इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। किसी भी महापुरुष को समझने के लिए दो महत्त्वपूर्ण चीजों की ज़रूरत होती है उसकी कमजोरी और उसकी ताकत। इन दोनों को जब हम बारीकी से समझने लगते हैं तो हम उनके ताकतवर पक्ष प्रेम के आगोश में समा जाते हैं। यही उनकी ताकत है। आजकल हम जिस तरह गाँधी को याद कर रहे हैं उसमें सरकारी कार्यक्रमों से इतर असरकारी कार्यक्रम भी हो रहे हैं। निश्चित रूप से यह दूसरे तरह के कार्यक्रम ही वास्तव में असरकारी कार्यक्रम होंगे।
यह बात युवा गाँधीवादी विचारक एवं कार्यकर्ता श्री पराग मांदले (नासिक) ने ओटला तथा मप्र हिन्दी साहित्य सम्मलेन के संयुक्त आयोजन में कही। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हमारा देश व्यक्ति पूजक है। इसलिए हम गाँधी को भी एक व्यक्ति की तरह देखते हैं न कि विचार की तरह। इससे भी ज़्यादा महत्त्वपूर्ण जो बात गाँधी में थी कि वे निरंतर विकासशील व्यक्ति थे। वे बचपन से लेकर अंत तक अपने को बदलते रहे।
अहिंसा से जीता जा सकता है पूरी मानवता को : वरिष्ठ गांधीवादी चिन्तक एवं सर्वोदयी कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र ने कहा कि गाँधी एक वैश्विक महामानव हैं वे एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन पर पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा किताबें लिखी गई हैं। मानव सभ्यता के सबसे हिंसक समय में उन्होंने अहिंसा के अपने सिद्धांत के जरिये हिंदुस्तान को आज़ादी दिलाने में अहम् भूमिका निभाई. वे अपनी इस बात पर अडिग थे कि अहिंसा ही वह हथियार है जिसके जरिये पूरी मानवता को जीता जा सकता है।
गांधी प्रकाश स्तम्भ की तरह : कार्यक्रम का सञ्चालन करते हुए श्री राजेश सक्सेना ने कहा कि उदार मानवता के सभी सभ्य सिद्धांत गाँधी में अपनी गति पाते हैं, दो शताब्दियों से गाँधी हमारे लिए और दुनिया के लिए भी एक प्रकाश स्तम्भ की तरह हैं। उद्बोधन के पश्चात् श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर उपस्थित अतिथियों ने दिए. चित्रकार पंकज दीक्षित की गाँधी पर केंद्रित पोस्टर प्रदर्शनी के साथ पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई.
कार्यक्रम में विद्यार्थियों सहित वरिष्ठ कवि नरेन्द्र जैन, नीलोत्पल, श्रीमती सरोज मिश्र, बीना स्वामी, वैष्णवी स्वामी, प्रकाश कान्त, विक्रम सिंह गोहिल, ओंकारेश्वर गहलोद, एसएम त्रिवेदी, एसएन सोनी, अजीज रोशन तथा यूएस नागर रेखा उपाध्याय, छाया गाँधी, लीला राठौर, संजीवनी कान्त, शोभा सिंगणे, कृष्णा तंवर, नीलू सक्सेना, इंदिरा पटेल, कविता जोशी, निहारिका देशमुख, अमेय कान्त, श्रीकांत तेलंग, पंकज पालया, बद्रीलाल पटेल, कमल सूर्यवंशी, कृष्ण पटेल, पी.एन.तिवारी, मनीष कुमावत, केदार मंडलोई, महेश पटेल, संदीप नाईक, दिनेश पटेल, मेहरबान सिंह, वैभव देशमुख, बहादुर पटेल आदि उपस्थित थे। आभार ज्योति देशमुख ने माना।

