Wednesday, May 13, 2026
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IFFI2022: फ़िल्म ‘आई हैव इलेक्ट्रिक ड्रीम्स’ को मिला स्वर्ण मयूर

IFFI53 अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में स्पैनिश फिल्म ‘आई हैव इलेक्ट्रिक ड्रीम्स’ (टेंगो सुएनोसेलेक्ट्रिकोस) ने प्रतिष्ठित स्वर्ण मयूर अवार्ड जीता है। ईरानी लेखक और निर्देशक नादेर सैइवर को “नो एंड” के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसी फ़िल्म के प्रमुख अभिनेता वाहिद मोबासेरी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष) फिल्म ‘आई हैव इलेक्ट्रिक ड्रीम्स’ की मुख्य अभिनेत्री डेनिएला मार्न नवारो को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (महिला) का पुरस्कार दिया गया है। समापन समारोह में फिलीपीन्स के फिल्मकार लाव डियाज को ‘व्हेन द वेव्स आर गॉन’ के लिए स्पेशल ज्यूरी पुरस्कार और वीण कंद्रेगुला को फिल्म ‘सिनेमा बंदी’ के लिए विशेष सम्मान दिया गया है।
– सिने डेस्क,इंदौर स्टूडियो।16 साल की लड़की के जवान होने का अद्भुत चित्रण: स्पेनिश फिल्म ‘आई हैव इलेक्ट्रिक ड्रीम्स’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें सिनेमा के वर्तमान और भविष्य को पर्दे पर पेश किया गया है। कोस्टा रिका के फिल्म निर्माता वेलेंटीना मौरेल द्वारा निर्देशित इस फिल्म में 16 साल की लड़की ईवा के वयस्क होने का अद्भुत चित्रण किया गया है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो केवल उम्र बढ़ने के बारे में नहीं है, बल्कि एक ऐसी प्रक्रिया भी है जो इतनी गहरी है कि कभी-कभी यह संबंधित व्‍यक्ति को एक निश्चित तरीके से अंदर से पूरी तरह झकझोर भी सकती है। इस फिल्म में जीवन की जटिलता के ईमानदार चित्रण की चर्चा करते हुए ज्‍यूरी ने टिप्पणी की कि हिंसा और अनुग्रह, रोष और अंतरंगता पर्यायवाची बन गए हैं। ज्‍यूरी ने कहा, ‘यह चित्रण इतना अद्भुत एवं जीवंत था कि इस फिल्म को देखते समय हमें लगा जैसे कि हम स्‍वयं कांप रहे हैं।’ फिल्म में 16 साल की लड़की ईवा की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री डेनिएला मार्न नवारो को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (महिला) चुना गया है। प्रशस्ति पत्र में, ज्यूरी सदस्यों ने कहा कि डेनिएला को इसलिए चुना गया है क्योंकि “बहुत सहजता, ताजगी और यकीन के साथ ये अभिनेत्री अपना काम करती हैं, अपने किरदार को जिंदा कर देती हैं जो कि भोलेपन से भरा हुआ है, जो कि किशोरावस्था की मुश्किल उम्र में बहुत आम होता है।” ईरान के हालात का जादुई चित्रण: ईरानी लेखक और निर्देशक नादेर सैइवर को “नो एंड” के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के सिल्वर पीकॉक से सम्मानित किया गया है। फिल्म ईरान की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था का एक जादुई और सूक्ष्म चित्रण है। ‘नो एंड’ के मुख्य अभिनेता वाहिद मोबासेरी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष) के सिल्वर पीकॉक से सम्मानित किया गया जिन्होंने केंद्रीय पात्र की तकलीफ देने वाली भावनाओं की जटिलता को परदे पर उतारा। ज्यूरी ने सर्वसम्मति से वाहिद मोबासेरी को निर्देशक नादेर सैइवर