स्टूडियो डेस्क,इंदौर स्टूडियो। ‘भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और कलाकृतियाँ वर्तमान के साथ ही, पुरातन और भविष्य का वृतांत भी हैं। यह विषय हमारी आस्था, श्रद्धा और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा है’। एक डॉक्युमेंट्री के लिये दिये गये इंटरव्यू में यह बात डॉ.भरत शर्मा ने कही है। वे संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार में सदस्य हैं। इस डॉक्युमेंट्री के निर्माण के लिये मुंबई से अपनी टीम के साथ भारतीय वरिष्ठ पत्रकार और लेखक विवेक अग्रवाल, हाल ही में इंदौर पहुंचे। इस विषय में जारी एक बयान में डॉ.भरत शर्मा ने बताया कि इस डॉक्युमेंट्री के लिये उनका साक्षात्कार भी संकलित और रिकॉर्ड किया गया है। यह डॉक्युमेंट्री भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और कलाकृतियों के संरक्षण विषय को लेकर बनाई जा रही है। डाक्युमेंट्री के निकट भविष्य में एक इंटरनेशनल चैनल पर प्रसारण की संभावना है। फिलहाल इसका निर्माण जारी है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में विशेष सफलता: डॉ.भरत शर्मा ने डॉक्युमेंट्री के लिये दिये गये इंटरव्यू में बताया है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में पिछले सात वर्षों में ७५% से अधिक विदेश में पायी गई भारतीय सांस्कृतिक कलाकृतियों को देश में वापस लाया गया है। यद्दपि 1976 से 2014 तक केवल 13 कलाकृतियाँ ही वापस मिल सकी थीं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के कनाडा प्रवास के समय लगभग दो सौ से ज़्यादा कलाकृतियाँ और मूर्तियाँ भारत वापस लाने में सफलता मिली हैं। ये कलाकृतियाँ सौ से एक हज़ार साल तक पुरानी हैं। इसी तरह से ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ने भी 14 कलाकृतियाँ और मूर्तियाँ भारत को लौटाई हैं। हाल ही में मन की बात में माननीय प्रधानमंत्री जी ने बताया था कि लगभग सात सौ साल पुरानी हनुमान जी की प्रतिमा की वेल्लौर तमिलनाडु से गुम हुई थी,ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त हुई, अवलोकेश्वर पद्मपाणि की मूर्ति इटली से प्राप्त हुई। यह भी करीब एक हज़ार साल पुरानी है, जो बिहार गयाजी के कुंडलपुर की थी। संरक्षण में निरंतर प्रयासरत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण: बता दें, कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भारतीय सांस्कृतिक विरासतों के पुरातत्वीय अनुसंधान और संरक्षण की ज़िम्मेदारी निभा रहा है। भारत में लगभग चालीस विश्व धरोहर और 3,691 राष्ट्रीय धरोहर सूचीबद्ध है। कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए भारतीय राष्ट्रीय न्यास समिति संगठन लगभग 120 शहरों की लगभग 60 हज़ार पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों को चिन्हित और सूचीबद्ध कर चुका है।

