‘अपने गुरू से अच्छे रिश्ते बनाएं, वे आपके जीवन की आधारशिला रखते हैं’।…. ‘मेरा सपना है पूरी दुनिया में हमारा भारत, सबसे महान् देश तो बने ही, हम दुनिया के सबसे अच्छे नागरिक बनकर दिखायें’। पद्मभूषण उस्ताद ज़ाकिर हुसैन और कम्पयूटर साइंटिस्ट पद्मभूषण डॉ. विजय पी.भटकर ने यह महत्वपूर्ण बातें ग्वालियर की आईटीएम यूनिवर्सिटी में कहीं। अपने-अपने क्षेत्र के दोनों दिग्गज, यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। कला और विज्ञान की दोनों हस्तियों को यूनिवर्सिटी में मानद उपाधियाँ भी प्रदान की गई। डॉ.भटकर को डीएससी और उस्ताद ज़ाकिर हुसैन को डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यूनिवर्सिटी का यह वार्षिक दीक्षांत समारोह था। कला और संस्कृति को मान देने वाली इस यूनिवर्सिटी में गत दिनों हुए इस आयोजन पर पढ़िये सुभाष अरोरा की विशेष रिपोर्ट, इनपुट अनिल माथुर। – इंदौर स्टूडियो।
अच्छा स्टूडेंट बनने की ज़रूरत: म्यूज़िक प्रॉड्यूसर,कम्पोज़र और मशहूर तबला नवाज़ उस्ताद ज़ाकिर हुसैन ने कहा, ‘मेरे पिता उस्ताद अल्लारक्खा ने मुझे तालीम देते वक्त एक मंत्र दिया था। बेटा कभी मास्टर बनने की कोशिश नहीं करता, वह एक अच्छा स्टुडेंट बनने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा, ‘इसी मंत्र के अनुरूप आप छात्रों से मेरा अनुरोध है कि आप अपने गुरू से अच्छे से अच्छा रिश्ता बनायें क्योंकि वो आपके जीवन की आधारशिला रखते हैं। आप उनके सिखाने का इंतज़ार न करें बल्कि आप उन्हें इस तरह से प्रभावित करें कि वो आपको सिखाने के लिये प्रेरित हों। ज़ाकिर हुसैन ने कहा, ‘ज़िंदगी क़दम बढ़ाकर चलने के लिये है। रूकने के लिये नहीं। अगर आप ख़ुद पर विश्वास करते हैं तो आप जो चाहें बन सकते हैं, सबकुछ हासिल कर सकते हैं।’
भारत का हो नया सूर्योदय: कार्यक्रम में परम कंप्यूटर के निर्माता और कम्पयूटर साइंटिस्ट पद्मभूषण डॉ. विजय पी.भटकर ने कहा, ‘हमारे नौजवान अगर आज़ादी के इतिहास का गहराई से अध्ययन करेंगे तो पता चलेगा कि इस आज़ादी के लिये हमें कितनी बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी है। भविष्य में जब हम आज़ादी पाने के सौवां साल सेलिब्रेट करेंगे, तब हमारे और भी बड़े सपने होंगे। उस नज़रिये से मेरा आज का सपना है कि भारत का नया सूर्योदय हो। हमारा भारत पूरी दुनिया में सबसे महान् देश तो बने ही, हम भारत के लोग भी दुनिया के सबसे अच्छे नागरिक बनकर दिखाएं। एक ऐसा देश जहाँ बेहतर आइडियाज़ हो, इनोवेशन हों। हम ख़ुदको नई तरह से पुर्नस्थापित कर सकें। अपनी कला और संस्कृति के साथ हम उस नये युग का सूत्रपात करें’।
शिक्षा रास्ता है और विद्या मंज़िल: अपने आशीर्वचन में प्रख्यात शायर और आलोचक शीन काफ निज़ाम ने कहा-‘ये सिर्फ दीक्षांत समारोह नहीं आप जैसे शिक्षित नौजवानों का नया शुभारंभ है। शिक्षा महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा खुद को जानने और समझने का सबसे ज़रूरी माध्यम है। शिक्षा और विद्या एक नहीं है, शिक्षा रास्ता है विद्या मंज़िल। रास्ता बहुत लंबा है। शिक्षा चलती है। परंतु विद्या पाना और पहचानना है। हमारे जो शिक्षक हैं वो घड़े का पानी हैं और हमारे उस्ताद कुएं का वो जल हैं जो हर वक्त बहता रहता है। जिसका पानी कई स्त्रोतों से आता है। हमें यह सीखने जानने के साथ अपनी संस्कृति, अपनी तहज़ीब की भी हिफ़ाज़त करना है’।
