Wednesday, May 13, 2026
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पूर्वोत्तर भारत साहित्य महोत्सव में जुटे 8 राज्यों के साहित्यकार,दिग्गजों का सम्मान

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम । ग्वालियर में हाल ही में ‘पूर्वोत्तर भारत साहित्य महोत्सव’ का आयोजन किया गया। ग्वालियर साहित्य संस्थान मध्य प्रदेश और माधव महाविद्यालय ग्वालियर ने इसे किया । इसमें पांच साहित्यकारों का विशेष तौर पर सम्मान किया गया। कई और साहित्य सेवियों को भी प्रशस्ति पत्र भेंट किये गये। कार्यक्रम में 8 राज्यों के साहित्यकार जुटे। पहली बार इस तरह के आयोजन ने शहर में साहित्यकारों में नई ऊर्जा का संचार किया।

पूर्वोत्तर भारत के हिंदी साहित्यकारों का हुआ आगमन : संगोष्ठी में पूर्वोत्तर भारत के 30 ऐसे साहित्यकार भी सम्मिलित हुए जो अरसे हिंदी साहित्य की सेवा में जुटे हैं। संगोष्ठी में हिमाचल, पंजाब राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के साहित्यकार भी हिस्सा लेने पहुँचे। आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही 8 राज्यों की भाषा,बोलियों,साहत्य पर भी विचार विमर्श हुआ ।

कार्यक्रम के सूत्रधार हेमराज मीणा,संयोजक डॉक्टर भगवान स्वरूप चैतन्य और माधव महाविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर शिवकुमार शर्मा रहे। इनके प्रयासों ने पूर्वोत्तर भारतीय साहित्य और देश के दूसरे भागों से आये साहित्यकारों के बीच एक ऐसे पुल का निर्माण किया जो साहित्यिक संवाद की निरंतरता को आगे बढ़ाने का काम करता रहेगा। माधव कॉलेज के प्रधानाचार्य प्राचार्य  डॉक्टर प्रदीप बाजपेई के संरक्षण में यह पहला अवसर था जब पूर्वोत्तर भारतीय संस्कृति और साहित्य पर विस्तार से चर्चा हो सकी। साथ ही उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत में प्रबल आपसी जुड़ाव का अहसास हुआ। कार्यक्रम में सुभाष चंद्र अरोरा, गीतम मिश्रा, डॉ. हेमराज मीणा, डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य मौजूद थे।

पांच साहित्यकारों को विशेष तौर पर सम्मान : पूर्वोत्तर भारत के साथ दूसरे क्षेत्रों से आए पांच साहित्यकारों को विशिष्ट सम्मान से नवाजा गया। कई और हिन्दी सेवियों और साहित्यकारों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई। उनका भी सत्कार किया गया। आयोजन में डॉ. कोमल सिंह सोलंकी सम्मान अमर बनियां और रजनी मिश्र साहित्य सम्मान पूर्वोत्तर अकादमी की संचालक रीता को दिया गया। दोनों को ही सम्मान स्वरूप पांच हज़ार की राशि और मानपत्र प्रदान किया गया। इसके साथ ही शांति स्वरूप अलंकरण सम्मान साहित्यकार शैवाल सत्यर्थी, तुलसी साहित्य सम्मान रामप्रकाश अनुरागी, अज्ञेय अलंकरण डॉ. सुरेश सम्राट को दिया गया। स्थानीय साहित्याकारों को भी सम्मानित किया गया। 

संगोष्ठी में पढ़े गये शोध पत्र: संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में हिंदी सेवी अध्यापकों एवं शोध छात्रों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए । साहित्य सर्जन में लगे साहित्यकारों ने अपने अनुभव सुनाए l वक्ताओं ने पूर्वोत्तर भारत की  के मनोरम प्राकृतिक स्थलों एवं समृद्ध संस्कृति का खुलासा करते हुए सभी से पूर्वोत्तर भारत में भ्रमण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में आने- जाने से वहां के नागरिकों से हम सबका भरपूर जुड़ाव हो सकेगा l हमारी हिंदी भाषा इस जुड़ाव को मजबूत करने की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।

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