Wednesday, May 20, 2026
Homeकला खबरेंगुमनाम नायकों पर हों नाटक - केंद्रीय संस्कृति मंत्री अर्जुन राम मेघवाल

गुमनाम नायकों पर हों नाटक – केंद्रीय संस्कृति मंत्री अर्जुन राम मेघवाल

शकील अख़्तर,इंदौर स्टूडियो। ‘किसी एक महापुरूष या उनके समकक्षों पर ही नहीं, आज़ादी के अमृत काल में दुर्गा भाभी,मानगढ़ धाम और बिठूर के गंगू मेहतर जैसे ‘अनसंग हीरोज़’ या गुमनाम नायकों पर केंद्रित नाटकों का भी मंचन होना चाहिये’। केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह बात 22 वें भारत रंग महोत्सव (Bharat Rang Mahotsav 2023) में कही। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama) द्वारा कमानी ऑडिटोरियम में आयोजित इस महोत्सव का उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। पहले दिन बंगला भाषा के करीब 50 साल से चल रहे नाटक ‘जगन्नाथ’ का प्रभावशाली मंचन हुआ। समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के चेयरमैन परेश रावल, पूर्व निदेशक रामगोपाल बजाज,केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की सदस्य वाणी त्रिपाठी टिक्कू और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक प्रो.रमेश चंद्र गौड़ मौजूद थे।इतिहास में जिन्हें नहीं मिला स्थान: समारोह के मुख्य अतिथि श्री मेघवाल ने कहा, ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है कि जो अनसंग हीरोज़ या गुमनाम नायक हैं जिन्हें इतिहास में वो स्थान नहीं मिला जिसके वे हक़दार रहे। उनपर भी नाटक होना चाहिये। उनपर या तो लिखा नहीं गया या लिखा गया तो बहुत कम। परंतु आज़ादी के आंदोलन में उनका भी योगदान किसी से कम नहीं है। उदाहरण के लिये हम ‘दुर्गा भाभी’ जैसी महिला क्रांतिकारी को लें। उन्हें कम ही लोग जानते हैं। उनको लेकर भी नाटक होना चाहिये। उन्होंने क्रांतिकारियों की स्वतंत्रता संग्राम के मुश्किल दिनों में हर संभव सेवा और सहायता की। उनके पिता की दी हुई राशि तक शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर जैसे महान् क्रांतिकारियों की सेवा में लगा दी।आदिवासियों के बलिदान का हो स्मरण: संस्कृति मंत्री ने कहा, ‘मानगढ़ धाम’ के उन पंद्रह सौ आदिवासियों के बलिदान का मंच पर स्मरण होना चाहिये जिनका 1857 में अंग्रेज़ों ने नरसंहार किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2022 को मानवेंद्र धाम में जाकर खुद उन शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धाजंलि अर्पित की थी। इस ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया था। एक और उदाहरण बिठूर के महावीर और बलिदानी गंगू मेहतर का है जिन्होंने दो सौ अंग्रेज़ों को मार गिराया था। इस तरह उन्होंने अत्याचारी ब्रिटिश राज के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी थी। वे एक पहलवान थे। हमें उनके योगदान को भी नाटकों के माध्यम से याद करना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा, वे ख़ुद भी चूँकि एक कलाकार रहे हैं। वीर अमर सिंह राठौर की अमर कथा को लेकर रम्मत शैली के नाटकों से जुड़े रहे हैं। अगर अवसर मिले तो वे भी रम्मत कलाकार के रूप में काम करने को तैयार हैं।