कला,विज्ञान और साहित्य का संगम : समारोह में आईटीएम यूनविर्सिटी की चांसलर रूचि सिंह चौहान ने कहा, ‘हमारा दीक्षांत समारोह कला,विज्ञान और साहित्य का संगम है। हमारा विज्ञान, कला के साथ जुड़ा है। वैज्ञानिक मस्तिष्क भी किसी भी कला को सीखने का बेहतरीन ज़रिया है। कला हमारी ज़िदंगी को अर्थवान और प्रसन्न रखने के लिये ज़रूरी है। कला का साथ उतना ही ज़रूरी है जितना की हमारी डिग्री। आप शास्त्रीय संगीत सुनें, यह संगीत आपको वो ऐसा मन-मस्तिष्क देगा कि आप दुनिया को और बेहतर समझ पायेंगे। एक और बात ध्यान में रखना ज़रूरी है, हमें दूसरों के हिसाब से नहीं ख़ुद खोज कर जीवन में आगे बढ़ना है।
कला,संस्कृति आईटीएम के मूल में मौजूद: आईटीएम यूनिवर्सिटी के प्रो.चांसलर ड़ॉ दौलत सिंह चौहान ने अपने स्वागत भाषण में कहा- ‘ये दीक्षांत विशेष नहीं विशिष्ट है। उन विद्याओं के सर्वश्रेष्ठ व्यक्तियों के बीच है जो इस संस्था के मूल में मौजूद है। हमारे स्टूडेंट बतौर प्रोफेशनलिस्ट सिर्फ बेहतर ही नहीं होते बल्कि अन्य संस्थाओं से अलग होते हैं, क्योंकि यहाँ पढ़ाई के साथ कला,संस्कृति से भी उन्हें जोड़ा जाता है। जो विद्यार्थियों को बेहतर इंसान बनाने में मदद करते हैं। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती चंचल मेघानी और जयंत तोमर ने किया।
शंख और तुरही की ध्वनि से स्वागत: समारोह की शुरूआत एकेडमिक प्रोसेशन से हुई। शंख और तुरही की ध्वनि के बीच अतिथियों का मंच पर आगमन हुआ। इस दौरान आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के फाउंडर चांसलर रमाशंकर सिंह भी विशेष रूप से मौजूद थे। मंच पर अतिथियों के आसीन होते ही रजिस्ट्रार डॉ.ओमवीर सिंह ने चांसलर रूचि सिंह चौहान से दीक्षांत समारोह के प्रारंभ करने की घोषणा के लिये अनुरोध किया। इसके बाद प्रो चांसलर डॉ. दौलत सिंह ने स्वागत भाषण दिया। तत्पश्चात चांसलर रूचि सिंह चौहान ने परम सुपर कंप्यूटर के निर्माता डॉ. विजय पी.भटकर को डीएससी की उपाधि और प्रखायत तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन को डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर वाइस चांसलर डॉ.एसके नारायण खेड़कर ने शीन काफ निज़ाम का स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। अंत में डीन, एकेडमिक्स डॉ. सोनिया जौहरी ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। (इस रिपोर्ट के लेखक श्री सुभाष अरोरा ग्वालियर के ख्यात मूर्तिकार और कला समीक्षक हैं।) आगे पढ़िये –
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गुरू से अच्छे रिश्ते बनाएं, गुरू जीवन का आधार: उस्ताद ज़ाकिर हुसैन
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