ग्वालियर, 28 अप्रैल 2018 (अजय जैन/प्रदीप गर्ग/ तस्वीरें: हृदय खत्री)। टीवी और फिल्म अभिनेता अरूण काटे पिछले 17 सालों से मुंबई में सक्रिय हैं लेकिन जब भी उन्हें वक्त मिलता है, वे ग्वालियर में अपने थिएटर ग्रुप-‘मास्क मैजिक’ के ज़रिये नाटकों के मंचन में जुट जाते हैं। पिछले तीन महीने से वे ग्वालियर में कोई 35 से अधिक कलाकारों के साथ तीन कॉमेडी नाटकों की तैयारी में जुटे थे। अब उन तीनों ही नाटकों का ‘वनमाला देवी स्मृति नाट्य समारोह’ में मंचन होने जा रहा है। आर्टिस्ट कंबाइन में तीनों नाटक 4 से 6 मई को शाम 7 बजे से होंगे। एक पत्रकार वार्ता में संस्था के संरक्षक और वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह समारोह संस्कृति संचानालय भोपाल और एसोसिएटशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जाने पहचाने अभिनेता, निर्देशक राजा बुंदेला होंगे। पत्रकार वार्ता में संस्था की अध्यक्ष विनीता काटे,भारती पवार,संजय कट्ठल भी मौजूद थे।
हास्य से भरपूर इन नाटकों के नाम हैं – हवा हवाई, ये फिल्म है ज़रा हटके और गज,फुट,इंच। तीनों ही नाटकों का निर्देशन अरूण काटे ने किया है। वे इनमें अभिनय करते भी नज़र आएंगे। ख़ास बात ये भी है कि नाटक ‘ये फिल्म है ज़रा हटके’ का लेखन सीनियर टीवी जर्नलिस्ट और राइटर शकील अख़्तर ने अरूण काटे के साथ मिलकर किया है। इंदौर के साथ वे ग्वालियर रंगमंच से जुड़े रहे हैं। इस नाटक के सभी गीत भी शकील अख़्तर ने लिखे हैं, जिसका संगीत आमोद भट्ट ने तैयार किया है। नाटक के मुंबई,ग्वालियर और गुजरात में पहले भी 6 शोज़ हो चुके हैं। नाट्य समारोह में शकील अख़्तर और आमोद भट्ट को भी आमंत्रित किया गया है।

अरूण काटे के मुताबिक, तीनों ही नाटकों में शहर के 35 से ज़्यादा नये-पुराने कलाकार हिस्सा लेंगे। सभी कलाकार इन मंचनों को लेकर बेहद उत्साहित हैं। अरूण ने कहा कि अपने शहर के कलाकारों के साथ काम करना उनके लिये हमेशा से दिलचस्प अनुभव रहा है। मुंबई से ज्यादा वे अपने शहर में थिेएटर के लिये काम करना चाहते हैं।
पत्रकार वार्ता में राकेश पाठक ने स्व. अभिनेत्री वनमाला का स्मरण किया। उन्होंने बताया, स्व. वनमाला का 25 मई 1915 को ग्वालियर के राजघराने में जन्म हुआ था। वे सिंधिया राजघराने में मंत्री रहे कर्नल रावबहादुर बापू साहेब पवार की बेटी थीं। उनके पिता ने वनमाला का पालन-पोषण राजकुमारों के बीच किया था । वनमाला घुड़सवारी और तीरंदाज़ी के साथ ही कथक, कथकली और मणिपुरी जैसी नृत्य विधाओं में माहिर थी। उन्होंने सोहराब मोदी की ‘सिकंदर’, वी शांताराम की ‘पर्वत पे अपना डेरा’ और वाडिया ब्रदर्स की ‘शरबती आँखें’ जैसी फिल्मों में काम किया था। फिल्म ‘
मुंबई से लौटने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन कला,शिक्षा और समाज सेवा के लिये समर्पित कर दिया था। बाद में उन्हें सुशीला बहन के नाम से जाना जाने लगा था। श्री स्वामी हरिदास कला संस्थान की स्थापना का श्रेय उन्हें ही जाता है। ग्वालियर में राव परिवार उनकी स्मृति में समय-समय पर आयोजन करता है। शहर का यह नाट्य समारोह भी अपनी इसी भावप्रवण और समाजसेवी अभिनेत्री के को समर्पित किया गया है।
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