बढ़ती रहे संस्कृति को मिलने वाली राशि: भारत रंग महोत्सव के प्रणेता रानावि के पूर्व निदेशक पद्मश्री रामगोपाल बजाज ने कहा, ‘कला और संस्कृति के लिये दिये जाने वाले बजट में हर साल बढ़ौतरी होना चाहिये। यह काम आगे बढ़ते रहना चाहिये। अगर बचत नहीं है तो सरकार ‘संस्कृति कर’ लगाकर यह काम कर सकती हैं। नाटक को हम पाँचवा वेद कहते हैं। हमने शिवजी को नटराज की उपाधि से पुकारा है। तब यह कैसे हो सकता है कि कॉलोनी,नगर,एयरपोर्ट और हज़ारों किलोमीटर लंबी सड़कें तो बनें। मगर रंगशालायें ना बनें। रंगशाला या कला संस्कृति के केंद्र किसी अस्पताल की तरह ज़रूरी हैं। ये हमारे समाज और मानस के संस्कार स्थल हैं। भारत रंग महोत्सव और बाल रंग संगम चलते रहना चाहिये। सिर्फ 80 नहीं सैकड़ों नाटक होना चाहिये। अगर ऐसा नहीं होता तब अमृत काल का कोई अर्थ नहीं रह जायेगा। जब ऐसा होने लगेगा, तब वह भारत की संस्कृति का एक बड़ा चरण होगा। वास्तविक आत्मा की सजगता तब होगी। इस अवसर पूर्व निदेशक ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। कहा वे नाटक देखने आया करते थे।50 साल से ‘रंगकर्म’ की तपस्या: रानावि के चेयरमैन और प्रख्यात अभिनेता परेश रावल ने कहा, ‘ मैं भाग्यशाली हूँ कि मैं न तो कभी एनएसडी में पढ़ने आया, ना पढ़ाने आया और आज मैं यहाँ का चेयरमैन बनकर बैठा हूँ। परंतु ऐसा नहीं है कि इसके पीछे मेरी कोई सेवा या तपस्या नहीं। 50 साल से मैं प्रोफेशनल थियेटर कर रहा हूँ, मुझे इस विधा की बारीकियों के बारे में पता है। उसी वजह से मैं यहाँ पर हूँ। बेशक हमें अभी बहुत कुछ करना है। हम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। काफी कठिनाइयाँ हैं। उसके बावजूद हम आगे बढ़ेंगे। मेरा विश्वास है और इसका मैं भरोसा दिलाता हूँ’। उन्होंने दर्शकों से कहा, ‘आज मेरा सौभाग्य है कि मैं आपके साथ बंगाली नाटक ‘जगन्नाथ’ देख रहा हूँ। मैंने यह नाटक मुंबई में सत्तर के दशक में देखा था। तब से यह नाटक मेरे दिलो दिमाग़ में था। बाद में चाहकर भी मुझे इस नाटक को देखने का मौका नहीं मिल सका। मगर जब भारत रंग महोत्सव के लिये नाटकों का चयन हो रहा था। तब मैंने सुझाव के तौर पर यह जानने की कोशिश कि क्या हम इस नाटक को बुला सकते हैं। बर्शते यह अभी भी चल रहा हो। हमें सफलता मिली। हम शुभारंभ के लिये इस नाटक को निमंत्रित कर पायें हैं’।विभिन्न भाषाओं के नाटकों का समागम: सीबीएफसी की सदस्य और एनएसडी सोसायटी से जुड़ी वीणा त्रिपाठी टिक्कू ने कहा- ‘भारत रंग महोत्सव का समारोह एक समागम है विविध भाषाओं और रंग समूहों के अलग-अलग तरह के नाटकों का। यह महोत्सव पहले जैसा सुंदर,प्रखर और मुखर है। 22 साल पहले नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक रामगोपाल बजाज जी ने इसका आगाज़ किया था। उन्हें हम एनएसडी में लाड़ से बज्जू भाई कहा करते थे। उन्होंने ही थियेटर इन एजुकेशन (TIE) का नामकरण संस्कार रंग टोली किया था। उस समय चिंता व्यक्त की गई थी कि आख़िर इतने सारे नाटकों को एक साथ कैसे समायोजित किया जा सकेगा? दिल्ली में इसके टिकट तक नहीं बिक सकेंगे। परंतु आज इस सभागार को देखकर कह सकती हूँ, दर्शक ही हैं जिनकी वजह से यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा और आज फिर यह आयोजन इतनी सफल तरीके से हो रहा है। कामायनी की पंक्तियां सुनाते उन्होंने कहा, मेरी कामना यही है कि भारंगम की यह यात्रा चलती रहे। रंगकर्म आगे बढ़ता रहे’।दो साल के बाद आया यह शुभ दिन: प्रारंभ में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक प्रो.