शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। दुबई से हिन्दुस्तान की बेटियां अपना नया शो राजस्थान लेकर आ रही हैं। महाभारत की कथा पर आधारित यह एक नाटक है और इसका का नाम है ‘धी’ (DHEE, A reawakening)। ‘धी’ का अर्थ है बुद्धि,विवेक,ज्ञान। जबकि ‘धी’ का पंजाबी और गुरुमुखी में अर्थ बेटी है। दुबई में इस नाटक के 4 कामयाब शोज़ हो चुके हैं। मगर देश में ‘धी’ का यह पहला मंचन होगा। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के माध्यम से, जोधपुर में यह ड्रामा शो होगा। अकादमी ने 18 से 22 मार्च तक यहाँ अंतरराष्ट्रीय नाट्य समारोह का आयोजन किया है। इस समारोह में दुबई के थियेटर ग्रुप ‘एक्सप्रेशन आर्ट’ को भी निमंत्रित किया गया है। 19 मार्च को उनके इस नाटक का मंचन, स्थानीय एस.एन. मेडिकल कॉलेज सभागार में होगा।
दुबई में ‘धी’ का पहला मंचन : ‘धी’ का पहला मंचन, दुबई में पिछले साल हुआ था।… दुबई से फ़ोन पर यह बात अपूर्वा मेहरा ने कही। वे इस नाटक की सह निर्देशिका हैं और एक अहम किरदार भी निभाती हैं। उन्होंने कहा- ‘दुबई में ‘धी’ के पहले ही शो को इंडियन कम्युनिटी ने बेहद पसंद किया। इसके चार शोज़ हुये और अब भारत में इसका पाँचवा प्रदर्शन होने जा रहा है। हम सभी कलाकारों के लिये यह बड़ी ख़ुशी की बात है’।
भारत में और भी शोज़ करने की चाह: अपूर्वा ने बताया, ‘नाटक के मंचन के लिये जोधपुर के अलावा हमें कुछ और प्रस्ताव भी मिले हैं। फिलहाल हम चाहते हैं कि जोधपुर की इस यात्रा के दौरान हम जयपुर,बीकानेर या उदयपुर जैसे किसी शहर में भी इस नाटक का मंचन कर सकें। यह सिलसिला आगे भी जारी रहे। आख़िर दुबई है ही कितनी दूर? हवाई सफ़र से सिर्फ़ ढाई घंटे की दूरी पर!’
नाटक में 7 महिला कलाकारों का अभिनय : क्या इस नाटक में एक भी पुरूष पात्र नहीं? यह पूछने पर अपूर्वा ने कहा, ‘ये एक महिला केंद्रित नाटक है। इनमें 7 महिलाओं के अलग-अलग किरदार हैं। इन किरदारों में 7 महिला कलाकार अभिनय करती हैं। इनमें निर्देशक महुआ कृष्णदेव चौहान और मेरे अलावा, सोनी छावड़ा, मनदीप वालिया, शिल्पी वर्मा, चारू मदान और लवीना जसवानी शामिल हैं। महिलाओं ने जहाँ मंच पर अभिनय किया है, वहीं परदे के पीछे दो प्रतिभाशाली पुरूष कलाकारों की अहम भूमिका है। इनमें से एक हैं सौर्यान्श, जिन्होंने काल विशेष के हिसाब से, इस नाटक का संगीत तैयार किया है, साथ ही विज़ुअल इफेक्ट्स भी। दूसरे सहयोगी हैं सुप्रभ चक्रवर्ती जिन्होंने नाटक की प्रकाश योजना तैयार की है। वैसे सुप्रभ एक अच्छे अभिनेता भी हैं।
‘एक्सप्रेशन’ में कलाकारों का ‘मिनी भारत’: अपूर्वा मेहरा ने कहा, ‘एक्सप्रेशन के सभी कलाकार दुबई में ही रहते हैं और सभी भारत के अलग-अलग शहरों से यहाँ पर आये हैं। एक्प्रेशन की महिला कलाकार सदस्य यहाँ अलग-अलग तरह के अपने काम भी कर रही हैं। मिसाल के लिये, मैं यहाँ एक प्रॉपर्टी कंसलटेन्ट हूँ। मगर सभी का शौक एक ही है, रंगमंच। पाँच साल पहले जब, महुआ जी ने ‘एक्सप्रेशन आर्ट’ थियेटर की कल्पना की, हम सभी इस ग्रुप का हिस्सा बनते चले गये।
नाटक की निर्देशक, राजस्थान की बेटी: इस नाटक की निर्देशक महुआ कृष्णदेव चौहान, राजस्थान की बेटी हैं। उनका जन्म जोधपुर में हुआ। कथक केंद्र दिल्ली से उन्होंने नृत्य की शिक्षा ली और फिर काफी समय तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली और कथक केंद्र में काम किया। उन्हें राजस्थान संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।
महुआ चौहान रंगमंच की प्रशिक्षक भी : महुआ चौहान एक सिद्धहस्त डांसर, एक्टर और डायरेक्टर हैं। दुबई में वे नाटकों के निर्माण के साथ, रंगमंच की शिक्षा भी दे रही हैं। जोधपुर में आकर अपने नाटक के प्रदर्शन को लेकर महुआ भी काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरा जोधपुर आना ठीक ऐसा ही है, जैसे मरूस्थल में टपकी ओस की कोई बूँद..और उस एक बूंद से रेत, कोख तक हरी हो जाती है!’
