शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम।‘ मैंने आम आदमी की कहानी चूहों के माध्यम से कहने की कोशिश की है। यह बताने की कोशिश की है कि ग़रीब आदमी का जीवन चूहों से भी बदतर है।‘ हाल ही में दिल्ली मेंआयोजित भारत रंग महोत्सव में खेले गए नाटक –‘हारूस-मारूस’ के प्रदर्शन के बाद नाटक के लेखक मुकेश नेमा ने यह बात कही। वे इंदौर स्टुडियो से चर्चा कर रहे थे। देखिये वीडियो। इंदौर के इस लेखक ने कहा, ‘अपना हक़ मांगना भी आज भीख मांगने जैसा लगने लगा है।‘
भारंगम में हुआ दसवां शो : मुकेश ने बताया, यह नाटक बीइंग एसोसिएशन और संहिता मंच की साझा पेशकश है। इसके नौ शो पहले हो चुके हैं, भारत रंग महोत्सव,दिल्ली में इसका दसवां शो हुआ। यह हमारे लिये बड़ी बात है। नाटक का नर्देशन रसिका अगाशे ने किया है। वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से ही प्रशिक्षित हैं। उन्होंने बताया, ‘आमोद भट्ट ने नाटक का संगीत दिया है। लाजवाब गीत कंपोज़ किये हैं, जितने अच्छे गाने हमने लिखे नहीं है, उससे बढ़कर उन्होंने धुनें बनाई है। उनके संगीत ने शब्दों में जान डाल दी है।
आपको बता दें, मुकेश एक अरसे से मुंबई में टीवी धारावाहिकों के लिये लेखन कर रहे हैं, उन्होंने कहा, इस नाटक के लेखन से उन्हें संतुष्टि मिली है और वे चाहते हैं ज़्यादा से ज़्यादा शहरों में इस नाटक के प्रदर्शन हों और दर्शक इसे देखें।‘