रमेश चंद्र गौड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। कलाकारों और दर्शकों की हिस्सेदारी को लेकर आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने 22 वें भारत रंग महोत्सव की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने कहा-‘यह शुभ दिन दो साल के कोरोना काल बाद आया है। कोरोना का समय कला और कलाकारों के लिये त्रासदी भरा समय रहा है। दो साल बाद यह महत्वपूर्ण और शुभ दिन आया है। यह महोत्सव 26 फरवरी तक दिल्‍ली सहित देश के 10 शहरों में आयोजित हो रहा है। इस बार यह जयपुर,भोपाल,राँची के साथ ही गुवाहाटी,नासिक,राजमुद्री,जम्मू,केवड़िया और श्रीनगर में भी होगा। आयोजन में 18 राज्यों के 16 भाषाओं में चयनित, 80 नाटकों का मंचन होगा। इसमें से 33 नाटक दिल्‍ली में, 6-6 नाटक जयपुर, भोपाल, रांची, गुवाहटी, नासिक और केवडि़या में मंचित होंगे। राजमुद्री में 5 तथा जम्‍मू और श्रीनगर में 3-3 नाटकों का मंचन होगा। दिल्‍ली में 10 लोक नाटकों का मंचन भी होगा। इनमें से 6 नाटक खुले लॉन में प्रदर्शित होंगे। इसके अलावा रंगमंच से संबंधित पुस्‍तकों का विमोचन और परिचर्चाओं आदि का आयोजन होगा। समारोह में भारंगम के ब्रोशर का भी विमोचन हुआ।नाटक ‘जगन्नाथ’ के प्रभावशाली मंचन: औपचारिक रस्म अदायगी के बाद भारंगम का आगाज़ नाटक ‘जगन्नाथ’ के प्रभावशाली मंचन से हुआ। यह नाटक कोलकाता के ‘थिएटर ग्रुप चेतना’ की प्रस्तुति है। नाटक के वयोवृद्ध लेखक और निर्देशन अरुण मुखर्जी हैं। करीब 50 साल पहले उन्होंने इस नाटक के मंचनों की शुरूआत की थी। वे भी नाटक के मंचन के दौरान मौजूद रहे। अरुण मुखर्जी का यह नाटक दरअसल, लू शुन की एक चीनी कहानी से प्रेरित है। नाटक में जगन्नाथ की मुख्य भूमिका सुजान मुखर्जी निभाते हैं। वे इस किरदार को अपने ज़बरदस्त अभिनय से जीवंत कर देते हैं। वे नाटक की कहानी केवल शारीरिक भाव-भंगिमाओं से ही मंच पर अभिनीत नहीं करते, बल्कि वे इस किरदार की आत्मा में प्रवेश कर इसे मनौवैज्ञानिक धरातल पर भी दर्शकों के सामने ला खड़ा करते हैं। एक निर्धन किसान की कहानी: नाटक एक साधारण किसान की कहानी कहता है, लेकिन इस प्रक्रिया में उन सूक्ष्म तरीकों की जांच और खुलासा करता है जिसमें सदियों से एक निर्धन किसान किस तरह से शोषण, अत्याचारों और प्रताड़नाओं का शिकार बनता आया है। यह नाटक गरीबी और रूढ़िवादी हठधर्मिता, वर्ग और वर्ग की राजनीति को लेकर दर्शकों की समझ को और भी गहरा करता है। नाटक में सभी कलाकारों ने बेहद प्रशंसनीय अभिनय किया है। प्रकाश,ध्वनि,प्रतीकात्मक मंच के साथ ही ग्रामीण कलाकारों की रूप सज्जा सीधे नाटक के ग्रामीण परिदृश्य से जोड़ देती है। नाटक में सुजान मुखर्जी के साथ सुमन मुखोप्धाय,सुप्रिया दत्ता,स्वपन रॉय,तरूण भट्टाचार्य,अमिताभ घोष,सुसोवन गुहा, सुमन नंदी,दयाद मुखर्जी,उत्पल बंदोपाध्याय,देबजीत नाग,समीर चटर्जी,विश्वजीत नायक,स्नेहाशुं विश्वास, निवेदिता मुखर्जी,संगीता पॉल, अनिंदिता समद्दर,रजत नारायण भट्टाचार्य, देबाशीष नस्कर, सायन मांझी ने अभिनय किया है। नेपथ्य के कलाकारों में सौमेन चक्रवर्ती,सोमनाथ चक्रवर्ती,अयोन घोष,ऑस्टो पात्रा, अधीर गाँगुली शामिल रहे। आगे पढ़िये –
https://indorestudio.com/kevadia-me-joint-repertory-company-banane-par-hogi-charcha-prof-ramesh-chandra-gaur/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास