शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। इंदौर के अभिनव गाँधी कला समाज में कलाकारों को, उनकी प्रस्तुतियों के लिये, दो प्रेक्षागृहों की सौग़ात मिलने जा रही है। दोनों के रंग-रूप बदलने का काम तेज़ी से चल रहा है, और यह अब करीब-करीब अंतिम चरण में पहुँच गया है। एक प्रेक्षागृह अभिनव कला समाज के हॉल में, नई सजावट के साथ तैयार हो रहा है। दूसरा इसके पार्श्व में मौजूद परिसर में, एक मुक्ताकाशी मंच यानी ओपन एयर थियेटर के स्वरूप में आकार ले रहा है। दोनों की नई साज-सजावट से शहर के कलाकारों की जिज्ञासा और अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं।
प्रवीण खारीवाल के प्रयासों का नतीजा: यह नई कोशिशें अभिनव कला समाज के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल के निरंतर प्रयासों का नतीजा है, वे स्टेट प्रेस क्लब इंदौर के अध्यक्ष भी हैं। श्री खारीवाल दोनों ही संस्थाओं की मदद से प्रेक्षागृहों के पुनर्निमाण के काम में जुटे हैं। हाल ही में उनके साथ इन दोनों ही प्रेक्षागृहों में हो रहे काम को देखने का अवसर मिला। श्री खारीवाल ने इनके बारे में विस्तार से जानकारियां दीं। (लेखक शकील अख़्तर से चर्चारत प्रवीण खारीवाल)
बदल गई हॉल की काया: अभिनव कला समाज में प्रवेश करते ही सामने की तरफ़ जो हॉल है उसकी दीवारें बदल चुकी हैं। इन्हें लकड़ियों से सुसज्जित किया गया है। प्रतिगूँज या इको को रोकने के लिये वुडन वॉल बनाईं गईं हैं। इससे बाहरी ध्वनियों को भी रोकने में मदद होगी। सजावट में सुंदरता का भी खयाल रखा गया है।
मंच की भी नई साज-सज्जा: हॉल के साथ मंच को नई तरह से संवारा और सजाया जा रहा है। अब ये हॉल एक छोटे ऑडिटोरियम में बदल गया है। बेहतर लाइट और साउंड सिस्टम का भी प्रबंधन किया जा रहा है। इसी हॉल में पहले भी मंचन के साथ रिहर्सल की गतिविधियां चला करती थीं। इस हॉल का अब संवाद के साथ कई तरह के कार्यक्रमों में सदुपयोग हो सकेगा।
मुक्ताकाशी मंच का नये सिरे से निर्माण: इसी तरह अभिनव कला समाज के पीछे के खुले प्रांगण में एक मुक्ताकाशी मंच भी नये सिरे से बनकर तैयार हो रहा है। यहां पर 30 x 20 वर्ग फुट का एक स्टेज बन रहा है। मुक्ताकाशी मंच के सामने की बैठक व्यवस्था अर्ध चंद्राकार है। इसमें 260 दर्शक बैठ सकेंगे।
नव-निर्माण का काम अंतिम दौर में: दोनों ही दीर्घाओं के काम अब अंतिम दौर हैं। जल्द ही इन मंचों पर कला गतिविधियां फिर से शुरू हो जाएंगी। बता दें कि अभिनव कला समाज कला, साहित्य और संगीत की 74 साल पुरानी संस्था है। इस संस्था से कलाकारों के साथ कला प्रेमी इंदौर की गहरी स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। कई बड़े आयोजन का यह स्थल गवाह रहा है। यहाँ यह बताना भी आवश्यक है, अभिनव कला समाज इंदौर के एमजी रोड पर गाँधी हॉल के करीब ही मौजूद है।
कलाकारों के हित में करेंगे काम: यहां यह जानना दिलचस्प है कि दर्शक दीर्घाओं के नव श्रंगार के काम को आगे बढ़ाने वाले प्रवीण खारीवाल पत्रकार होने के साथ ही एक संगीत कलाकार भी हैं। उनकी शायरी में भी गहरी रुचि है। अभिनव कला समाज का उत्तरदायित्व संभालने के बाद से खारीवाल ने यहां होने वाली संगीत और नाटय विधा से जुड़ी गतिविधियों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने का काम प्रारंभ किया है। इसके नतीजे अब सामने आने लगे हैं। (जब यहां के मंच पर हारमोनियम रखा दिखा तो हमने इसे छेड़ने वाले प्रवीण जी से आवाज़ मिलाने की ख़्वाहिश भी जता दी।)
कलाकारों की मुश्किलों का अहसास: श्री खारीवाल के इस काम से शहर के कलाकारों की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। हर शहर की तरह इंदौर में भी प्रेक्षागृहों का किराया बहुत ज़्यादा है। रिहर्सल की जगहों की कमी है। ऐसे में कलाकार चाहते हैं कि अगर अभिनव में न्यूनतम या रियायती शुल्क पर सुविधाएं मिल सकें, तो यह कलाकारों के हित में होगा। ऐसा होने से शहर में कला गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकेगा। इस विषय में प्रवीण खारीवाल ने कहा – ‘कला और कलाकारों के साथ आने वाली मुश्किलों का हमें अहसास है, सभी के हित में जो भी हो सके, हम यह कोशिश पहले से ही करते आएं हैं, आगे भी ज़रूर करते रहेंगे। अगर कोई सुझाव आते हैं तो हम अपनी सीमाओं में उनपर अमल की कोशिश करेंगे’।
पत्रकारिता के साथ कला-संस्कृति: प्रवीण खारीवाल स्टेट प्रेस क्लब, इंदौर के अध्यक्ष भी हैं। उनका यह संगठन पत्रकारिता से जुड़े वैचारिक आयोजन, डेढ़ दशक से कर रहा है। आयोजनों की एक बड़ी खूबी इसमें होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हैं। इस साल 14 से 16 अप्रैल 2023 तक हुए पत्रकारिता महोत्सव में भी अभिनव कला समाज से जुड़े शहर के तीन नाट्य समूहों के नाटकों को मंचन का अवसर दिया गया था, जबकि दो संगीत से जुड़े आयोजन भी इसमें हुए थे। (इस तस्वीर में इंदौर के संगीत कला समीक्षक डॉ.विवेक गावड़े के साथ प्रवीण खारीवाल)
कला और पत्रकारिता का नया केंद्र: अभिनव कला समाज, इंदौर में कला और पत्रकारिता के एक नये केंद्र के रूप में भी उभरता जा रहा है। यहाँ तीन मंज़िलों पर संगीत और नाटकों की गतिविधियां हर दिन जारी रहती हैं। नाटकों की रिहर्सल के साथ ही शास्त्रीय संगीत की कक्षाएं सुबह से रात तक चलती रहती हैं।
स्टेट प्रेस क्लब का कार्यालय: चूँकि स्टेट प्रेस क्लब का कार्यालय भी यहीं है, इसलिये संगठन से जुड़े पत्रकारों का भी आना-जाना चलता रहता है। इस तरह कला और पत्रकारिता का संगम यहां एक नई उड़ान भर रहा है। नई-नई रचनात्मक गतिविधियों के आकार लेने का सिलसिला नज़र आने लगा है। परिसर में एक रेस्टारेंट खुलने से भी एक और ज़रूरी सुविधा भी यहाँ जुड़ गई है। आगे पढ़ियें –
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