Tuesday, June 16, 2026
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हबीब तनवीर के नाटक फिर मंच पर

रायपुर,17 मई (कला प्रतिनिधी)। हबीब तनवीर की पुण्यतिथि पर उनके लिखे और निर्देशित नाटकों- ‘गाँव के नांव ससुरार, मोर नाँव दामाद,पोंगा पंडित उर्फ़ जमादारिन का स्थानीय वृंदावन हॉल में 8 जून को मंचन किया जायेगा। इन फ़िल्म एंड विजुअल सोसाइटी रायपुर ने हबीब तनवीर की स्मृति में यह आयोजन किया है। दोनों ही नाटकों का निर्देशन श्रीमती रचना मिश्रा ने किया है। श्रीमती रचना मिश्रा ने हाल ही में बी एड कॉलेज के ट्रेनी शिक्षकों के साथ इस नाटक का मंचन किया था। अब यह नाटक नये-पुराने रंगकर्मियो के साथ तैयार किया जा रहा है । नाटकों का गीत-संगीत नया थियेटर से जुडे कलाकार पूनम तिवारी ओर साथियों ने तैयार किया है ।

बड़ी बातों का सहज नाटक 

पोंगा पंडित उर्फ़ जमादारिन नाटक छत्तीसगढ मे बहुत लम्बे समय से खेला जाता रहा है। हबीब तनवीर के नया थियेटर से जुडे ख्याकिनाम अभिनेता मदनलाल निषाद और भूलवाराम इसे 1935-36 से खेल रहे थे जिसे हबीब तनवीर ने 1958 मे देखा और बाद मे इसे अपने तरीक़े से लिखकर नया थियेटर से पूरे देश में मंचित किया । लोभ , लालच छुआछूत जैसे सामाजिक विषय पोंगा पंडित नाटक मे बहुत सहज तरीक़े से समाहित हैं।हबीब तनवीर के शब्दों मे “ये हास्य रूपी नाटक बहुत बड़ी -बड़ी बातें बहुत गहराई से ,मगर बहुत सहज ढंग से कह जाता है । विषय में एक लोभी पंडित का लालच भी शामिल है ,छुआछूत की बुराइयों पर भी फब्ती है । नाटक की ये ख़ूबी है कि वो इस महत्वपूर्ण बात को कि भगवान से नाता रिश्ता , बिना किसी माध्यम के सीधे स्थापित किया जा सकता है ।

पोंगा पंडित नाचा शैली का शाहकार 

यह कहना शायद ग़लत न होगा कि “ पोंगा पंडित “नाचा शैली का एक छोटा सा शाहकार, क्लासिक एक मास्टरपीस है ।”गाँव के नाव ससुरार मोर नॉंव दमाद नाटक छत्तीसगढ़ में शरद पूर्णिमा को मनाये जाने वाले छेर-छेरा त्यौहार के अवसर पर गाँव के लड़के झंगलु और लड़की मान्ती के बीच छेड़छाड़ से उपजी प्रेम की कहानी है । जहाँ मान्ती का पिता ग़रीब लड़के झंगलू की बजाय बूढ़े सरपंच से पैसे की ख़ातिर अपनी बेटी की शादी कर देता है ।

बाद मे झंगलू अपने साथियों की मदद से गौरा गौरी के त्यौहार के बीच देवार का भेष रखकर अपनी प्रेमिका मान्ती को भगा ले जाता है।प्रेम की जीत का यह नाटक हबीब तनवीर के निर्देशन मे पहली बार मोती बाग़ रायपुर मे 1973 मे मंचित हुआ था ।

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