इंदौर में प्रीतम लाल दुआ सभागृह का किराया बढ़ने से कलाकारों को बड़ा झटका लगा है। प्रशासन के इस फैसले से उन कला संस्थाओं की मुश्किलें बढ़ गईं हैं जो किसी तरह धनराशि जुटाकर आयोजन करती हैं। इनमें से कुछ संस्थाएं ऐसी हैं जिनसे इंदौर की सांस्कृतिक फिज़ा को नया जीवन मिलता है। उनकी कोशिशों से कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। इस रिपोर्ट में आप यहां हुए कुछ आयोजनों की तस्वीरें देख सकते हैं। दिये गये चित्रों में सभागृह के साथ ही यहां प्रस्तुत नाटक, सिनेमा, कला, संवाद और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक है।
बढ़े किराये के बाद, पहले जहां चार घंटे के लिये छब्बीस सौ रुपये लगते थे, अब छह घंटे के लिये बारह हज़ार देना होंगे। इसी तरह दिन भर के लिये किराया तीस हज़ार होगा, इतनी ही अमानत राशि भी देना होगी, इस तरह यह राशि साठ हज़ार हो जायेगी। ज़ाहिर है कि छोटी संस्थाओं के इस तरह बढ़े किराये का भार उठाना आसान नहीं होगा। इस विषय में इंदौर के वरिष्ठ लेखक और पत्रकार कीर्ति राणा ने यह विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

कीर्ति राणा के अनुसार, किराये में वृद्धि की वजह सभागृह का नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण है। विकास प्राधिकरण ने करीब दो करोड़ की लागत से इस सभागृह और परिसर का सौंदर्य करण किया है। अहिल्या पुस्तकालय परामर्श दात्री समिति ने पिछले साल नवंबर में दुआ सभागृह के सौंदर्य करण के कार्य का ठेका इंदौर विकास प्राधिकरण को दिया था। प्राधिकरण ने यहां पर कई तरह के कार्य किये हैं।
इनमें बाहर परिसर में बारिश में भरने वाले पानी की समस्या दूर करने के लिये अंडर ग्राउंड पाइप लाइन का काम, लाइटिंग, मुख्य द्वार बदलने, रंगाई-पुताई, साउंड सिस्टम, कारपेट, हाल में नई कुर्सियां लगाना भी शामिल है। इसी तरह प्रदर्शनी हाल में नए एयर कंडीशनर लगाने, पहली मंजिल वाले हॉल में सुधार कार्य के साथ एयर कंडीशनर लगाने का काम किया गया है। इन कामों का पूरा होने के साथ ही संभागायुक्त डॉक्टर खाड़े ने इसका लोकार्पण भी कर दिया है।
इंदौर के रवींद्र नाट्य गृह का किराया अधिक होने से छोटी संस्थाओं के लिये यहां कार्यक्रम करना आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला रहता था। ऐसे में एक छोटे सभागृह की मांग ने जोर पकड़ा। संभागायुक्त अशोक दास के वक्त पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पीपीपी मोड पर देवी अहिल्या लायब्रेरी वाली जमीन पर सभागार निर्मित करने का निर्णय लिया गया। आर्थिक सहयोग करने वालों में प्रीतम लाल दुआ ने इस शर्त पर सर्वाधिक 26 लाख रु का सहयोग किया था कि सभागृह उनके नाम पर हो। नामकरण उनके नाम पर किया गया लेकिन कर्मचारियों की नियुक्ति-वेतन आदि का अधिकार सरकार के हाथ में ही रहा।
साल भर सांस्कृतिक कार्यक्रम करने वाली संस्था सूत्रधार के सत्यनारायण व्यास ने कहा – ‘ दो करोड़ खर्च करने के बाद भी सीटिंग कैपेसिटी बढ़ी नहीं है। सीटों की संख्या 120 ही हैं। फिर किराया इतना बढ़ाने का क्या औचित्य ? इंदौर जैसे शहर में हर रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। छोटी संस्थाएं दुआ सभागृह को इसलिये उपयुक्त मानती हैं कि यहां किराया कम है। छह घंटे के तीस हजार देना मुश्किल है। मुख्य मंत्री के प्रभार वाले जिले में दुआ सभागृह का किराया इतना बढ़ाकर अधिकारियों ने एक तरह से छोटी संस्थाओं का गला घोंटने जैसा काम किया है। छोटी संस्थाएं चंदा जमा कर कला आयोजन करती हैं। हम सारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ संभागायुक्त से मुलाकात करेंगे। उनसे अपील करेंगे कि वे बढ़ाए गए किराये की समीक्षा करें’।
इंदौर थियेटर के अध्यक्ष सुशील गोयल ने तो दो करोड़ खर्च पर ही आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा- ‘ यह निर्णय छोटे स्तर के रंगकर्मियों और संस्थाओं से सुविधा छीन लेने जैसा है। हमने तो इतने खर्च के लिये कहा नहीं था, बेहतर होता सीटें बढ़ाने पर सोचते। यह सभागृह साल भर में सबसे ज्यादा आउटपुट देने वाला हॉल है। लगता है कमिश्नर एक साल में ही संस्थाओं से सारा खर्चा वसूलना चाहते हैं। अधिकारियों से पूछा जाना चाहिए कि इस निर्णय लेने से पहले कला संस्थाओं और स्थानीय रंगकर्मियों से चर्चा भी की या नहीं’?
दुआ सभागृह का संचालन देवी अहिल्या पुस्तकालय परामर्शदात्री समिति द्वारा किया जाता है। समिति की सचिव लिली डाबर ने इस विषय में कहा, सुविधाओं में वृद्धि कलाकारों-दर्शकों के लिये ही तो की गई है, किराया बढ़ाना भी ज़रूरी था। समिति के अध्यक्ष संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े हैं, यह बात उनकी जानकारी में है।
लिली डाबर ने कहा, पहले सोम से शुक्रवार तक चार घंटे का किराया छब्बीस सौ और इतनी ही सुरक्षा निधि जमा होती थी। शनिवार-रविवार को चार घंटे के चार हज़ार और इतनी ही सुरक्षा राशि लेते थे। चार घंटे से अधिक पर पांच सौ रु प्रति घंटा लेते थे। अब छह घंटे का किराया बारह हज़ार, इतनी ही सुरक्षा राशि यानी कुल चौबीस हज़ार इस जमा राशि में से बिजली और सफाई खर्च लेकर बाकी जमा राशि वापस कर देंगे। उन्होंने कहा, आठ घंटे के लिये चौदह हज़ार और इतनी ही सुरक्षा निधी, जबकि दिन भर के लिये तीस हज़ार और तीस हज़ार ही सुरक्षा राशि सहित कुल साठ हज़ार जमा कराना होगा। इंदौर स्टूडियो के लिये वरिष्ठ लेखक और पत्रकार कीर्ति राणा की रिपोर्ट। कीर्ति राणा वर्तमान में प्रजातंत्र के वरिष्ठ संपादन सहयोगी हैं। क्या आपके शहर में भी सभागृहों के किरायें को लेकर कोई दिक्कत हैं। कमेंट लिखिये और अपनी कला गतिविधियों के बारे में कवरेज के लिये पढ़ते, सुनते और देखते रहिये indorestudio.com











