Saturday, October 17, 2026
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ग्वालियर नाट्य महोत्सव में नाटक ‘रणभूमि की नायिका’

इंदौर स्टूडियो, कला प्रतिनिधि। ग्वालियर में विमेंस नाट्य संस्था द्वारा आयोजित ‘ग्वालियर नाट्य महोत्सव’ का आज तीसरा और अंतिम दिन है। आज भोपाल के कलाकार नाटक ‘रणभूमि की नायिका’ का मंचन करेंगे। इसका निर्देशन विभा श्रीवास्तव ने किया है। इससे ठीक पहले शाम साढ़े छह बजे कृतेन्द्र सिंह और उनके साथी कलाकार बुंदेली लोकगीतों का कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। जबकि  दोपहर 3 बजे ‘रंगमंच और तकनीक’ विषय पर रंग संवाद होगा। आयोजन के दूसरे दिन दो नाटकों क्रमश: ‘गांधारी’ और ‘बादशाहत का खात्मा’ का मंचन और ‘बदलता रंगमंच’ विषय पर रंग संवाद का कार्यक्रम हुआ। महोत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली और संस्कृति संचालनालय, भोपाल के सहयोग से हो रहा है।महोत्सव का पहला दिन: तीन दिवसीय यह महोत्सव टाउन हॉल में चल रहा है। पहले दिन महोत्सव का शुभारंभ नगर निगम के उपायुक्त शिशिर श्रीवास्तव ने दीप प्रज्जविलत कर किया। शुभारंभ के ठीक बाद नाटक ‘बरेली का स्वांग’ का मंचन हुआ। यह आयोजक रंग समूह विमेंस नाट्य संस्था की प्रस्तुति थी। नाटक का आलेख और निर्देशन संतोष पांडे ने किया है। निर्देशन सहयोग गीतांजलि गीत का था। इसके बाद अभ्युदय, दिल्ली के कलाकारों ने नाटक ‘टुटल एकटा’ का मंचन भी किया। इस नाटक का निर्देशन अभिषेक देवनारायण ने किया। पहले दिन ‘नाटक और संगीत’ विषय पर रंग संवाद भी हुआ। इसमें संतोष पांडे,पवन झा,डॉ.राजरानी शर्मा और अशोक सेंगर ने हिस्सा लिया। नाटक में दर्शकों की सराहनीय उपस्थिति रही। ज्ञातव्य है कि महोत्सव दर्शकों के लिये नि:शुल्क है।
महोत्सव का दूसरा दिन: महोत्सव के दूसरे दिन ‘गांधारी’ और ‘बादशाहत का खात्मा’ नाटक प्रस्तुत किये गये। गांधारी का निर्देशन नवीन सिंह गैरी ने किया है। लेखन सुमन केसरी का है। संभव रंगशाला की इस प्रस्तुति में कई नये प्रसंग कल्पित किए गए हैं। इनमें गांधारी का बचपन, गांधारी एवं धृतराष्ट्र में परिणय प्रसंग, गांधारी-भीष्म संवाद और  गांधारी का युयुत्सु के प्रति कोमल भाव और उसके विवेकशील मन जैसे दृश्य शामिल हैं। ‘बादशाहत का खात्मा’ मनोरमा थियेटर आर्ट की प्रस्तुति रही। इसका निर्देशन वैशाली मिश्रा सक्सेना ने किया है। नाटक की कहानी बेहद दिलचस्प है। इसमें एक लेखक और एक लड़की शामिल है। लड़की अपने फ़ोन से एक रांग नंबर डायल कर देती है जो लेखक के पास पहुँचता है। दोनों में बातें होती हैं और फिर प्यार हो जाता है। इसके बाद कहानी एक रोमांचक मोड़ पर पहुँच जाती है। मंचन के बाद वीमेंस नाट्य संस्था की सचिव गीतांजलि गीत ने निर्देशकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संचालन संदीप नागर ने किया। इससे पहले ‘बदलता रंगमंच’ विषय पर संवाद में प्रदीप दीक्षित,अशोक आनंद, राजेश पाल पुष्प और चारू चित्रा ने भाग लिया। संचालन विमल वर्मा ने किया।महोत्सव में आज तीसरे दिन के कार्यक्रम: महोत्सव का आज समापन दिवस है। आज तीसरे दिन शाम साढ़े छह बजे कृतेन्द्र सिंह और उनके कलाकार साथी बुंदेली लोकगीतों का कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद भोपाल की रंग सोशियो सोशल सोसाइटी के कलाकार ‘रणभूमि की नायिका’ नाटक की प्रस्तुति देंगे। इसका निर्देशन निर्देशन विभा श्रीवास्तव ने किया है।दोपहर तीन बजे रंगमंच और तकनीक विषय पर रंग संवाद का कार्यक्रम होगा। इसमें डॉ.हिमांशु द्विवेदी, संजय अरोरा, विभा श्रीवास्तव और रविंद्र जगताप, संजय सिंह जादौन चर्चा करेंगे।

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