कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘ग्वालियर,मध्यप्रदेश में 20 नवंबर से होने वाली एक महीने की नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लेने के लिये मध्यप्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र के मुंबई-ठाणे,यूपी-बिहार और झारखंड से भी कलाकार शामिल होने आ रहे हैं। अब तक 20 से अधिक कलाकार इस कार्यशाला में भाग लेने के लिये पंजीकरण करा चुके हैं। कार्यशाला की विशेष बात यह है कि इसका निर्देशन मुंबई के प्रख्यात रंगकर्मी विभांशु वैभव करने जा रहे हैं। वे एक सशक्त अभिनेता,लेखक-निर्देशक हैं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी का अवार्ड भी मिल चुका है।’ यह बात कार्यशाला की आयोजक और रंगमंच की जानी-पहचानी अभिनेत्री गीताजंलि गीत ने कही। उन्होंने कहा, ‘मैं समझती हूं ग्वालियर के लिये यह उपलब्धि की बात है कि हमारे शहर में रंगकर्म सीखने के लिये बाहर के कलाकार भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हम भी शहर के रंगकर्म को एक अलग स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।’
गीताजंलि ने बताया,’यह प्रस्तुति परक कार्यशाला पूरे एक महीने चलेगी। इसमें आवास और भोजन की भी व्यस्था होगी। इसके बावजूद हम कलाकारों से बहुत कम शुल्क ले रहे हैं। असल में हमारा मुख्य उद्देश्य रंगकर्म को बढ़ावा देना है। आपको बता दें, यह वर्कशॉप ग्वालियर में ‘मेरा मंच’ और ‘सर्वधर्म कला एवं संगीत महाविद्यालय’ के साझा सहयोग से आयोजित हो रही है। कार्यशाला को सर्वधर्म महाविद्यालय के प्रमुख डॉ अजय प्रताप सिंह चौहान ,डॉ करुणा सिंह चौहान, मध्यप्रदेश NGO परिषद अध्यक्ष डॉ प्रदीप कश्यप का विशेष सहयोग मिल रहा है। चूंकि कोरोना की तीसरी लहर के ख़तरा अभी बरकरार है। कई सावधानियां बरती जा रही हैं, लिहाज़ा कार्यशाला के लिये भी इसकी समुचित तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
गीताजंलि के अनुसार,’यह कार्यशाला इसलिये विशेष है क्योंकि इसका संचालन मुंबई के रंगमंच विशेषज्ञ विभांशु वैभव करने जा रहे हैं। वे तकरीबन 35 साल से रंगकर्म में सक्रिय हैं। उन्हें नाट्य लेखन के लिये 2017 में संगीत नाटक अकादमी,उर्दू अकादमी के बेस्ट डायरेक्टर और रंगकर्म के लिये साहित्य कला परिषद के पुरस्कार मिल चुके हैं। श्री वैभव ने 23 नाटकों,12 से अधिक टीवी धारावाहिकों और वृत्त चित्रों में काम किया है। वे एक दर्जन से अधिक नाटकों का निर्देशन और नौ नाटकों का लेखन कर चुके हैं।
गीताजंलि के मुताबिक-‘वैभव जी के अभिनीत नाटकों में बाकी इतिहास, भगवतअज्जुकम, कबिरा खड़ा बाजार में,तारतूफ, चाणक्य प्रपंच, टेंपेस्ट, जूलियस सीजर, जिस लाहौर नहीं देख्या, बकरी, राशोमन, बल्लभपुर की रूपकथा और अंधेर नगरी आदि प्रमुख रहे हैं। उन्होंने कुछ संस्थानों में विद्यार्थियों को रंगमंच का पाठ्यक्रम पढ़ाया है, इसका स्वाभाविक लाभ प्रशिक्षण के लिये आने वाले कलाकारों को मिलेगा’।बता दें गीताजंलि गीत ग्वालियर की एक जानी-पहचानी अभिनेत्री हैं। वे 20 साल से रंगकर्म में सक्रिय हैं। करीब 50 नाटकों में काम कर चुकी हैं। रिपोर्ट में उनके ‘रक्त बीज और नेपथ्य राग’ नाटकों के चित्र प्रकाशित किये गये हैं। उन्होंने 5 नाटकों का निर्देशन और 3 नाटकों का लेखन भी किया है। रंगमंच में इतनी सक्रियता के साथ ही वे एक ऐसी कलाकार भी हैं जिन्होंने ड्रामेटिक्स आर्ट्स में मास्टर डिग्री, 3 अलग-अलग सब्जेक्ट में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। वे अब नाटकों के लिये ही शोध की तैयारी में जुटी हैं। उन्होंने लॉक डाउन के समय रंगकर्म को लेकर देश के कई राज्यों में काम कर रहे कलाकारों से संवाद का नाता जोड़ा था। बहुत से ऑनलाइन शोज़ किये थे। इसका अलावा वे ग्वालियर में अब तक 5 नाट्य कार्यशालायें संचालित कर चुकी हैं।
गीताजंलि ने कहा-‘ एक कलाकार के रूप में रंगमंच पर काम करने के साथ ही अपनी तरह से इस क्षेत्र में समर्पित योगदान देने की कोशिश कर रही हूं। मेरे पति और मेरा परिवार भी मुझे इस काम के लिये हर संभव मदद कर रहे हैं। मेरे इस काम में हमारे जो भी साथी मेरे साथ खड़े हैं, मेरी मदद कर रहे हैं, मैं उनके प्रति भी आभार व्यक्ति करती हूं। उन्होंने कहा, इस कार्यशाला संबंधी जानकारी के लिये प्रशिक्षण के इच्छुक कलाकार मोबाइल नंबर 9425086861और 9926019239 पर संपर्क कर सकते हैं।

