1मई, इंदौर (जावेद अहमद शाह ख़ान “अल-हिंदी”)। नियति कैसे दो इंसानों को मिलाकर एक ऐसी सफल जुगल जोड़ी बना देती है और वो साथ मिलकर संगीत में ऐसे करिश्मे करते हैं कि बरसों बाद आज भी उनकी धुनें सुनने वालों के दिलों-दिमाग पर छाई हुई हैं । यह संगीतकार जोड़ी थी शंकर-जयकिशन की। उनके विलक्षण और सदाबहार संगीत का कमाल एक बार फिर इंदौर में देखने को मिला। संस्था सारेगामा और संगीत कला संदेश ने उनकी बनाई धुनों पर आधारित महफ़िल ‘ओ बसंती पवन पागल’ स्थानीय रविन्द्र नाट्यगृह में सजाई थी। इस कार्यक्रम को अपनी गायिकी से सजाया मुंबई से आये राणा चटर्जी,प्रसन्ना राव और संगीता मेलेंकर की रही। इंदौर से श्रद्धा जगताप और सारेगामा की प्रिंसिपल रसिका गावड़े ने न सिर्फ़ गाया बल्कि सोलो ड्यूट में उनका भरपूर साथ दिया।
राणा चटर्जी ने मन्ना डे के साथ कई सफल शो भारत और विदेशों में किए हैं। दूसरी आवाज़ प्रसन्ना राव रही जो मोहम्मद रफी को सिर्फ गाते ही नहीं उन्हें जीते भी हैं। अपनी अद्भुत गायकी और गीत-गजलों में शब्दों के तलफ़्फ़ुज़ की वजह सबके चहेते बने हुए हैं । संगीता मेंलेकर मुंबई में रहकर पूरे भारत में आशा लता के गीतों को जिंदा रखे हुए हैं । वे इंदौर अक्सर आती रहती हैं और इस बार भी उन्होंने अपने जॉनर में कमाल गाया। महफिल में ज़्यादातर वो गीत लिए गए जिन पर आर के बैनर का ठप्पा नहीं लगा हुआ था जिसके लिए शंकर-जयकिशन मशहूर थे । एक से एक खूबसूरत नग़मों से देर रात तक महफिल सरगर्म रही। कुछ गीत जो बेहद पसंद किए गए जैसे तू प्यार का सागर है ,पान खाय सैय्या हमार , अजीब दास्ताँ है ये ,छलके तेरी आँखों से शबाब । शंकर जयकिशन ने भारतीय लोक धुनों ही नही वेस्टर्न समेत अरबी धुनों से प्रेरित होकर भी विलक्षण संगीत दिया है । बहुत दिनों बाद महफ़िल में वन्स मोर भी हुआ। कार्यक्रम में जानकारियों और संगीत से जुड़े किस्सों से भरा संचालन संजय पटेल ने किया । नितेश शेट्टी गिटार , योगेश पाठक की बोर्ड ,स्वप्निल कौशल बेस गिटार , आक्टोपैड पर गौरव नागर ,मनोज सिंह बारोलिया तबला ,रवि खेड़े ढोलक ,असलम खान सेक्सोफ़ोन और सारेगामा के छात्रों ने बेहतरीन कोरस दिया।

