Saturday, October 17, 2026
Homeचर्चित फ़िल्मवो वजह जिसने दिलाया 'स्किन ऑफ यूथ' और 'गोंधल' को अवॉर्ड?

वो वजह जिसने दिलाया ‘स्किन ऑफ यूथ’ और ‘गोंधल’ को अवॉर्ड?

इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI 2025) में वियतनामी फिल्म “Skin of Youth” को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के लिये गोल्डन पीकॉक (स्वर्ण मयूर) और मराठी फिल्म “गोंधल” के निर्देशक संतोष दावखर को सिल्वर पीकॉक (रजत मयूर) का पुरस्कार दिया गया। आख़िर किस वजह से ये फिल्में पुरस्कार की हक़दार बनीं? जानिये पणजी, गोवा के डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंडोर स्टेडियम में संपन्न समारोह की इस रिपोर्ट में। वरिष्ठ फिल्म समीक्षक और कवयित्री रेखा गुप्ता और फिल्म क्रिटिक मुर्तुजा अली ख़ान ने ऐसी ही जानकारियां इस रिपोर्ट में साझा की हैं। दोनों ही 56 वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा भी रहे हैं।  समारोह में उबेइमर रियोस (A Poet) और जारा सोफिया ओस्तान (Little Trouble Girls) को सर्वश्रेष्ठ पुरुष अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनेत्री का अवॉर्ड मिला है। ICFT-UNESCO गांधी पदक नॉर्वेजियन फिल्म “Safe House” को और Bandish Bandits Season 02 सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज़ (ओटीटी) का पुरस्कार मिला है। बाकी सभी पुरस्कारों की जानकारी के आगे इस रिपोर्ट में। पहले आपको बता दें कि सिनेमा की दुनिया में 50 साल का सफ़र तय करने वाले महान् अभिनेता रजनीकांत को इस साल लाइफ टाइम एचिवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।  रजनीकांत के रूप में सौ जन्म लेना चाहूँगा: इस सम्मान के लिये रजनीकांत ने केंद्र सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा- “जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो ऐसा महसूस होता है कि समय जैसे उड़ गया है। मुझे सिनेमा और अभिनय से प्यार है और इसलिये मैं एक अभिनेता के रूप में—रजनीकांत के रूप में—सौ जन्म लेना चाहूँगा।”170 से ज़्यादा फिल्मों को अपने अभिनय से सजाने वाले इस अभिनेता ने कहा, यह सम्मान पूरे फिल्म उद्योग का सम्मान है।और अब बात पुरस्कार पाने वाली फिल्मों और कलाकारों की..कि आख़िर वे किस वजह से पुरस्कारों के विजेता बने हैं ? एशले मेफेयर द्वारा लिखित और निर्देशित वियतनामी फिल्म ‘स्किन ऑफ यूथ’ अपने बेजोड़ कथानक के लिये गोल्डन पीकॉक की हक़दार बनी। फिल्म 1990 के दशक के सैगॉन (वियतनाम) की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म की कहानी सान नामक एक ट्रांसजेंडर सेक्स वर्कर और नाम नामक एक भूमिगत फाइटर की है, जो अपने छोटे बेटे की देखभाल करता है। दोनों की भावनात्मक यात्रा पहचान, प्रेम और संघर्ष के कई पहलुओं को उजागर करती है। अच्छा संगीत और कुशल संपादन फिल्म की एक और ख़ूबी है। जूरी ने फिल्म को साहसिक और शानदार परिभाषित किया। गोंधल- रोमांचित करने वाली कहानी: मराठी फिल्म ‘गोंधल’ सांस्कृतिक परंपराओं के समृद्ध ताने-बाने में रची-बसी है। गोंधल में, संतोष दावखर एक ज़बरदस्त मराठी ड्रामा-थ्रिलर पेश करते हैं, जो एक नए शादीशुदा जोड़े को आशीर्वाद देने के लिए रात भर चलने वाले रिवाज़ के दौरान सामने आती है। लोककथाओं के साथ सस्पेंस वाली फ़िल्म: कहानी एक डार्क मोड़ लेती है जब पवित्र गोंधल सेरेमनी के दौरान गांव के किरदारों के बीच इमोशंस, जलन और राज़ टकराते हैं। यह फिल्म लोककथाओं को सस्पेंस के साथ मिलाती है, जिससे दर्शक इसकी गहरी कहानी और माहौल वाले विज़ुअल्स से मोहित हो जाते हैं। जूरी के शब्दों में- यह फिल्म हमारी कल्पना से परे है, जो आश्चर्यचकित कर देती है।

 

