IFFI 53rd 2022: इंदौर स्टूडियो, सिने प्रतिनिधि। “द स्टोरीटेलर भारतीय सिनेमा के महानायक सत्यजीत रे को विनम्र श्रद्धांजलि है। यह फ़िल्म साहित्यिक चोरी के खिलाफ़ एक मज़बूत संदेश देती है।” भारतीय पैनोरमा की फीचर फिल्म, द स्टोरीटेलर के कलाकार और दल के सदस्यों ने गोवा में 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘अनौपचारिक बातचीत’ के दौरान यह बात कही। आपको बता दें, द स्टोरीटेलर को 53वें इफ्फी में प्रदर्शित किया गया है। दर्शकों की इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली है। यह फिल्म प्रतिष्ठित स्वर्ण मयूर के लिए भी प्रतिस्पर्धा में है।
सत्यजीत रे लिखित एक लघु कथा पर आधारित है फ़िल्म: फिल्म में अभिनेता आदिल हुसैन ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, यह फिल्म सुप्रसिद्ध फिल्मकार और कहानीकार सत्यजीत रे की एक छोटी कहानी पर आधारित है। अभिनेत्री तनिष्ठा चटर्जी ने कहा, “एक कलाकार के रूप में मुझे लगता है कि कला का कोई मूल्य नहीं होना चाहिए, लेकिन आज की दुनिया में, जहां एक फिल्म बनाने में बहुत सारा व्यापार जुड़ा है और जहाँ कुछ भी मुफ्त में नहीं आता है, यह कलाकार समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह किसी की रचना की मौलिकता का सम्मान करे और साहित्यिक चोरी से बचे, इन दिनों न केवल सिनेमा में, बल्कि हर क्षेत्र में कॉपीराइट एक चुनौती भरा मुद्दा है।’’
क्या कॉपी राइट का मूलभूत सिद्धांत: साहित्यिक चोरी से जुड़ी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए आदिल हुसैन ने कहा, “आपको कोई भी चीज़ अगर मुफ्त में मिलती है तो आपको उसके बदले में कुछ देना या भुगतना पड़ता है। इसलिए आपको जो भी प्रॉड्कट या सर्विसेस मिलती है, चाहे वह कला हो या कुछ और आपको उसके लिये या तो पैसे देने चाहिए या निर्माता के प्रति कमसेकम आभार व्यक्त करना चाहिये। कॉपीराइट के मुद्दे से निपटने के लिए यह आधारभूत सिद्धांत होना चाहिए’। निर्माता सुचंदा चटर्जी ने कहा, यह फिल्म साहित्यिक चोरी के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है। उन्होंने कहा, “यह तीन साल की एक कठिन यात्रा थी, लेकिन हम इसके परिणाम से खुश हैं।
”आख़िर कला का उद्देश्य क्या है? : आदिल ने कहा, कला का मूल उद्देश्य हमारे स्तर को ऊपर उठाना है, ताकि हम अपने अस्तित्व को लेकर सवाल पूछ सकें। उन्होंने जोर देकर कहा, “सिनेमा केवल पैसा कमाने के लिए नहीं है, बल्कि यह जागरूकता पैदा करने का एक माध्यम भी है।” तनिष्ठा ने कहा, कला का उद्देश्य कलाकारों और दर्शकों को खुद से सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना है। अपने किरदार के बारे में आदिल ने कहा, “चरित्र के लिए सहानुभूति पैदा करना एक अभिनेता के सबसे बड़े गुणों में से एक होता है।
स्टोरी टेलर एक मनमौजी कहानीकार की कहानी: स्टोरी टेलर फिल्म का निर्देशन अनंत नारायण महादेवन ने किया है। पटकथा किरीट खुराना की है। इसमें परेश रावल के साथ ही आदिल हुसैन, रेवती, तनिष्ठा चटर्जी और जयेश मोरे प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म मुख्य पात्र तारिणी रंजन बंधोपाध्याय एक मनमौजी कहानीकार हैं। उनकी ख्याति किसी एक नौकरी पर नहीं टिकने वाले व्यक्ति की हैं और उन्होंने अपने कामकाजी करियर में 32 नौकरियां बदली। अब 60 साल की उम्र में, सेवानिवृत्ति के बाद कोलकाता में एक विधुर का जीवन जी रहे, बंधोपाध्याय का एकमात्र अफसोस यह है कि उन्हें अपनी दिवंगत पत्नी अनुराधा की अवकाश की उस चाहत को पूरा करने का समय नहीं मिल पाया, जिसकी उन्हें हमेशा इच्छा रहती थी। और अब अचानक नौकरी से बाहर होने के बाद उनके पास दुनिया भर का समय है, लेकिन उनके करीबी लोग उनके आसपास नहीं हैं। (इनपुट पीआईबी)
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