कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। प्रसिद्ध गीतकार और संवेदनशील कवि गुलज़ार के जन्मदिन के उपलक्ष्य में इंदौर की फिज़ाओं में उनके गीतों की खुशबू घुली। ‘स्वरदा’ संस्था द्वारा आयोजित ‘गुलज़ारनामा’ कार्यक्रम दर्शकों को साहित्य और संगीत के एक ऐसे सफर पर ले गया, जहाँ हर शब्द एक नई कहानी सुनाता है।
संगीतमय स्वराजंलि का अनूठा आयोजन:
18 अगस्त को इंदौर के जाल सभागृह में आयोजित ‘गुलज़ारनामा’ एक संगीतमय कार्यक्रम हुआ, जिसमें गुलज़ार के जन्मदिन को यादगार बनाया गया। इस शाम में 15 प्रतिभावान कलाकारों ने गुलज़ार की लेखनी के विविध रंगों को संगीत के माध्यम से जीवंत किया। यह कार्यक्रम केवल गीतों की प्रस्तुति नहीं, बल्कि गुलज़ार की संवेदनशीलता और उनकी कल्पनाशीलता को एक भावभीनी स्वरांजलि दी।
कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम में शामिल कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज़ से गुलज़ार के गीतों को जीवंत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन संगीतमय प्रस्तुतियों में ‘बीती ना’ को सपना और उदय ने, ‘नाम गुम’ को मेघा और हेमंत ने, ‘तुम आ गए हो’ को किरण और संजय ने तथा ‘तेरे बिना ज़िंदगी से’ को सोनाली और रवि ने प्रस्तुत किया। इसके साथ ही, ‘आँखों में हमने’ को नंदिनी और अजीत ने, ‘थोड़ी सी ज़मी’ को माला और योगेश ने, ‘मौसम मौसम’ को नीता और संदीप ने और ‘दबे लबों से’ को सपना और प्रीति ने अपनी भावपूर्ण आवाज़ में सजाया।
लोकप्रिय गीतों का इंद्रधनुषी संगम:
कार्यक्रम की शुरुआत ‘हमको मन की शक्ति देना’ और ‘गंगा आए कहाँ से’ के साथ हुई। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता गुलज़ार के गीतों का विशाल चयन था। ‘जंगल-जंगल बात चली है’, ‘लकड़ी की काठी’, और ‘कजरारे-कजरारे’ जैसे गीतों ने कार्यक्रम में ऊर्जा भर दी। कुल 51 गीतों को आठ अलग-अलग स्लॉट्स में बेहद खूबसूरती से पिरोया गया था, जिसने पूरे सभागृह को अंत तक बांधे रखा।
सफर का सुखद समापन
गुलज़ार के गीतों की इस संगीतमय यात्रा ने श्रोताओं को यादों के गलियारों में सैर कराई। अंत में ‘जय हो’ और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का गरिमामयी समापन हुआ। यह शाम इंदौर के संगीत प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बनकर रही। आगे पढ़िये – कैसा है अन्विति का नया कहानी विशेषांक –https://indorestudio.com/anviti-patrika-kahani-visheshank-rajendra-dani/
इंदौर की फिज़ाओं में घुली ग़ुलज़ार के गीतों की ख़ुशबू
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