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इंदौर में आगामी दो मई से बच्चों के बाल नाट्य शिविर ‘हल्ला-गुल्ला’ शुरू हो रहा है। इस समर थियेटर कैम्प के लिये रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं। पंद्रह दिन के इस शिविर में बच्चे ‘पॉकेट थिएटर’ के ज़रिये अपनी कल्पना को नये पंख देंगे। इस प्रयोग में भाग लेने वाले स्कूली बच्चे ख़ुद अपनी स्क्रिप्ट लिखेंगे और उसे मंच पर प्रस्तुत करना सीखेंगे।
आयोजन समिति के निदेशक और वरिष्ठ नाट्य निर्देशक तपन मुखर्जी ने कहा, ये थियेटर कैंप, विजय नगर स्थित सारदा रामकृष्ण विद्या मंदिर में आयोजित किया जा रहा है। स्कूल की बड़ी माता अमितप्राणा जी एवं उप प्राचार्य व शिविर संयोजक श्रीमती सीमा व्यास के विशेष सहयोग से यह आयोजन मूर्त रूप ले रहा है।
दो से सोलह मई तक चलने वाले इस शिविर में हाई स्कूल तक की छात्राएं और आठवीं कक्षा तक के छात्र प्रवेश ले सकेंगे। प्रतिदिन सुबह आठ से बारह बजे तक चलने वाले इस प्रशिक्षण को तीन सत्रों—शारीरिक अभ्यास, रंग-संवाद और रिहर्सल में विभाजित किया गया है। इसका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जारी हैं, बच्चे या उनके अभिभावक रजिस्ट्रेशन के लिये विजय नगर में मौजूद सारदा स्कूल में भी सुबह आठ बजे से बारह बजे तक वाइस प्रिसिंपल श्रीमती सीमा व्यास और समन्यवक श्रीमती शिल्पा सिंघल से संपर्क कर सकते हैं। दिये गये पोस्टर्स के बार कोड के ज़रिये भी फार्म भरे जा सकते हैं।
तपन मुखर्जी ने बताया, ‘पॉकेट थिएटर’ का उद्देश्य बच्चों की रचनात्मकता को निखारना है। शिविर के लिये इसकी परिकल्पना हमारे सहयोगी श्री शकील अख़्तर ने दी है। इसमें बच्चे अपने चुने गये विषय पर प्रस्तुतियां तैयार करेंगे। इसके लिये उनका रंगमंचीय मार्गदर्शन किया जायेगा। उन्होंने कहा, आयोजन समिति के डॉ. परशुराम तिवारी प्रबंध संचालन, श्री वरुण जोशी निर्देशन एवं श्रीमती शिल्पा सिंघल प्रस्तुति प्रबंधन का दायित्व संभालेंगे। इसके रंग संवाद कार्यक्रम में कला और संस्कृति की ख़ास हस्तियां आमंत्रित की जायेंगी।
आपको बता दें, बच्चों के नाट्य शिविर ‘हल्ला-गुल्ला’ का इंदौर के सांस्कृतिक परिदृश्य में करीब पैंतीस साल पुराना इतिहास है। इसकी नींव वर्ष उन्नीस सौ नब्बे में प्रसिद्ध शिक्षिका और संस्कृतिकर्मी स्व. श्रीमती आशा कोटिया ने रखी थी। वर्ष दो हज़ार बारह में डॉ. सनत कुमार के निधन के बाद यह सिलसिला कुछ समय के लिए थम गया था, जिसे वर्ष दो हज़ार चौबीस में डॉ. परशुराम तिवारी, तपन मुखर्जी, शकील अख़्तर की पहल पर पुनः जीवंत किया गया। पिछले वर्ष बच्चों ने ‘समाधान’ और रोबो टीचर’ जैसे चर्चित नाटकों का मंचन कर शहर का ध्यान आकर्षित किया था। आयोजन में शहर के कई रंगकर्मियों और संस्कृतिकर्मियों ने अपना योगदान दिया था। इंदौर स्टूडियो की रिपोर्ट।

