डॉ. जावेद अहमद शाह खान, इंदौर स्टूडियो। माई मंगेशकर हाल में संस्था ने इंदूर मराठी समाज के सहयोग से “मन मोरा बांवरा” कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उत्कर्ष संस्था ने स्व. गायक गायक मुहम्मद रफ़ी की याद में ‘उत्कर्ष’ संगीत प्रस्तुति दी। मुख्य स्वर राजेंद्र गलगले,रूपक बुंदेला और मधुमुकेश खंडेलवाल रहे। क्लासिकल रागों पर आधारित दो गानों में अनुभा खाडिलकर, नूपुर पंडित और वैशाली चौहान ने अपनी आवाज़ें दी। उत्कर्ष के इस कार्यक्रम की दर्शकों ने दिल से सराहना की।
‘सुहानी रात ढल चुकी न जाने तुम… ‘हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले…’मैंने शायद तुम्हें पहले भी कहीं…मस्ती भरे गीतों में ‘घूँघरवा मोरा छनन छनन…’आए हैं दूर से मिलने हुज़ूर से… के अलावा ‘ रमैय्या वस्ता वैय्या…’ दुःख भरे दिन बीते रे भैय्या… जैसे गीतों में कोरस का कमाल दिखा जिसे सोनम व्यास,राशि सोलंकी,जान्हवी मुद्रिस,और आकृति अंतर्वेदी ने तालबद्ध तरीके से निभाया। संगीत संयोजन प्रकाश खानवलकर, बैंजो अभिजीत गौड़, की-बोर्ड संग-संगति हेमेंद्र महावर तबला , प्रकाश घोडगांवकर ऑक्टोपैड ,योगेश्वर कान्हेरे गिटार ,सुधीर कोरान्ने ढोलक और अक्षय चिखलीकर की बोर्ड एवं हारमोनियम पर थे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मेघा खानवलकर ने किया।
संस्था उत्कर्ष अपना उत्कृष्ट देने में अपना कोई जवाब नहीं रखती है। मोहम्मद रफ़ी के लिए संस्था चलाने वालों की दीवानगी इस बात से भी साबित है की संस्था लंबे समय से रफी अवार्ड शहर में संगीत से जुडी हस्तियों को देते रहें हैं। अब लता मंगेशकर के नाम भी एक अवार्ड की घोषणा की गयी है। उनके रफी की पुण्यतिथि के कार्यक्रम का बेसब्री से इंतज़ार होता है।
इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम पर सुनिये किसी महिला गायिका मृणाल की आवाज़ में मुहम्मद रफ़ी के यादगार गीत नान स्टॉप – https://www.youtube.com/watch?v=kViF4MI7tX4