स्पेनिश फिल्म ‘ए पोएट’ के मुख्य अभिनेता उबेइमार रियोस को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष) का सिल्वर पीकॉक पुरस्कार दिया गया। A poet   फिल्म कला और अस्तित्व के बीच सदियों पुराने संघर्ष को एक अनोखे और अप्रत्याशित तरीके से दर्शाती है। जूरी ने कहा कि इस फिल्म में अभिनेता उबेइमार रियोस ने शानदार अभिनय किया है। उन्होंने एक पीड़ित, हारे हुए कवि की भूमिका निभाई है। जब उसकी मुलाकात एक प्रतिभाशाली किशोर से होती है, तो उसकी ज़िंदगी ही बदल जाती है। स्लोवेनियाई फिल्म “Little Trouble Girls” में जारा सोफिया ओस्तान को उनके सूक्ष्म और गहन अभिनय के लिए सिल्वर पीकॉक पुरस्कार मिला। निर्णायक मंडल ने कहा कि उनके चेहरे को “एक क़िताब की तरह पढ़ा जा सकता था।” लिटिल ट्रबल गर्ल्स की नायिका लुसिया अपनी लैंगिक पहचान की खोज में भावनात्मक यात्रा करती है। निर्णायक मंडल ने जारा सोफिया ओस्तान के अभिनय को “सूक्ष्मतम हावभावों से भावनाओं को व्यक्त करने वाला” बताया।नॉर्वेजियन निर्देशक एरिक स्वेन्सन की फिल्म “Safe House” को गांधी पदक मिला। यह फिल्म मध्य अफ्रीकी गणराज्य के गृहयुद्ध में डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स अस्पताल की वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। निर्णायक मंडल ने इसे नैतिक साहस और करुणा का सशक्त चित्रण बताया।फ़ारसी फ़िल्म “माई डॉटर्स हेयर” के लिए हेसम फरहमंद और एस्टोनियाई फ़िल्म “फ़्रैंक” के लिए टोनीस पिल को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ नवोदित फ़ीचर फ़िल्म का निर्देशक पुरस्कार मिला। निर्णायक मंडल ने दोनों फ़िल्मों की प्रशंसा की और कहा कि वे दोनों ही फिल्मों की उत्कृष्टता से समान रूप से प्रभावित हुए। ब्रिटिश-नाइजीरियाई फिल्म निर्माता अकिनोला डेविस जूनियर को फिल्म ‘माई फादर्स शैडो’ के लिए विशेष जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हिंदी फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2’ के निर्देशक करण सिंह त्यागी को ‘भारतीय फीचर फिल्म के सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक’ का पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केसरी चैप्टर 2 के निर्देशक करण सिंह त्यागी को 56वें इफ्फी में उनकी पहली फिल्म के लिए यह पुरस्कार मिला। ‘बंदिश बैंडिट्स सीज़न 2’ को सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज़ (ओटीटी) का पुरस्कार मिला। निर्णायक मंडल ने महसूस किया कि इस वेब सीरीज़ की कहानी संगीत और कला को सभी के लिए सरल और सुलभ बनाती है।केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने समारोह में कहा, इस वर्ष वेव्स फिल्म बाजार ने 1,050 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया। पहली बार महिलाओं द्वारा निर्देशित 50 फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। मुंबई में आयोजित वेव्स शिखर सम्मेलन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी की स्थापना को उन्होंने नवाचार का प्रतीक बताया।धर्मेंद्र, सतीश शाह, पीयूष पांडे, असरानी, ज़ुबीन गर्ग, रतन थियम, शेफाली जरीवाला, कामिनी कौशल, सुलक्षणा पंडित, आलोक चटर्जी, श्याम बेनेगल और ज़ाकिर हुसैन जैसे दिवंगत कलाकारों को श्रद्धांजलि दी गई। वहीं पारंपरिक नृत्य, दिव्यांग कलाकारों के प्रदर्शन, यक्षगान और मांगणियार समुदाय की प्रस्तुतियों ने समारोह को जीवंत बना दिया।सिनेमा जन चेतना को आकार देने वाला: समारोह में डॉ. प्रमोद सावंत (मुख्यमंत्री, गोवा) ने कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जन-चेतना को आकार देने, सामाजिक बदलाव को प्रेरित करने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का माध्यम है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को फिल्मों और कहानी कहने में परिलक्षित बताया।  ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ के उदय का समय: संजय जाजू (सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) ने प्रधानमंत्री के विज़न का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ के उदय का समय है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (IICt) को उन्होंने रचनाकारों के लिए कौशल और प्रौद्योगिकी का केंद्र बताया। इनपुट और तस्वीरें पीआईबी गोवा। आगे पढ़िये – फिल्म ‘शोले’ के एक्शन सीन में धर्मेंद्र घोड़े से गिर पड़े थे https://indorestudio.com/film-sholay-gabbar-end-scene/

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