की फिल्म ‘नो एंड’ में अयाज़ की भूमिका का अद्भुत चित्रण करने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर चुना। ज्यूरी ने कहा कि वाहिद को ये पुरस्कार इसलिए दिया गया है कि ‘ये अभिनेता अनूठे ढंग’ से प्रकट अभिनय करते हैं। बहुत ही सीमित इशारों में और बिना कोई शब्द बोले वो खुद को अभिव्यक्त कर जाते हैं। सिर्फ अपने चेहरे के साथ वे फिल्म के नायक को पीड़ा देने वाली भावनाओं की जटिलता को व्यक्त करने में सक्षम होते हैं। विरोध प्रदर्शन पर आधारित इस ड्रामा में एक आम ईमानदार नागरिक साफतौर पर दर्शक के मन में उभर आता है- एक असहाय, स्पष्ट, बेहद कमजोर आम ईरानी नागरिक।विजुअल स्टोरीटेलिंग की ताकत की अनूठी मिसाल: इफ्फी-53 स्पेशल ज्यूरी पुरस्कार फिलीपीन्स के फिल्मकार लाव डियाज को ‘व्हेन द वेव्स आर गॉन’ के लिए दिया गया है। ज्यूरी ने लिखा कि “ये फिल्म विजुअल स्टोरीटेलिंग की ताकत की अनूठी मिसाल है, जहां शब्द कम से कम इस्तेमाल हुए हैं फिर भी भावनाएं, विशेष रूप से क्रोध, को पूरी प्रचंडता से दिखाया गया है।” यह फिल्म फिलीपींस के एक ऐसे अन्वेषक की कहानी है, जो एक गहरे नैतिक संकट से गुजरता है। यह फिल्म उसके उस काले अतीत की चर्चा करती है, जो उसे लगातार परेशान करती रहती है। खासकर, उस स्थिति में जब वह गंभीर अवसाद और अपराधबोध की समस्या से उबरने की कोशिश करता है। लव डियाज़ को उनके अपनी तरह का ‘सिनेमाई पल’ विकसित करने के लिए जाना जाता है।नैतिकता की एक गहन मनोवैज्ञानिक पड़ताल: इफ्फी ने एथेंस की निर्देशक असिमिना प्रोएड्रो को फिल्म बिहाइंड -‘द हेस्टैक्स’ के लिए एक निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फीचर फिल्म के पुरस्कार से सम्मानित किया। इस फिल्म का अंतरराष्ट्रीय प्रीमियर इस महोत्सव में हुआ था। जूरी का कहना है कि यह फिल्म “निरर्थक नैतिकता की एक गहन मनोवैज्ञानिक पड़ताल और जातीय शरणार्थी संकट एवं जागृत किशोर चेतना के प्रति गहरे जमे अंतर्विरोध” की परिणति है। यह कहानी दर्शकों को एक ऐसे व्यक्ति, उसकी पत्नी और उसकी बेटी की यात्रा में भाग लेने के लिए आमंत्रित करती है, जिन्हें पहली बार एक संकट के समय अपने कर्मों की कीमत अदा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। एक गरीब और संघर्षरत ऑटो चालक की कहानी: निर्देशक, लेखक और सिनेमैटोग्राफर प्रवीण कंद्रेगुला को जूरी द्वारा उनकी फिल्म-‘सिनेमा बंदी’ के लिए विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है, जो एक गरीब और संघर्षरत ऑटो चालक की कहानी है, जिसे कहीं एक महंगा कैमरा मिल जाता है, जो उसके एक ऑटो-चालक से फिल्म निर्माता तक बनने की यात्रा पर ले जाता है। जूरी ने उद्धृत किया कि फिल्म भारत में सिनेमा के लिए आकांक्षाओं और जुनून को बयां करती है। आपको बता दें, अंतर्राष्ट्रीय जूरी की अध्यक्षता इज़राइली लेखक और फिल्म निर्देशक नदव लापिड ने की, अन्य जूरी सदस्यों में अमेरिकी निर्माता जिंको गोटोह, फ्रांसीसी फिल्म संपादक पास्कल चावांस, फ्रांसीसी वृत्तचित्र फिल्म निर्माता, फिल्म समीक्षक और पत्रकार जेवियर एंगुलो बार्टुरेन और भारतीय फिल्म निर्देशक सुदीप्तो सेन शामिल रहे। (इनपुट,पीआईबी)

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