इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। किसी भी देश की समृद्वि उसके नागरिकों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर निर्भर करती है, समाज में भ्रांतियों को वैज्ञानिक सोच से ही दूर किया जा सकता है। यह बात एनसीएसटीसी के पूर्व प्रमुख और आईटीएम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कमलकांत द्विवेदी ने कही। वे ग्वालियर में युवा परिषद द्वारा आयोजित कठपुतली कला के माध्यम से विज्ञान संचार और जागरूकता संबंधी कार्यशाला के उदघाटन सत्र में बोल रहे थे। नेशनल बुक ट्रस्ट दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. गोविन्द प्रसाद शर्मा ने किताबों के पढ़ने में आम लोगों की घटती रूचि पर चिंता जताई, उन्होंने विज्ञान के विषयों पर सुरूचिपूर्ण किताबें लिखे जाने पर ज़ोर दिया ताकि वैज्ञानिक चेतना का विस्तार हो सके। यह कार्यशाला पांच दिनों तक चली। समापन समारोह में आई टी एम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. रमा शंकर सिंह ने बेहद महत्वपूर्ण बात कही । उन्होंने कहा, आज विश्व में जिस गति से जैव विविधता नष्ट हो रही है और प्रदूषण के खतरे से प्रकृति प्रभावित हो रही है, ऐसे में सिर्फ विज्ञान ही दुनिया को नष्ट होने से बचा सकता है। उन्होंने प्रकृति, मानव और विज्ञान के रिश्तों पर बड़ी गहराई से अपनी बात रखी। रमा शंकर ने कहा, चंद्र ग्रहण को लेकर हमारे समाज में बहुत सी भ्रांतिया आज भी मौजूद हैं। ऐसी अतार्किक धारणाओं को छोड़कर विज्ञान की सही समझ वाली राह पर आगे बढ़ने की ज़रूरत है।
कार्यशाला में 50 प्रतिभागी सम्मिलित हुए : आपको बता दें, ग्वालियर में यह कार्यशाला स्थानीय स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान में 11 से 15 जुलाई तक आयोजित की गई थी। इसका आयोजन युवा विज्ञान परिषद और राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी संचार परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें 50 से अधिक कलाकार प्रतिभागियों के साथ ही लेखन,रंगमंच,कठपुतली और विज्ञान विषयों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में अंध विश्वास,लैंगिक भेद, भ्रूण हत्या,महिलाओं का स्वास्थय एवं पोषण जैसे विषयों पर कठपुतली कला के कार्यक्रम तैयार किये गये। इस कार्यशाला में ग्वालियर संभाग के प्रतिभागियों के साथ ही आईटीएम के स्टुडेंट्स ने भी बड़ी दिलचस्पी से हिस्सा लिया। कार्यक्रम का समन्वयन युवा विज्ञान परिषद के सुनील जैन और संयोजन मूर्तिकार और सेवानिवृत संयुक्त संचालक जनसंपर्क सुभाष चंद्र अरोरा ने किया था। दोनों ने विभिन्न सत्रों के संचालन में भी अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन समाज सेवी महेन्द्र शुक्ला ने किया।
पुतल निमार्ण,वेशभूषा,लेखन और संपादन में योगदान : पांच दिन की इस कार्यशाला में पुतल निमार्ण की बागडोर जहां पेपर मैशी के कलाकार वीरेन्द्र नागवंशी ने संभाली,वहीं इसकी वेशभूषा और दूसरे कलात्मक पक्षों पर श्रीमती छाया सक्सेना ने सहयोग दिया। कार्यक्रम में भिंड से आये कथाकार और विज्ञान लेखक संजीव शर्मा ने लेखन और डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य ने संपादन में अपना अहम योगदान दिया। वर्कशॉप में थिएटर डायरेक्टर अशोक सेंगर ने प्रतिभागियों को रंगमंच और कठपुतली कला से जुड़ी ट्रेनिंग और जानकारियां दी। वर्कशॉप में छड़ वाले और हाथ से संचालित किये जाने वाली कठपुतलियों का निमार्ण और उनके ज़रिये दिये गये विषयों पर स्क्रिप्ट निमार्ण का काम किया गया।
समाज के विकास के लिये वैज्ञानिक नज़रिया ज़रूरी : कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के हस्ताक्षर अलग-अलग दिन प्रतिभागियों के बीच पहुंचे और उन्होंने अपने अनुभव और विचार साझा किये। रक्षा अनुंसधान और विकास स्थापना के पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. डीसी गुप्ता ने कहा, सामाजिक विकास के लिये वैज्ञानिक नज़रिया अपनाने की बहुत ज़रूरत है। उन्होंने कहा, पॉलीथीन का उपयोग आज हर तरह से जीवन के लिये घातक बन गया है। आज हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की आवश्यकता है। ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक विजय सिंह भदौरिया ने कहा, यह आवश्यक नहीं कि सभी कथाओं, आख्यानों में विज्ञान के तत्व हो लेकिन तर्क और विज्ञान के नज़रिये से लोक कलाओं में इनका बेहतर उपयोग किया जा सकता है। राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान के संचालक डॉ. वी के. गुप्ता ने पुतल माध्यम से विज्ञान संचार जैसे नवाचार की की सराहना की और कहा, वैज्ञानिक सोच ही जीवन का उत्तम मार्ग है।
कला और विज्ञान की दोस्ती से दूर होगा अंधेरा : आईटीएम,ग्वालियर में पत्रकारिता विभाग के प्रमुख जयंत तोमर ने कहा, समाज में व्याप्त अंध विश्वासों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा, देश में कई बदलाव आए हैं, सामाजिक परिवर्तन का रास्ता विज्ञान के रास्ते से ही निकलेगा। कार्यशाला में सीनियर टीवी जर्नलिस्ट और रंगमंच गतिविधियों से जुड़े लेखक शकील अख़्तर ने स्क्रिप्ट लेखन पर प्रतिभागियों से चर्चा की। उन्होंने कहा, यदि कला और विज्ञान की दोस्ती से अंध विश्वासों और भ्रांतियों का अंधेरा दूर हो सकता है। उन्होंने कहा, विज्ञान संबंधी विषयों को जितने दिलचस्प तरीके से हम कठपुतली के कार्यक्रमों में रखेंगे, नतीजे उतने ही अच्छे सामने आएंगे।
उन्होंने कलाकारों को बताने की कोशिश कि आख़िर कम अवधि,कम किरदारों में अपनी बात ठीक तरह से संप्रेषित करने के लिये किस तरह से स्क्रिप्ट लिखी जा सकती है। मिसाल के तौर पर उन्होंने प्रतिभागियों के लिये अपनी एक स्क्रिप्ट – ‘चम्पा,चमेली की बात,जीवन की सौगात’ भी साझा की। उसके ऑडियो रिकॉर्डिंग में हिस्सा लिया। समापन समारोह में उन्होंने प्रतिभागियों को संस्था की तरफ से प्रमाण पत्र भी भेंट किये। आगे भी समाज के लिये उपयोगी ऐसे कार्यक्रमों में अपना योगदान देते रहने की अपील की। कार्यक्रम में कम्युनिकेशन के अहम बिंदुओं पर डॉ. एम. जीशान ने प्रकाश डाला। कार्यक्रम में जीवाजी विश्वविद्यालय के अनूप अग्रवाल, श्रीमति रिचा रोहिरा,शंकर शर्मा ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

