Wednesday, May 20, 2026
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ग्वालियर में 30 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का 19 दिसंबर को समापन, नाटक ‘नसीबाँवाली’ का होगा मंचन

कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टुडियो। रविवार 19 दिसंबर को ग्वालियर के आईटीएम, सभागार में शाम साढ़े छह बजे नाटक ‘नसीबाँवाली’ का मंचन होगा। इसके साथ ही बीते 30 दिनों से जारी सर्वधर्म संगीत एवं कला महाविद्यालय और मेरा मंच सांस्कृतिक संस्था द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित नाट्य कार्यशाला का समापन हो जायेगा। इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में 20 नवोदित कलाकारों ने मुंबई के वरिष्ठ रंगकर्मी विभांशु वैभव से नाट्यकर्म का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान ही प्रस्तुति के रूप में राजिन्दर सिंह बेदी के उपन्यास पर आधारित नाटक नसीबाँवाली को तैयार किया गया। इसका निर्देशन  विभांशु वैभव ने ही किया है, सह निर्देशन गीताजंलि गीत का है।कार्यशाला की समन्वयक और रंगमंच अभिनेत्री गीताजंलि गीत ने नाटक के कथ्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नाटक ग्रामीण अंचल के एक परिवार की कहानी बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। यह परिवार आर्थिक संकट से गुज़र रहा है। पति मारा जा चुका है, परिवार में विधवा पत्नी का सम्मान नहीं है। सास गालियां देकर उसे घर से निकाल देना चाहती है लेकिन कस्बे की पंचायत अपनी आनबान के चलते उस विधवा का विवाह उसके देवर से करने के लिए मजबूर कर देती है। उस देवर का अपना प्रेम बलि चढ़ जाता है। कहानी अपने चरमोत्कर्ष पर जबर्दस्त मोड़ लेती है।स्त्री जीवन से जुड़ी विषमताओं की पड़ताल:
गीताजंलि गीत ने कहा, यह नाटक स्त्री जीवन से जुड़ी विषमताओं की एक पड़ताल है। रानो विपरीत परिस्थितियों में भी  अपनों के भले के लिए अनचाहे फैसले लेने को तैयार होती है। ये नाटक स्त्री के मानसिक द्वंद , भावना और कर्तव्य के बीच हो रहे टकराव को बड़ी रोचकता और संवेनशीलता के साथ उजागर करता है। नाटक को रानो की बेटी के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है, जिसमे एक बेटी अपनी भावनाओं से जूझती अपनी मां को परिभाषित करती है, बरसों पुराने लिखा गया उपन्यास आज भी समसामयिक है। गीताजंलि ने कहा, बेदी रचित साहित्य में जन-जीवन के संघर्ष, उनकी आशा-निराशा, मोह-भंग और अंदर-बाहर की विसंगतियों पर सशक्त रचनाएँ मिलती हैं। सही शब्दों का चुनाव और थोड़े में बहुत कुछ कह जाना बेदी की विशेषता थी। आपको बता दें सर्वधर्म संगीत एवं कला महाविद्यालय और मेरा मंच की यह साझा कार्यशाला 20 नवंबर को शुरू हुई थी। कार्यशाला में मध्यप्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र के मुंबई-ठाणे,यूपी-बिहार और झारखंड से आये प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया। कार्यशाला में मुंबई के प्रख्यात रंगकर्मी विभांशु वैभव ने प्रशिक्षणार्थियों को रंगकर्म के विविध पक्षों की जानकारी दी। संगीत नाटक अकादमी के अवार्ड से सम्मानित विभाशुं एक सशक्त अभिनेता,लेखक-निर्देशक हैं।

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