’‘युद्ध’ स्त्री जीवन की भयावह त्रासदी: महुआ कृष्णदेव चौहान ने नाटक की थीम पर चर्चा करते हुये बताया, ‘असल में यह नाटक युद्ध के खिलाफ़ एक आवाज़ है। यह नाटक बताता है कि युद्ध का स्त्री जीवन पर, कितना भयावह असर पड़ता है। एक स्त्री के जीवन को युद्ध, पूरी तरह, तबाह कर देता है। युद्ध, पुरूष करते हैं। अपने अहंकार में धीरज खोकर। स्वार्थ और सत्ता के लिये, ध्रुवीकरण का खेल रचते हैं। षडयंत्री चालें चलते हैं। मारे गये वीर सैनिकों के अंत्योदय के नाम पर आँसू बहाते हैं और अंतत: इस त्रासदी के दुष्परिणाम महिलाएं भुगतने को मजबूर होती हैं। हमारे नाटक के केंद्र में भी महाभारत के युद्ध के बाद ऐसी ही परिस्थियों के चक्रव्यूह में फँसी महिलाएं हैं। इन पात्रों के नाम कोई भी हों… गांधारी, उत्तरा, सुभद्रा, गौतमी, यमुना या विपाशा। (नाटक ‘बात करामात’ में एक्सप्रेशन आर्ट की 8 महिला कलाकार)
रंगमंच पर महुआ चौहान का सफ़र: महुआ अपने रंगमंच सफ़र के बारे में कहा, ‘दुबई में मैं अभी तक, 4 नाटकों का निर्देशन कर चुकी हूँ। इनमें कबीर के जीवन पर आधारित ‘यार जुलाहे’, लोक कथाओं से प्रेरित ‘बात करामात’ और नाटक ‘व्यथा’ शामिल है। ‘धी’ हमारा चौथा नाटक है। इसके अलावा एक और नाटक, ‘बाबा साहेब – दि ग्रैंड म्युज़िकल’ डॉ. आम्बेडकर के जीवन पर आधारित है। इस नाटक को मैंने दिल्ली सरकार के लिये निर्देशित किया है। पिछले साल इस नाटक के दिल्ली में ही 50 शोज़ भी हुए। (नाटक ‘बाबा साहेब’ का एक दृश्य।)
माँ और मार्गदर्शक गुरू की कृपा: महुआ ने कहा- ‘अपने काम में मुझे, प्रशिक्षण और अनुभव का बड़ा लाभ मिला है, यही वजह है कि मैं अपनी तरह से नाटक को डिज़ाइन कर पाती हूँ। इसमें नृत्य और संगीत की समझ भी काफी काम आती है। यह सब करने के पीछे मेरी माँ और रंगमंच के गुरू की कृपा है। माँ श्रीमती सुषमा चौहान एक लेखिका हैं। उन्होंने मुझे हर परिस्थिति में संघर्ष कर, आगे बढ़ते रहने के बारे में सिखाया है। इसी तरह मेरे गुरू, जाने-माने कवि, लेखक और ड्रामा डायरेक्टर डॉ.अर्जुन देव चारण जी हैं। उन्होंने हमेशा मुझे मार्गदर्शन दिया, मेरी कला को संवारा।
दुबई में कम्युनिटी थियेटर का प्रचलन: दुबई में हिन्दी रंगमंच की स्थिति है? यह पूछने पर अपूर्वा मेहरा ने कहा, ‘दुबई में पेशेवर थियेटर नहीं बल्कि कम्युनिटी थियेटर का चलन है। मगर हम अपने काम को यहां प्रोफेशनली ही करते हैं। यह ज़रूरी भी है, एक कलाकार होने के नाते भी और दर्शकों की दृष्टि से भी’। अपूर्वा ने बताया, ‘दुबई में मैं 18 सालों से हूँ। मुंबई से यहाँ पर आई हूँ लेकिन माँ डॉ.शशि शर्मा मुंबई में ही रहती हैं। वे साहित्यिक अभिरूचि रखती हैं। नाटकों को प्रेरित-प्रोत्साहित करने वाले एक सोशल मीडिया ग्रुप ‘सरोकार रंगकर्मी’ चलाती हैं। मेरे पिता स्व.डॉ.सोहन शर्मा हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार रहे। माता-पिता के संस्कार और आमची मुंबई की साझा-संस्कृति, अब दुबई की आम ज़िदंगी और यहाँ थियेटर में काम आ रही है’। नोट: रिपोर्ट में दो नाटकों को छोड़कर शेष सभी तस्वीरें ‘धी’ की हैं। आगे पढ़िये –

