IFFI 53rd 2022: इंदौर स्टूडियो, सिने प्रतिनिधि। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के कम उम्र के शहीदों में से एक हैं खुदीराम बोस। सिर्फ 18 साल की उम्र में उन्हें फाँसी दे दी गई थी। उनपर तेलुगू में बनी बायोपिक 53वें इफ्फी के इंडियन पैनोरमा खंड में दिखाई गई है। यह फिल्म 7 भारतीय भाषाओं में रिलीज हो रही है। संसद के शीतकालीन सत्र में इस फ़िल्म के हिंदी संस्करण को प्रदर्शित करने की योजना है। फिल्म का निर्देशन विद्या सागर राजू ने किया है। उन्होंने कहा ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अवसर पर हमने यह फ़िल्म बनाने का फ़ैसला किया। मैं चाहता हूँ इस स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बारे में सभी जाने।
पटकथा के लिये किया गया गहन शोध: इफ्फी के दौरान एक संवाददाता सम्मेलन में विद्या सागर राजू ने कहा, ‘इस फिल्म की पटकथा तैयार करने से पहले उन्हें गहन शोध करना पड़ा। असल में खुदीराम का जीवन और काल स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाओं और व्यक्तित्वों, जैसे बंगाल का विभाजन और रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, सिस्टर निवेदिता, बरेंद्रनाथ घोष और अन्य के साथ जुड़ा हुआ था। फिल्म में स्वतंत्रता संग्राम के बारे में कुछ कम ज्ञात तथ्य भी दिखाए गए हैं, जैसे खुदीराम का केस छह वकीलों ने लड़ा था। उस समय के जाने-माने वकील नरेंद्र कुमार बसु ने खुदीराम का केस लड़ा था, हालांकि वे इसे जीत नहीं पाए थे। इसमें दिखाया गया है कि भारत का पहला झंडा सिस्टर निवेदिता ने डिजाइन किया था और फिल्म में इसका बहुत ही महत्वपूर्ण प्लॉट है। इसमें 1906 में घटित एक अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना को भी प्रदर्शित किया गया, जब देश में पहली ध्वनि रिकॉर्डिंग की गई थी, जिसमें रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् गीत गाया था।
फ़िल्म में बंगाल विभाजन की व्यथा भी: विद्या सागर राजू ने कहा, “जब हमारी टीम ने खुदीराम का इतिहास पढ़ा, तो हमने पाया कि दिखाने के लिए बहुत कुछ था। पटकथा हमें बंगाल में विभाजन की भयावहता तक ले जाती है, जिसमें अनेक ऐतिहासिक पात्र शामिल हैं। मैंने उनके जीवन पर आधारित फिल्म को थोड़ा विस्तृत बनाने की कोशिश की”। निर्देशक ने फिल्म को बढि़या बनाने का श्रेय फिल्म के अभिनेता, अभिनेत्री और टीम के अन्य सदस्यों को दिया। उन्होंने कहा, इसमें काम करने वाले वरिष्ठ तकनीशियन जानते थे कि पटकथा को कैसे जीवंत किया जाए। “वे फिल्म के पीछे से काम करते हैं, लेकिन मेरे लिए वे सर्वप्रथम है।
चुनौती से भरा था खुदीराम का क़िरदार निभाना: नवोदित अभिनेता राकेश जगरलामुदी, जिन्होंने खुदीराम बोस की भूमिका निभाई है, ने अपनी पहली फिल्म में एक स्वतंत्रता सेनानी की भूमिका निभाने में सक्षम होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक चरित्र के वास्तविक जीवन का किरदार निभाना उनके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा, लेकिन, टीम के सहयोग ने इसे आसानी से करने में मदद की। राकेश ने कहा, विवेक ओबेरॉय, अतुल कुलकर्णी, नसीर और अन्य वरिष्ठ अभिनेताओं के साथ काम करना एक नये अभिनेता के लिए सीखने का एक समृद्ध अनुभव था। (इनपुट पीआईबी)
IFFI2022: कम उम्र के शहीद की दास्तान है खुदीराम बोस
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