश होनी चाहिए।
गांधी कहते थे आधुनिक विकास को विनाश का मॉडल
‘गांधी और बेरोजगारी’ के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ‘आधुनिक विश्व के विकास माडल को गाँधी जी विनाश कहते थे।आजादी के पूर्व और उसके बाद भारत की विकास यात्रा भी वही है। गाँधी जी ने हिन्द स्वराज में कहा है कि आज हम जिस विकास की तरफ जा रहे हैं। वह हमें विनाश की तरफ ले जाने वाली पागल-अंधी दौड़ है।’ हमें इस विकास को छोड़ना होगा।गाँधी जी कहते थे कि अगर कोई और मेरा समर्थन नहीं करेगा तो भी मैं इस विकास माडल का विरोध करता रहूँगा।
विकास के इस मॉडल से नहीं निकलेंगे रोज़गार के मौके
आज बेरोजगारी बढ़ रही है।लोगों का रोजगार छीन रहा है।सरकारों के पास इसका कोई समाधान नहीं है।हमें व्यवस्था को चलाने वालों से पूछना चाहिए कि आपने क्यों हमारा भविष्य हमसे छीन लिया है? हमको जिस विकास की दौड़ में शामिल किया गया है वहां न तो रोजगार है और न ही स्थिरता है।आज जाबलेस ग्रोथ की बात की जा रही है। इससे समझा जा सकता है विकास के इस व्यवस्था में रोजगार नहीं है। हम कॉलेज और विश्वविद्यालयों से डिग्री लेकर रोजगार की तलाश में पागलों की तरह चक्कर काट रहे हैं।इस सिस्टम में रोजगार का सृजन नहीं हो रहा है।रोजगार को समाप्त किया जा रहा है।पहाड़ों और प्रकृति के बीच रहने वाले प्रकृति पुत्रों को विकास के नाम पर वहां से खदेड़ा जा रहा है, कह रहे हैं कि हम विकास करेंगे, जो आदिवासी प्रकृति पर आश्रित था उसको वहां से दूर करके बेरोजगार कर दिया गया।
साफ़ हवा और पानी तक नहीं
सोनभद्र के शक्तिनगर में हमारे विकास का एक कारखाना है।उस कारखाने से निकलने वाली राख से आस-पास के कई गाँव की जमीन बंजर बन गई,वातावरण दूषित हो गया। आज के विकास का ये तरीका चल रहा है।
आज पूरी दुनिया की यह चिंता है की हमें साफ पानी, हवा और पर्यावरण मिले। इस विकास ने हमें जूझने के लिए मजबूर कर दिया है। प्रकृति का इतना दोहन कर लिया गया है कि आने वाली पीढ़ी को हमारे पास देने के लिए बहुत कुछ नहीं है।
आज गाँधी और बा के जन्म के १५० वर्ष ही नहीं हो रहे हैं, हिन्द स्वराज के भी सौ वर्ष हो रहे हैं।हिन्द स्वराज में गाँधी जी ने नए समाज और निर्माण की परिकल्पना की थी। गाँधी को विज्ञान, टेक्नोलॉजी का विरोधी बताया गया, ऐसी अफवाह फैलाई गई। लेकिन गाँधी जी विज्ञान और तकनीक के विरोधी नहीं थे।वो ऐसे मशीन के विरोधी थे जो आदमी को बेरोजगार बनाता हो।

गांधी दर्शन समूची मानवता के लिए
गाँधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने व्यापक फलक पर गाँधी दर्शन की व्याख्या करते हुए कहा कि, ‘गाँधी जी भारत की आजादी के संघर्ष को पूरी दुनिया के गुलाम मुल्कों का संघर्ष बना दिया था।भारत की आजादी के बाद पूरी दुनिया के उपनिवेशों में एक चेतना आई और उसके बाद ११० देश आजाद हुए।उसके बाद यह मन लिया गया कि अब देशों को गुलाम बना कर नहीं रखा जा सकता है।
गाँधी का दर्शन किसी एक देश के लिये नहीं है।वो समूची मानवता के लिए चिंतित रहते थे।हमारे देश के आजादी की लडाई दो राजाओं के बीच की लडाई नहीं थी।यह जन जागरण की लडाई थी।धर्म, प्रान्त, भाषा और क्षेत्र की दीवार को तोड़ते हुए इसने पड़ोस को भी जगा दिया।आज पर्यावरण को लेकर १६ साल की बच्ची जो कह रही है, गाँधी जी ने उसे बहुत पहले कह दिया था।
रोज़गार और नौकरी में अंतर है।
भारत में १८ करोड शिक्षित बेरोजगार हैं। गाँधी की नजर में रोजगार और नौकरी में अंतर है। नौकरी आपको दूसरे पर आश्रित करती है और रोजगार आपको कौशल से युक्त करती है। आज हमारे शिक्षण संस्थान बेरोजगारों को पैदा करने के फैक्ट्री बन गए हैं। इसके लिए हमें शिक्षा व्यवस्था को सुधारना होगा। तभी रोजगार का सवाल हल हो पायेगा। गाँधी के बुनियादी तालीम में कौशल पर जोर दिया गया है। ऐसे में हमें भी कौशल पर जोर देकर रोजगार को पैदा करने की कोशिश करनी चाहिए।
गाँधी के सपनों का भारत पर चित्रकला प्रतियोगिता
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन ‘गांधी के सपनों का भारत’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता और ‘राष्ट्रपिता’ विषय पर कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ राजेश गिरि ने विजेताओं को पुरस्कृत किया। प्रथम पुरस्कार राजधानी कॉलेज सनाहल , द्वितीय पुरस्कार पीजीडीएवी कॉलेज के संजोली कानोडिया और तृतीय पुरस्कार एसपीएम कॉलेज की अनुष्का को मिला। कार्यक्रम के अंत में हेमंत द्वारा रचित नाटक “दोस्त मोहनदास” का मंचन त्र्यम्बकम ने किया।

