IFFI2022: जीवंत किरदार जगाते हैं एनिमेशन का जादू- मार्क ओसबोर्न

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IFFI 53rd 2022: इंदौर स्टूडियोसिने प्रतिनिधि।’एनिमेशन के जादू का अहसास उस समय होता है, जब यह जीवंत रूप धारण कर लेता है। एनिमेशन निर्माण की बड़ी चुनौती कहानी को भावनात्मक रूप से कहने की है। जब कहानी दिल को छूती है, तब बात बन जाती है।’ यह बात कुंग फू पांडा और दि लिटिल प्रिंस जैसी मशहूर फिल्मों के निर्माता और एनिमेटर मार्क ओसबोर्न ने कही। वे 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अभिव्यक्ति के एक और माध्यम एनिमेशन विषय पर आयोजित मास्टर क्लास को संबोंधित कर रहे थे।एनिमेशन वैविध्‍यपूर्ण और विशाल माध्यम: मास्टर एनिमेटर ने कहा कि एनिमेशन वैविध्‍यपूर्ण और विशाल माध्यम है, जो किसी भी कहानी को अभिव्‍यक्‍त कर सकता है। उन्होंने कहा, “किसी को किसी ऐसी चीज़ के बारे में महसूस कराना, जिसका कोई वजूद ही नहीं है, वास्तव में शानदार है। यह पुनर्लेखन, पुनर्निर्माण और प्रयोग की एक निरंतर प्रक्रिया का परिणाम है। हमें एनिमेशन के जादू का अहसास उस समय  होता है, जब यह अंततः जीवंत रूप अख्तियार करता है।”एनिमेशन फ़िल्म की पटकथा अंतिम नहीं होती: मार्क ओसबोर्न ने ये भी कहा, ‘एनीमेशन प्रोजेक्‍ट में पटकथा को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता। यहाँ आख़िरी लम्बे तक सुधार की गुंजाइश बनी रहती है। चूंकि यह दृश्य माध्यम से जुड़ा काम है इसीलिय हमें प्रोजेक्‍ट पर बहुत अधिक काम करने की अनुमति भी देना पड़ती है। मास्टर एनिमेटर ने कहा कि हरेक एनिमेटर को अपने भीतर की कहानियों को उजागर करने के लिए एक सपोर्ट सिस्टम की जरूरत होती है। उन्होंने जोर देकर कहा,  “कलाकारों और रचनाकारों की मदद करने से चमत्कार हो सकते हैं। कलाकारों को एनीमेशन सृजित करने के लिए ऐसी जगह की जरूरत होती है, जहां वह आश्‍वस्‍त हो सके।”नकल से नहीं अपनी अकल से काम लें: एनिमेशन निर्माताओं को सतर्क करते हुए मार्क ने कहा, आपको अपने खुद के विचारों की खोज कर बेहतर काम के बारे में सोचना होगा। हर इंसान का दृष्टिकोण और जीवन का अनुभव अलग होता है। सत्र का संचालन प्रोसेनजीत गांगुली ने किया। मास्टरक्लास और इन-कान्‍वर्सेशन  सत्र सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई), एनएफडीसी, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) और ईएसजी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। छात्रों और सिने प्रेमियों को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म निर्माण के हर पहलू से रुबरु कराने के लिए इस वर्ष मास्टरक्लास और इन-कान्‍वर्सेशन  के कुल 23 सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। (इनपुट पीआईबी)
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