ग्वालियर,7 जून (शकील अख़्तर)। ‘बच्चों के लिये काम करना जितना मज़ेदार है , उतना ही चुनौती भरा भी है। नाटक के चयन से ही यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है। हमने हेमंत कुमार के लिखे नाटक- ‘उल्टा-पुल्टा’ का चयन भी तीन-चार नाटकों को पढ़ने के बाद किया, मैं चाहती थी बच्चे खेल-खेल में रंगमंच कला के बारे में सीखें, समाज की समस्याओं के बारे में जागरूक हों और अपने काम से दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर सकें।’ यह बात रंगमंच निर्देशिका और अभिनेत्री गीतांजली गिरवाल ने कही। उनके निर्देशन में नाटक ‘उल्टा-पुल्टा’ का हाल ही में ग्वालियर के चंद्रशेखर आजाद नगर पार्क में मंचन किया गया। इसमें 20 युवा और बाल कलाकारों ने हिस्सा लिया। नाटक के इस प्रदर्शन के साथ ही ये महिला निर्देशिका ग्वालियर के रंगमंच की एक नई आशा भी बन गईं हैं।


रंगमंच मुझे अपनी ओर खींचता है : गीतांजली ने कहा, ‘ रंगमंच अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है और मुझे यह अपनी ओर खींचता है। मैं रंगमंच पर सभी तरह का काम करना चाहती हूं लेकिन मैं फोकस बच्चों और महिलाओं की समस्याओं पर रखना चाहती हूं।’ उन्होंने कहा, यह पहला मौका है जब उनके निर्देशन में बच्चों ने मंच पर अपनी प्रस्तुति दी। थियेटर का अनुभव हासिल किया। दर्शकों ने भी उनके काम को पसंद किया। यह नाटक पुरूषों के साथ ही महिलाओं के साथ समान अस्तित्तव और महत्व का संदेश देता है।

उन्होंने कहा, पहले भी वे वर्कशॉप कर चुकी हैं और लेकिन पहली बार उन्होंने किसी फुल लेंथ ड्रामा को डायरेक्ट किया है। हालांकि मेरे एक नाटक ’निमाड़ का सपूत’ का भारत भवन भोपाल में मंचन हो चुका है। गीतांजली ने बताया, नाटक में शामिल बाल और नौजवान कलाकारों के साथ उन्होंने तीस दिन की वर्कशॉप की। बच्चे चूंकि नये थे, इसलिये उनके साथ आवाज़,उच्चारण से लेकर बॉडी लैंग्वेज तक कई स्तरों पर काफी काम करना पड़ा। इस तरह ग्वालियर में रंगमंच की एक नई पौध तैयार हुई।

दो नये नाटकों के साथ रक्त बीच की रिहर्सल: ‘उल्टा-पुल्टा’ के मंचन के साथ ही गीतांजलि ने अपने अगले दो नये नाटकों की तैयारी शुरू कर दी है। इन नाटकों के नाम है-‘बाप रे बाप’ और ‘निमाड़ का सपूत:भीमा नायक’।गीताजंली इस नाटक के बाद अब ग्वालियर में मंचित होने जा रहे नाटक-‘रक्तबीज’ में भी काम कर रही हैं। डॉ.शंकर शेष के लिखे और अनिल शर्मा के निर्देशन में इस नाटक का मंचन 13 जून को मंचन होगा। गीतांजली ने कहा, ‘निर्देशन एक अलग प्रक्रिया है, वहां आपका एक संपूर्ण अनुभव काम आता है। परंतु अभिनय के स्तर पर आपको अपने स्तर पर काम करने और सीखने का सुख मिलता है।‘ उन्होंने कहा, भोपाल में अलखनंदन जैसे वरिष्ठ रंग निर्देशक के साथ काम या एनएसडी और संगीत नाटक अकेडमी की कार्यशालाओं से भी उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। यह प्रक्रिया अब भी जारी है।
संभावना की तलाश खुद करना होगा : गीतांजली ने कमियों के बीच रंगमंच के सवाल पर कहा, देखिये चुनौतियां तो हैं लेकिन संभावनाओं की तलाश भी कलाकारों को ही करना होगा और आगे इरादे मज़बूत हैं तो फिर मुश्किलें मायने नहीं रखती हैं। उन्होंने बताया नाटक-‘उल्टा-पुल्टा’ को थिंक फाउंडेशन,शहीद चंद्रशेखर आजाद नगर समिति और वीमेंस थियेटर क्लब का सहयोग मिला। नाटक का संगीत आदित्य सेंगर और जाह्नवी पाटीदार ने तैयार किया। वेशभूषा अनेरी पाटीदार,आदित्य सेंगर की रही। मंच और प्रकाश परिकल्पना आदित्य सेंगर और अभिषेक सिंह की थी। रूप सज्जा नेहा शर्मा की थी।

नाटक– ‘उल्टा-पुल्टा’ के कलाकार : मंच पर नाटक में जिन कलाकारों ने अभिनय किया, वे हैं-(1) अमन बरुआ – नट , पुरुष (2) खुश्बू सिसोदिया – नटी , औरत , लड़की (3) जाह्नवी पाटीदार – रानी , लड़की (4) रामब्रज सिंह गुर्जर – मंत्री , पंडित , स्वीटी के पिता , रमेश के पिता 5) आकांक्षा श्रीवास – औरत ( 6) शीतल श्रीवास – औरत , लड़की 7) अनामिका कुशवाह – औरत , स्वीटी की माँ 8) पुष्कर शर्मा – सैनिक , युवक , बूढ़ा (9) प्रशांत श्रीवास – ढिंढोरची , बूढ़ा ,युवक (10) अंकिता श्रीवास – सीमा , लड़की (11) राज द्विवेदी – रमेश (12) रोहित शर्मा – पुरुष , युवक (13) नेहा शर्मा – स्वीटी 14) कृष्ण कुमार – युवक , बूटी का पति (15) अनेरी पाटीदार – बूटी , लड़की , सैनिक (16) आदित्य सेंगर – नेता (17) ललित सविता – रमेश की माँ ।
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