इंदौर स्टूडियो, कला प्रतिनिधि। दस अक्टूबर को गजल सम्राट जगजीत सिंह की पुण्य तिथि के अवसर पर श्रुति संवाद और अभिनव कला समाज के संयुक्त तत्वधान में संगीतकार अरविंद अग्निहोत्री और नृत्य गुरु सविता गोडबोले को समर्पित एक सुरीली ग़ज़ल संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भरत शर्मा (सदस्य संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) थे। उन्होंने कहा कि ना केवल ग़ज़ल गायिकी ही नहीं फिल्म संगीत में भी जगजीत सिंह जी और भूपेन्द्र सिंह जी का योगदान अविस्मरणीय है। आपकी ग़ायन शैली और गीत,ग़ज़ल का चुनाव हर आम और खास संगीतप्रेमी के भाव और मनःस्थिति का पर्याय बन जाता है।
संतोष अग्निहोत्री ने पेश की जगजीत सिंह की चुनिंदा ग़ज़लें: कार्यक्रम में संतोष अग्निहोत्री ने जगजीत सिंह की चुनिंदा ग़ज़लें पेश की। इसके साथ ही हाल ही में हमसे विदा हुए सुकून भरी गायकी के हुनरमंद कलाकार भूपिंदर सिंह को याद करते हुए उनकी भी चुनिंदा फिल्मी रचनाएं पेश की। कार्यक्रम का आरंभ भक्ति रचना… हे गोविन्द ही गोपाल… से हुआ। उसके बाद…बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी….अपनी मर्जी से कहां अपने सफर के हम है…एक अकेला इस शहर में…. दिल ढूंढता है फिर वही फुरसत के रात दिन….किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है… हुजूर इस कदर भी न इतरा के चलिए..सहित कई मशहूर गीत और गजलों से महफिल को रोशन किया गया।…जैसी मशहूर ग़ज़लें सुनाई। समापन,चिट्ठी न कोई संदेश… और नाम गुम जाएगा… गीतों से हुआ।
कार्यक्रम का संचालन विद्याधर मुले ने किया। तबले पर लोकेश उपाध्याय, की बोर्ड पर हर्षद शेवगांवकर , गिटार वादन के साथ संगीत संयोजन विकास जैन ने किया। ऑक्टोपैड पर थे जयंत अकोदिया। कार्यक्रम से पूर्व अतिथियों का स्वागत रोहित अग्निहोत्री, विश्वास पुरकर, बालकृष्ण सनेचा व सतीश फाल्के ने किया। यहाँ सुनिये संतोष अग्निहोत्री की गाई और कंपोज़ की एक ग़ज़ल वीडियो – ज़िंदगी से बड़ी कोई सज़ा नहीं।










