Wednesday, May 13, 2026
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इंदौर के रंग-मसीहा थे प्रोफ़ेसर विनोद डेविड -सुशील जौहरी

सुशील जौहरी, इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। अस्सी के दशक में इन्दौर के रंगकर्मियों को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रंगकर्म से रुबरु करवाने वाले प्रख्यात अर्थशास्त्री और साहित्यकार प्रोफेसर विनोद डेविड का 19 अप्रैल को निधन हो गया। वे कोरोना से संक्रमित थे। उनका बीते कुछ दिनों से इलाज चल रहा था। उनका निधन शहर के कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। वे एक ऐसे रंग मसीहा थे जो इंदौर में कलाकारों के पारिवारिक सदस्य बन गए थे।

87 साल के डॉ. विनोद सी वे इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज के चेयरमैन थे। संक्रमित होने से पूर्व तक उनका लेखन कार्य जारी था। आप इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित डेविड के पिताश्री थे। उनके निधन से साहित्य जगत एवं शिक्षा जगत स्तब्ध है। 1981-82 में प्रोफेसर साहब विनोद डेविड ने’ एक नाटक ,’अस्त होते सूर्य ने कहा’ लिखा था। इस नाटक के मंचन ने उनके मन में नाट्य कला के प्रति ऐसा लगाव पैदा किया कि उनका निवास और क्रिश्चियन कॉलेज का ब्राॅन्सन हॉल इन्दौर के रंग पिपासु नौजवानों के घर बन गए। अपने निकटवर्ती मित्र और उस दौर के सर्वाधिक शक्तिशाली राजनेता स्व महेश जोशी के साथ मिलकर एक नाट्य संस्था ‘मंच’ का गठन किया गया और रानावि के प्रतिभाशाली कलाकार संजीव दीक्षित जी को इन्दौर के नव नाट्य कर्मियों को रंग प्रशिक्षण हेतु बुलवाया गया। कार्यशाला में दो नाटक- ‘सड़क गूंगी है और भोलाशंकर बम (वुड बी जंटल मेन ) तैयार किये गये। कार्यशाला में उस समय हमारी सक्रिय नाट्य संस्था ‘अरंक’ के सभी कलाकारों के साथ ही कई नये रंग कर्मियों ने ज़बरदस्त भागीदारी निभाई । जल्द ही ‘मंच’ एक ऐसा नाट्य समूह बन गया जिसमे काम करना सभी के लिए गौरव की बात बन गई। प्रोफेसर विनोद डेविड जी को सभी प्यार से लड्डु बाबा कहने लगे। वो एक तरह से कलाकारों के परिवार के वरिष्ठ सदस्य बन चुके थे।

अगले नाटक ‘बांझ रात’ और ‘चोर के घर मोर’ के निर्देशन के लिए लड्डु बाबा के साडू़ भाई उस समय के प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक राजेंद्र गुप्ता जी को इन्दौर में बुलाया गया। यह इन्दौर में किसी एब्सर्ड नाटक की शुरुआत थी। नाटक में लड्डु बाबा का पूरा परिवार समर्पित भाव से सम्मिलित हुआ। इसके बाद नाटक ‘एक और एक दो’ मेरे निर्देशन में खेला गया। फिर उनके पुत्र अमित डेविड जी मुम्बई चले गए । लड्डु बाबा की अधिक ज़रुरत भोपाल में सरकार को पड़ने लगी और ना चाहते हुए भी गतिविधियों पर विराम लगने लगा। यद्दपि उनका नाट्य लेखन के प्रति लगाव बना रहा।अभी कुछ समय पहले ही उन्होंने गांधीजी पर एक नाटक लिखा है। डॉ. विनोद डेविड का जन्म 27 सितंबर 1934 को हुआ। आपने 34 वर्षों तक विभिन्न महाविद्यालयों के अर्थशास्त्र विभाग में सेवाएं दीं। डॉ. डेविड मध्यप्रदेश वित्त आयोग प्रथम एवं द्वितीय के 1994 से 2004 तक वरिष्ठ सदस्य रहे। उन्होंने कई नाटक लिखे जिनमें काव्य नाटक ‘सड़क गूंगी है’, ‘बांझ रात’ तथा एक और एक दो काफी प्रसिद्ध हैं। काव्य संग्रह ‘खुद से जिरह’ उनकी काफी प्रसिद्ध रचना है। एक एकांकी और एक और काव्य संग्रह का प्रकाशन होना था । स्व. डेविड के निधन पर पूर्व विधायक अश्विन जोशी, महाविद्यालय परिवार के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार डॉ. पंकज बिरमाल, प्रो. प्रकाश चौधरी, डॉ. दीपक दुबे, डॉ. सीमा व्यास, रजिस्टार सैयद अली सहित क्रिश्चियन कॉलेज समस्त स्टॉफ ने श्रद्धांजलि अर्पित की है

 

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